Bihar News: स्वास्थ्य विभाग के डीपीएम ने पत्नी संग दिया इस्तीफा, अब कार्रवाई भी होगी; जानिए क्या है मामला
Bihar : जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम और अनुमंडलीय अस्पताल की स्वास्थ्य प्रबंधक ने एक साथ त्यागपत्र दे दिया है। इस्तीफे की खबर फिलहाल चर्चा का विषय है, क्यों कि दोनों पति-पत्नी हैं। अब वह प्रशासनिक कार्रवाई से डरे सहमे हैं।
विस्तार
सुपौल में जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम मो मिन्नतुल्लाह और उनकी पत्नी सह निर्मली अनुमंडलीय अस्पताल की स्वास्थ्य प्रबंधक निकहत जहां प्रवीण ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि इस्तीफे को अभी स्वीकृति नहीं दी गई है। इधर, इस प्रकरण के बाद स्वास्थ्य विभाग अन्य अधिकारियों और कर्मियों के प्रमाणपत्रों की जांच कराने पर भी विचार कर रही है। नतीजा है कि पूरे स्वास्थ्य महकमे में खलबली मची है। इस बीच जांच के दायरे में आए दंपत्ति की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही है। जिला प्रशासन ने प्रमाणपत्रों से जुड़ी शिकायत मिलने के बाद डीपीएम को एक महीने के अंदर आठवीं से लेकर उच्चतर शिक्षा तक के सभी शैक्षणिक दस्तावेज जमा कराने की मोहलत दी है। इस बीच बीते 02 अगस्त को पहले डीपीएम ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया। वही लगे हाथ उनकी पत्नी ने भी पति का ख्याल रखने की बात कहते हुए सिविल सर्जन के ऑफिशियल ई-मेल पर इस्तीफा सौंप दिया है।
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फर्जी प्रमाणपत्रों का लिया था सहारा
दरअसल, जांच शुरु होने के साथ ही यह तय माना जाने लगा है कि नौकरी पाने के लिए डीपीएम और उनकी पत्नी ने फर्जी प्रमाणपत्रों का सहारा लिया है। इसकी बड़ी वजह यह है कि दोनों ने मेघालय के चंद्र मोहन झा यूनिवर्सिटी (सीएमजेयू) से एमबीए की डिग्री होने का दावा किया है। विभाग में जमा दस्तावेजों के अनुसार डीपीएम मो मिन्नतुल्लाह वर्ष 2013 में यूनिवर्सिटी से एमबीए पास आउट हुए। उन्होंने शैक्षणिक सत्र 2011-12 और 2012-13 में यहां से पढ़ाई की। लेकिन वर्ष 2014 में कुप्रबंधन और अन्य कमियों के कारण इस निजी यूनिवर्सिटी को बंद कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसी साल मेघालय सरकार के इस फैसले को सही ठहराया और सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया। इससे पूर्व मेघालय सरकार ने यूनिवर्सिटी के संचालन अवधि के दौरान वर्ष 2010 से 2013 तक जारी सभी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को अमान्य घोषित कर दिया था।
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वर्ष 2009 में स्थापित हुआ था यूनिवर्सिटी, पांच साल भी नहीं चला
मेघालय में चंद्र मोहन झा यूनिवर्सिटी की स्थापना 20 जुलाई 2009 को हुई थी। मेघालय सरकार द्वारा इसे वर्ष 2010 में यूजीसी अधिनियम 1956 के तहत राज्य निजी विश्वविद्यालय के रूप में अधिसूचित किया गया था। हालांकि वर्ष 2014 में सरकार ने इसे बंद करने का आदेश जारी कर दिया। इसके खिलाफ विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा दायर अर्जी को इसी साल सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। जिसके बाद यूजीसी ने सीएमजेयू को फर्जी घोषित करते हुए शिक्षा विभाग से कार्रवाई की सिफारिश की। फरवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान मेघालय सरकार द्वारा विश्वविद्यालय बंद करने सहित सभी डिग्रियों को निरस्त करने के फैसले को सही ठहराया।
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इस्तीफे के बाद अब रिकवरी की लटक रही तलवार
मो मिन्नतुल्लाह फरवरी 2022 से अब तक जिला स्वास्थ्य समिति में बतौर डीपीएम अपनी सेवा दे रहे थे। इससे पहले वह जिले के सरायगढ़-भपटियाही में जनवरी 2019 से फरवरी 2022 तक बतौर स्वास्थ्य प्रबंधक तैनात थे। जबकि उनकी पत्नी निकहत जहां प्रवीण 28 मार्च 2023 से अब तक जिले के निर्मली अनुमंडलीय अस्पताल में स्वास्थ्य प्रबंधक थी। प्रमाणपत्रों की जांच शुरु होने के साथ ही डीपीएम पहले चार दिनों के लिए अवकाश पर चले गए। वही बीते 02 अगस्त को अवकाश के दौरान ही उन्होंने अपनी पत्नी के साथ इस्तीफा दे दिया। लेकिन इस्तीफे के बाद भी अब इस दंपत्ति पर रिकवरी की तलवार लटक रही है। जांच में अगर शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी पाए गए तो विभाग उनसे अब तक मानदेय/वेतन के रूप में प्राप्त राशि की वसूली की जा सकती है।
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एक माह का दिया गया है समय
इधर, जिलाधिकारी सावन कुमार ने बताया कि शैक्षणिक प्रमाणपत्रों से जुड़ी शिकायत के बाद जांच शुरु होने के साथ ही डीपीएम और उनकी पत्नी ने ई-मेल के माध्यम से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि उन्हें जांच हेतु प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के लिए एक माह का समय दिया गया है। अगर उनके द्वारा जांच में सहयोग नहीं किया जाता है तो कानूनी प्रावधानों के अनुरुप कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने की स्थिति में भी राशि रिकवरी सहित अन्य प्रावधानों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
सरायगढ़ से भी मंगा रहे दस्तावेज
वही सिविल सर्जन डॉ ललन कुमार ठाकुर ने बताया कि डीपीएम और उनकी पत्नी का इस्तीफा प्राप्त हुआ है। हालांकि डीपीएम बनने से पूर्व मो मिन्नतुल्लाह सरायगढ़-भपटियाही में भी बतौर स्वास्थ्य प्रबंधक तैनात रहे हैं। वहां से भी सभी संबंधित दस्तावेज मंगाए जा रहे हैं। इसके उपरांत फाइल तैयार कर जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष सह जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्ताव भेजा जाएगा। उनके निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल जांच जारी है।