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बिहार में बच्चों की मौत का कारण लीची नहीं बल्कि गरीबी मानी जा रही है

Mon, 24 Jun 2019 10:11 AM IST
शिल्पा ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Mon, 24 Jun 2019 10:11 AM IST
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Main reason of Children deaths in Bihar may be poverty not lichi
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

बिहार में एईएस (एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम) से मरने वाले बच्चों की संख्या 150 तक पहुंच गई है। बिहार सरकार और केंद्रीय एजेंसियों की टीमें एक ओर बच्चों की मौत के असल कारणों का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं। वहीं दूसरी तरफ एक प्रारंभिक सर्वेक्षण से पता चला है कि इन बच्चों की मौत का मुख्य कारण लीची नहीं बल्कि गरीबी है। इस सर्वेक्षण में और भी कई बड़े खुलासे हुए हैं।


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बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के 289 परिवारों को इस सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण में शामिल किया गया है। जिसमें पता चला है कि 280 परिवार गरीबी रेखा से नीचे आते हैं। ये लोग दो वक्त की रोटी के लिए दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। इन परिवारों में 29 लड़कियां ही ऐसी हैं जो सरकार की मुख्यमंत्री कन्या उत्तम योजना की लाभार्थी हैं। वहीं 99 परिवार ऐसे हैं जिन्हें इंदिरा आवास योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार अधिकतर परिवारों में तीन से अधिक बच्चे हैं। 96 परिवारों के पास राशन कार्ड नहीं हैं और 124 परिवारों को बीते महीने राशन ही नहीं मिला। इनमें से केवल 159 परिवारों को ही अपने बच्चों को मुजफ्फरपुर जिले के अस्पताल में ले जाने के लिए एंबुलेंस मिली थी। 

383 एईएस के मरीजों पर किए गए सर्वेक्षण (जिनमें से 100 की बुधवार तक मौत हो गई और बाकी अस्पताल में भर्ती हैं) से पता चलता है कि इनमें से 223 लड़कियां हैं और 159 लड़के हैं। अधिकतर मरीजों (84 लड़कियां और 51 लड़के) की उम्र एक से तीन साल के बीच है। संभावना जताई जा रही है कि इन बच्चों को लीची के बागों में ले जाया गया था। 

70 लड़कियां और 43 लड़के 3-5 साल उम्र के हैं, 36 लड़कियां और 31 लड़के 5-7 साल की उम्र के हैं, 19 लड़कियां और 14 लड़के 7-9 साल की उम्र के हैं, 10 लड़के और सात लड़कियां 9-11 साल की उम्र के हैं, जबकि सात लड़के और एक लड़की 11 साल और इससे अधिक उम्र के हैं।
 
मरीजों में अधिकतर (97 फीसदी से अधिक) को हाइपोग्लाइकेमिया या लो शुगर लेवल की समस्या है। एईएस जिसे दिमागी बुखार भी कहा जाता है, किसी एक तरह के वायरस से होता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, उल्टी आना शामिल है।

कई मामलों में मरीज को दौरे पड़ते हैं, फालिज हो जाती है और कुछ मामलों में वह कोमा में भी चला जाता है। एईएस होने का मुख्य कारण क्या है, ये अभी तक पता नहीं चल पाया है। हालांकि अधिकतर चिकित्सा पेशेवरों का कहना है कि ये बीमारी अधिक गर्मी से जुड़ी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए लीची को जिम्मेदार माना जा रहा है लेकिन बेहतर स्वास्थ्य देखभाल मिलने पर इस बीमारी से बचा जा सकता है।

बता दें बीते साल ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत की रैंक 119 देशों में 103 थी। यहां स्वास्थ्य देखभाल पर राष्ट्रीय आय का महज एक फीसदी से अधिक ही खर्च किया जाता है। जो दुनिया में सबसे कम माना जाता है।

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