'बाहुबली' अनंत सिंह: जुर्म की दुनिया से सियासत तक की दास्तां, राजनीति में लाए 'सुशासन बाबू'
- मोकामा से निर्दलीय विधायक हैं अनंत सिंह
- राजनीति में लेकर आए थे नीतीश कुमार
- दो बार जेडीयू की टिकट पर रह चुके हैं विधायक
- शुक्रवार को पुलिस ने घर से बरामद की थी एके-47 और हथगोले
- अनंत सिंह के खिलाफ यूएपीए एक्ट के तहत संभवत देश का पहला मामला हुआ है दर्ज
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बिहार के बाढ़ और मोकामा में 'छोटे सरकार' के नाम से पहचान बनाने वाले बाहुबली विधायक अनंत सिंह पर यूएपीए एक्ट के तहत संभवत देश में पहला मामला दर्ज किया गया है। अगर उनपर आरोप साबित होता है तो उनकी संपत्ति जब्त करने के साथ ही आतंकवादी भी करार दिया जा सकता है।
अनंत सिंह के खौफ और रसूख के किस्से पूरे बिहार में सुनने को मिलते रहते हैं। साल 2007 में एक महिला से दुष्कर्म और हत्या के केस में बाहुबली विधायक का नाम आया था। जब इसके बारे में एक निजी समाचार चैनल के पत्रकार उनका पक्ष जानने पहुंचे तो सत्ता के नशे में चूर विधायक और उनके गुंडों ने पत्रकार की जमकर पिटाई की।
अनंत सिंह के आवास पर छापेमारी, आठ लोगों की गई थी जान
इससे पहले अनंत सिंह के घर पर मोकामा में साल 2004 में जब बिहार पुलिस की एसटीएफ ने छापेमारी की तब दोनों तरफ से घंटों गोलीबारी हुई। दरअसल, अनंत सिंह ने महलनुमा बने अपने आवास में कई समर्थकों को शरण दे रखी थी जिससे पुलिस की छापेमारी में वह आसानी से बच जाए। इसके अलावा खुद को सुरक्षित रखने के लिए उसने एक विशेष कमरे का निर्माण भी कराया था। इस घटना के बाद अनंत सिंह सुर्खियों में आए।
इस गोलीबारी में एक पुलिसकर्मी समेत अनंत सिंह के आठ समर्थक मारे गए। कहा जाता है कि इस घटना में विधायक को भी गोली लगी थी लेकिन वह फरार हो गया।
अनंत सिंह को राजनीति में लाए बिहार के 'सुशासन बाबू'
अपराध की दुनिया का बादशाह बनने के बाद अनंत सिंह ने सियासी गलियारों में भी अपनी पैठ बनानी शुरू की। इसी दौरान अनंत सिंह की मुलाकात नीतीश कुमार से हुई और 2005 में वह मोकामा से जेडीयू के टिकट पर चुनाव जीत गए। इसके बाद साल 2010 में भी वह जेडीयू के टिकट पर मोकामा से विधायक चुने गए।
साल 2015 के चुनाव में लालू की पार्टी आरजेडी से गठबंधन के कारण जेडीयू ने सियासी नुकसान को देखते हुए अनंत सिंह का टिकट काट दिया। हालांकि अनंत सिंह निर्दलीय चुनाव में उतरे और जीत हासिल की। बड़ी बात यह है कि अनंत सिंह जैसे नामी अपराधी को राजनीति में लाने वाले नीतीश कुमार की छवि प्रदेश में सुशासन बाबू के नाम से प्रसिद्ध है।
अनंत सिंह और नीतीश की दोस्ती
अनंत सिंह और नीतीश कुमार की दोस्ती की नींव साल 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान पड़ी थी। उस समय नीतीश कुमार बाढ़ संसदीय क्षेत्र से सांसद और अटल सरकार में रेलमंत्री थे। नीतीश के खिलाफ आरजेडी-लोजपा ने बाहुबली सूरजभान को मैदान में उतारा था। उस चुनाव में अनंत सिंह ने नीतीश की खूब मदद की।
