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दुर्गा पूजा की खुशियां लेकर घर लौट रहा था नरेश: रास्ते में थम गई जिंदगी; बेंगलुरु से घर लौटते समय हुआ हादसा
Sun, 27 Sep 2026 08:31 AM IST
मुंगेर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय
Published by: मुंगेर ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2026 08:31 AM IST
सार
दुर्गा पूजा पर परिवार के साथ त्योहार मनाने बेंगलुरु से घर लौट रहे 23 वर्षीय नरेश कुमार पासवान की लाखो स्टेशन के समीप चलती ट्रेन से गिरने से मौत हो गई। अप्रैल में उसकी शादी हुई थी और वह अगस्त में मजदूरी करने बेंगलुरु गया था। दोस्तों ने करीब एक किलोमीटर तक तलाश करने के बाद रेलवे ट्रैक के पास उसका शव बरामद किया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
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anuj crime
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दुर्गा पूजा पर घर लौटने की खुशी, पत्नी से मिलने की आस और परिवार के साथ त्योहार मनाने के सपने संजोकर बेंगलुरु से निकला 23 वर्षीय नरेश कुमार पासवान अपने घर की चौखट तक नहीं पहुंच सका। सफर के दौरान बेगूसराय-खगड़िया रेलखंड पर लाखो स्टेशन के समीप चलती ट्रेन से गिरकर उसकी दर्दनाक मौत हो गई। जिस बेटे के लौटने का इंतजार माता-पिता और जिस पति के आने की राह पत्नी देख रही थी, वह आखिरकार घर लौटा भी तो जिंदा नहीं, बल्कि तिरपाल में लिपटे शव के रूप में।
नरेश की मौत की खबर मिलते ही समस्तीपुर जिले के मुजौना गांव स्थित उसके घर में चीख-पुकार मच गई। दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच अचानक मातम पसर गया। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। कुछ महीने पहले ही नरेश की शादी हुई थी और बेहतर भविष्य का सपना लेकर वह मजदूरी करने बेंगलुरु गया था।
चार दिन पहले काम खत्म हुआ, फोन कर कहा था-अब घर आऊंगा
नरेश कुमार पासवान, जालिम पासवान का पुत्र था। तीन भाइयों और चार बहनों में सबसे छोटा नरेश परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए पिता के साथ मजदूरी करता था। इसी वर्ष अप्रैल में उसकी शादी विभा कुमारी से हुई थी। शादी के बाद घर-परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ीं तो वह अगस्त में बेंगलुरु चला गया।वह गांव के दो दोस्तों के साथ राजमिस्त्री के साथ मजदूरी कर रहा था। बताया गया कि करीब चार दिन पहले वहां काम खत्म हो गया। काम बंद होने के बाद नरेश ने अपने माता-पिता और पत्नी को फोन कर इसकी जानकारी दी। दुर्गा पूजा नजदीक थी, इसलिए परिजनों ने उसे घर लौटने को कहा। नरेश भी अपनों के बीच त्योहार मनाने की उम्मीद लेकर घर के लिए रवाना हो गया। घर में उसके आने को लेकर उत्साह था। पूजा की तैयारियां चल रही थीं। परिवार को क्या पता था कि जिस बेटे के स्वागत की तैयारी हो रही है, उसी की मौत की खबर कुछ ही घंटों बाद घर का माहौल बदल देगी।
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दोस्तों के साथ ट्रेन में सवार हुआ, फिर अचानक गायब हो गया नरेश
नरेश अपने दोस्तों के साथ ट्रेन संख्या 15227 यशवंतपुर-मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस में सवार हुआ था। ट्रेन शुक्रवार की अहले सुबह करीब तीन बजे लाखो स्टेशन के पास पहुंची। इसी दौरान नरेश ने दोस्तों से शौचालय जाने की बात कही और अपनी सीट से उठकर बोगी के दरवाजे की ओर चला गया। काफी देर बीतने के बाद भी जब वह वापस नहीं आया तो दोस्त दीपक कुमार को चिंता हुई। वह उसे खोजते हुए दरवाजे के पास पहुंचा। वहां मौजूद एक यात्री ने बताया कि शौचालय की ओर गया युवक अचानक असंतुलित होकर खुले दरवाजे से नीचे गिर गया। यह सुनते ही दोस्तों के होश उड़ गए। उन्होंने तत्काल वैक्यूम जंजीर खींचकर ट्रेन रुकवाई और अंधेरे में रेलवे ट्रैक के किनारे नरेश की तलाश शुरू कर दी।
एक किलोमीटर तक अंधेरे में खोजते रहे दोस्त, मिला खून से लथपथ शव
रात के अंधेरे में नरेश के दोस्त रेलवे ट्रैक के किनारे उसे तलाशते रहे। करीब एक किलोमीटर पीछे जाने के बाद लाखो स्टेशन से लगभग 200 मीटर पश्चिम पोल संख्या 157 के पास उन्हें नरेश का शव दिखाई दिया। ट्रेन से गिरने के कारण उसके सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई थीं। जिस दोस्त के साथ कुछ घंटे पहले तक नरेश घर लौटने और त्योहार मनाने की बातें कर रहा था, उसी दोस्त के सामने उसका निर्जीव शरीर पड़ा था। दोस्तों ने घटना की सूचना पुलिस और नरेश के परिजनों को दी।
ये भी पढ़ें- 10वीं-12वीं में फेल: पिता ने मारा ताना तो आईआईटी पहुंचे, आईपीएस मोहिबुल्लाह को अमेरिका देगा एशियन हीरो सम्मान
जिस घर में पूजा की तैयारी थी, वहां मच गया विलाप
नरेश की मौत की खबर जैसे ही मुजौना गांव पहुंची, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। माता-पिता बेटे के घर आने की राह देख रहे थे। पत्नी विभा कुमारी भी पति के लौटने की उम्मीद लगाए बैठी थी। पति की मौत की खबर सुनते ही वह बेसुध हो गई। परिजनों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल था कि कुछ देर पहले जिस नरेश से फोन पर बात हुई थी, वह अब इस दुनिया में नहीं है। दुर्गा पूजा पर घर में खुशियां आने वाली थीं, लेकिन उससे पहले ही घर में मातम छा गया। जिस आंगन में बेटे के लौटने की खुशी में चहल-पहल होनी थी, वहां अब रोने की आवाजें गूंजने लगीं। मां-बाप की आंखों के सामने बेटे की यादें थीं और पत्नी की आंखों के सामने शादी के महज कुछ महीनों बाद उजड़ गया अपना संसार।
अप्रैल में सात फेरे, कुछ महीनों बाद उजड़ गया सुहाग
नरेश की शादी इसी साल अप्रैल में हुई थी। अभी उसकी शादी को कुछ ही महीने बीते थे। पत्नी विभा के साथ उसने नई जिंदगी के सपने संजोए थे। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए वह अगस्त में बेंगलुरु गया था। नरेश के परिजनों को उम्मीद थी कि मजदूरी कर लौटने के बाद वह परिवार के लिए कुछ बेहतर करेगा। दुर्गा पूजा के मौके पर घर लौटने का उसका फैसला परिवार के लिए खुशी की वजह था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा गया शव
घटना की सूचना मिलने के बाद लाखो थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई पूरी की और सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। नरेश का शव गांव पहुंचते ही एक बार फिर चीख-पुकार मच गई। जिस बेटे और पति के स्वागत की तैयारी थी, उसी की अंतिम विदाई की तैयारी होने लगी। नरेश की असमय मौत ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है। परिवार के लिए इस बार दुर्गा पूजा की खुशियां हमेशा के लिए एक दर्दनाक याद बन गईं।
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नरेश की मौत की खबर मिलते ही समस्तीपुर जिले के मुजौना गांव स्थित उसके घर में चीख-पुकार मच गई। दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच अचानक मातम पसर गया। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। कुछ महीने पहले ही नरेश की शादी हुई थी और बेहतर भविष्य का सपना लेकर वह मजदूरी करने बेंगलुरु गया था।
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चार दिन पहले काम खत्म हुआ, फोन कर कहा था-अब घर आऊंगा
नरेश कुमार पासवान, जालिम पासवान का पुत्र था। तीन भाइयों और चार बहनों में सबसे छोटा नरेश परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए पिता के साथ मजदूरी करता था। इसी वर्ष अप्रैल में उसकी शादी विभा कुमारी से हुई थी। शादी के बाद घर-परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ीं तो वह अगस्त में बेंगलुरु चला गया।वह गांव के दो दोस्तों के साथ राजमिस्त्री के साथ मजदूरी कर रहा था। बताया गया कि करीब चार दिन पहले वहां काम खत्म हो गया। काम बंद होने के बाद नरेश ने अपने माता-पिता और पत्नी को फोन कर इसकी जानकारी दी। दुर्गा पूजा नजदीक थी, इसलिए परिजनों ने उसे घर लौटने को कहा। नरेश भी अपनों के बीच त्योहार मनाने की उम्मीद लेकर घर के लिए रवाना हो गया। घर में उसके आने को लेकर उत्साह था। पूजा की तैयारियां चल रही थीं। परिवार को क्या पता था कि जिस बेटे के स्वागत की तैयारी हो रही है, उसी की मौत की खबर कुछ ही घंटों बाद घर का माहौल बदल देगी।