इसके अलावा एक जनसभा के दौरान अनंत सिंह ने नीतीश को चांदी के सिक्कों से तौला था। इसके बाद से ही अनंत सिंह नीतीश कुमार के करीबी बन गए और पूरे प्रदेश में उनकी तूती बोलने लगी। लेकिन साल 2015 में आरजेडी से जेडीयू की नजदीकियों के कारण अनंत सिंह किनारे कर दिए गए। वहीं से उनके बुरे दिन की शुरूआत हुई।
मोकामा में अनंत का साम्राज्य
मोकामा वैसे तो बाहुबलियों का गढ़ है जहां से सूरजभान सिंह, ललन सिंह, संजय सिंह जैसे कई नेताओं ने राजनीति में पहचान बनाई है। फिर भी अनंत सिंह की सरकार यहां अलग ही चलती है। बड़े भाई और आरजेडी से विधायक दिलीप सिंह की हत्या के बाद से अनंत सिंह ने अपराध की दुनिया में कदम रखा। कहा जाता है कि भाई की हत्या के समय अनंत सिंह बाहर थे और खबर मिलते ही वह घर के लिए निकल पड़े। लेकिन गंगा नदी में नाव न होने के कारण वह तैर कर घर पहुंचे।
घोड़ों के शौकीन
अनंत सिंह को घोड़ों का बहुत शौक है। कहा जाता है कि अगर उन्हें कहीं अच्छे नस्ल का घोड़ा होने की जानकारी मिल जाए तो जबतक उसे खरीदे नहीं तब तक उन्हें चैन नहीं पड़ता। घोड़े पर बैठकर घूमते हुए उनकी कई फोटोज वायरल हो चुकी हैं। एक बार तो यह घोड़े पर सवार होकर पटना विधानसभा पहुंचे थे। इसके अलावा अनंत सिंह को अजगर पालने और चश्में लगाने का खूब शौक है।
साल 2015 में लालू-नीतीश आए करीब और दूर हुए अनंत सिंह
साल 2015 में भी ऐसी ही एक और घटना सुर्खियां बनी जब अनंत सिंह के करीबी किसी महिला पर मोकामा के पास बाढ़ बाजार इलाके में चार युवकों ने छेड़खानी कर दी। इसके बाद विधायक के घर से निकले समर्थकों की टोली ने उन लड़कों को सरे बाजार उठा लिया। लेकिन, बढ़ते दबाव से मजबूर पुलिस को इस मामले में कार्रवाई करनी पड़ी।
जब पुलिस लड़कों की तलाश में उनके गांव पहुंची तबतक पिटाई के कारण उनमें से तीन की हालत गंभीर हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने विधायक के कई समर्थकों को भी हिरासत में लिया। जबकि एक युवक की दर्दनाक तरीके से हत्या कर दी गई थी। उसका शव पास के जंगल से बरामद किया गया था।
इस घटना की गूंज पूरे बिहार में सुनाई दी। रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस के पास इस घटना में अनंत सिंह की संलिप्तता के कई सबूत थे लेकिन उनकी गिरफ्तारी को रोकने के लिए राजनीतिक दबाव पड़ रहा था। इसलिए, बाहुबली विधायक की गिरफ्तारी को लगातार टाला जाता रहा।
लेकिन, एक नाटकीय घटनाक्रम में 24 जून को आखिरकार अनंत सिंह को पटना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी इतनी आसान नहीं थी। इस मामले में अनंत सिंह को गिरफ्तार करने का मन बना चुके तत्कालीन एसएसपी जितेंद्र राणा का शासन ने तबादला कर दिया। लेकिन 23 जून को तबादले की भनक लगते ही राणा ने प्रेस कांफ्रेंस कर इस केस से जुड़ी सारे तथ्य सार्वजनिक कर दिए।
इसके बाद 24 जून को राणा की जगह नवनियुक्त एसएसपी विकास वैभव ने चार्ज संभालते ही अनंत सिंह के घर का सर्च वारंट लेकर कई जिलों की फोर्स इकठ्ठा की। इसके बाद पुलिस ने विकास वैभव के नेतृत्व में कई जगहों पर छापेमारी कर शाम को अनंत सिंह को गिरफ्तार कर लिया। रात को ही उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में पटना के बेऊर जेल भेज दिया गया।