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नरेश अपने दोस्तों के साथ ट्रेन संख्या 15227 यशवंतपुर-मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस में सवार हुआ था। ट्रेन शुक्रवार की अहले सुबह करीब तीन बजे लाखो स्टेशन के पास पहुंची। इसी दौरान नरेश ने दोस्तों से शौचालय जाने की बात कही और अपनी सीट से उठकर बोगी के दरवाजे की ओर चला गया। काफी देर बीतने के बाद भी जब वह वापस नहीं आया तो दोस्त दीपक कुमार को चिंता हुई। वह उसे खोजते हुए दरवाजे के पास पहुंचा। वहां मौजूद एक यात्री ने बताया कि शौचालय की ओर गया युवक अचानक असंतुलित होकर खुले दरवाजे से नीचे गिर गया। यह सुनते ही दोस्तों के होश उड़ गए। उन्होंने तत्काल वैक्यूम जंजीर खींचकर ट्रेन रुकवाई और अंधेरे में रेलवे ट्रैक के किनारे नरेश की तलाश शुरू कर दी।
एक किलोमीटर तक अंधेरे में खोजते रहे दोस्त, मिला खून से लथपथ शव
रात के अंधेरे में नरेश के दोस्त रेलवे ट्रैक के किनारे उसे तलाशते रहे। करीब एक किलोमीटर पीछे जाने के बाद लाखो स्टेशन से लगभग 200 मीटर पश्चिम पोल संख्या 157 के पास उन्हें नरेश का शव दिखाई दिया। ट्रेन से गिरने के कारण उसके सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई थीं। जिस दोस्त के साथ कुछ घंटे पहले तक नरेश घर लौटने और त्योहार मनाने की बातें कर रहा था, उसी दोस्त के सामने उसका निर्जीव शरीर पड़ा था। दोस्तों ने घटना की सूचना पुलिस और नरेश के परिजनों को दी।
ये भी पढ़ें- 10वीं-12वीं में फेल: पिता ने मारा ताना तो आईआईटी पहुंचे, आईपीएस मोहिबुल्लाह को अमेरिका देगा एशियन हीरो सम्मान
जिस घर में पूजा की तैयारी थी, वहां मच गया विलाप
नरेश की मौत की खबर जैसे ही मुजौना गांव पहुंची, परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। माता-पिता बेटे के घर आने की राह देख रहे थे। पत्नी विभा कुमारी भी पति के लौटने की उम्मीद लगाए बैठी थी। पति की मौत की खबर सुनते ही वह बेसुध हो गई। परिजनों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल था कि कुछ देर पहले जिस नरेश से फोन पर बात हुई थी, वह अब इस दुनिया में नहीं है। दुर्गा पूजा पर घर में खुशियां आने वाली थीं, लेकिन उससे पहले ही घर में मातम छा गया। जिस आंगन में बेटे के लौटने की खुशी में चहल-पहल होनी थी, वहां अब रोने की आवाजें गूंजने लगीं। मां-बाप की आंखों के सामने बेटे की यादें थीं और पत्नी की आंखों के सामने शादी के महज कुछ महीनों बाद उजड़ गया अपना संसार।
अप्रैल में सात फेरे, कुछ महीनों बाद उजड़ गया सुहाग
नरेश की शादी इसी साल अप्रैल में हुई थी। अभी उसकी शादी को कुछ ही महीने बीते थे। पत्नी विभा के साथ उसने नई जिंदगी के सपने संजोए थे। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए वह अगस्त में बेंगलुरु गया था। नरेश के परिजनों को उम्मीद थी कि मजदूरी कर लौटने के बाद वह परिवार के लिए कुछ बेहतर करेगा। दुर्गा पूजा के मौके पर घर लौटने का उसका फैसला परिवार के लिए खुशी की वजह था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा गया शव
घटना की सूचना मिलने के बाद लाखो थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई पूरी की और सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। नरेश का शव गांव पहुंचते ही एक बार फिर चीख-पुकार मच गई। जिस बेटे और पति के स्वागत की तैयारी थी, उसी की अंतिम विदाई की तैयारी होने लगी। नरेश की असमय मौत ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है। परिवार के लिए इस बार दुर्गा पूजा की खुशियां हमेशा के लिए एक दर्दनाक याद बन गईं।