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Hindi News ›   Bihar ›   Is CAA was main reason of rift between Prashant Kishore and Bihar CM Nitish Kumar

तो क्या सीएए की वजह से नीतीश-पीके की दोस्ती में आई दरार, इन वजहों से बढ़ी तकरार !

Wed, 29 Jan 2020 06:31 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित कुमार Updated Wed, 29 Jan 2020 06:31 PM IST
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Is CAA was main reason of rift between Prashant Kishore and Bihar CM Nitish Kumar
नीतीश कुमार-प्रशांत किशोर (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आखिरकार बगावती तेवर दिखाने वाले पार्टी उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर और पूर्व राज्यसभा सदस्य पवन वर्मा को जेडीयू से बाहर का रास्ता दिखा दिया। 

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ये वही प्रशांत किशोर हैं, जिनकी रणनीति के दम पर कभी नीतीश ने चुनावों में सफलता का स्वाद चखा था। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी के चुनावी अभियान को धार दी। इसके बाद वह नीतीश कुमार के साथ जुड़ गए। दोनों के बीच इतनी छनी कि 2018 में पीके सीधे जेडीयू उपाध्यक्ष बना दिए गए। पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं को यह बात खटकी, लेकिन...। 
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मगर समय के साथ नीतीश और पीके के बीच गतिरोध बढ़ता चला गया है। यह खटास धीरे-धीरे इतनी बढ़ती चली गई कि सार्वजनिक मंचों पर दोनों नेता एक-दूसरे की आलोचना करते रहे। नीतीश ने बार-बार दोहराया कि जो जाना चाहता है, वो जा सकता है। वहीं प्रशांत किशोर ने भी समय-समय पर ट्विटर के माध्यम से तंज कसने का कोई मौका नहीं छोड़ आया। 


मंगलवार को प्रशांत किशोर ने नीतीश को झूठा तक बता दिया। इसके बाद नीतीश का सब्र का बांध टूटा और बुधवार को पीके को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उनके साथ पवन वर्मा की भी छुट्टी हो गई। आइए जानते हैं कि आखिर क्या वजह रहीं, जिस वजह से प्रशांत किशोर को पार्टी से बाहर किया गया...

  • नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर प्रशांत किशोर ने जेडीयू से अलग राय रखी। जेडीयू ने इसका समर्थन किया था जबकि पीके ने इसका विरोध किया। 
  • प्रशांत किशोर ने कई मौकों पर बिहार में जेडीयू के सहयोगी दल भाजपा के खिलाफ भी बयान दिए। 
  • सीएए पर प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के रुख की भी तारीफ की। 
  • भाजपा नेता सुशील मोदी पर तंज कसते हुए पीके ने कहा था, 'लोगों को चरित्र प्रमाण पत्र देने में उनका कोई जवाब नहीं है।'

अन्य पार्टियों का चुनावी अभियान संभाला 

  • प्रशांत किशोर ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस, बिहार में नीतीश, आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी का चुनाव प्रचार भी संभाला। 
  • पीके की कंपनी आई-पैक वर्तमान में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और दिल्ली में आम आदमी पार्टी के लिए काम कर रही है। 

इन ट्वीट से बढ़ती गईं दूरियां 

  • 20 नवंबर, 2019 : 55 फीसदी से ज्यादा आबादी वाले 15 राज्यों में गैर भाजपाई मुख्यमंत्री हैं। आखिर कितने सीएम से एनआरसी को लेकर चर्चा की गई है? 
  • 9 दिसंबर, 2019 : धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाले सीएबी पर जेडीयू का समर्थन करते देखना बहुत ही दुखद है। 
  • 11 दिसंबर, 2019 : सीएबी पर समर्थन देने से पहले जेडीयू नेतृत्व को उन लोगों के बारे में सोचना चाहिए कि 2015 में उन्हें क्यों चुना गया था?
  • 17 दिसंबर, 2019 : दिल्ली में हुई हिंसा में कथित तौर पर शामिल लोगों पर दिल्ली पुलिस कार्यवाही कर रही है और ये होना भी चाहिए। परन्तु जो हिंसा पुलिस ने जामिया विश्वविद्यालय के कैम्पस के अन्दर छात्रों पर किया, उन पर कार्रवाई कौन करेगा?
  • 22 दिसंबर, 2019 : सीएए-एनआरसी को लागू करने से रोकने के दो तरीके हैं। पहला : सभी मंचों पर शांतिपूर्ण विरोध जारी रहे। दूसरा: सभी 16 गैर भाजपाई राज्य इसे लागू करने से इनकार कर दे। 
  • 24 दिसंबर, 2019 : सीएए-एनआरसी के खिलाफ नागरिक आंदोलन पर समर्थन देने के लिए राहुल गांधी का शुक्रिया। 
  • 31 दिसंबर, 2019 : बिहार में @NitishKumar का नेतृत्व और JDU की सबसे बड़े दल की भूमिका बिहार की जनता ने तय किया है, किसी दूसरी पार्टी के नेता या शीर्ष नेतृत्व ने नहीं। 2015 में हार के बाद भी परिस्थितिवश DY CM बनने वाले @SushilModi से राजनीतिक मर्यादा और विचारधारा पर व्याख्यान सुनना सुखद अनुभव है।

  • 6 जनवरी, 2020 : 11 फरवरी, मंगलवार को जनता की शक्ति देखने को तैयार रहें। 
  • 12 जनवरी, 2020 : सीएए-एनआरसी को खारिज करने के लिए मैं कांग्रेस नेतृत्व का शुक्रिया अदा करता हूं। इसके लिए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी खास बधाई के हकदार हैं। 
  • 22 जनवरी, 2020 : नागरिकों की आवाज को दबाना किसी सरकार की ताकत नहीं है। अमित शाह जी अगर आपको सीएए-एनआरसी का विरोध करने वालों की परवाह नहीं है, तो क्यों नहीं एक कदम आगे बढ़ते हुए क्रोनोलॉजी में सीएए और एनआरसी को लागू करते। 
  • 27 जनवरी, 2020 : 8 फरवरी को दिल्ली में EVM का बटन तो प्यार से ही दबेगा। जोर का झटका धीरे से लगना चाहिए ताकि आपसी भाईचारा और सौहार्द खतरे में ना पड़े। न्याय, स्वतंत्रता, समानता व भाईचारा। 
  • 28 जनवरी, 2020 : आप (नीतीश) मुझे पार्टी में क्यों और कैसे लाए, इस पर इतना गिरा हुआ झूठ बोल रहे हैं। यह आपकी बेहद खराब कोशिश है, मुझे अपने रंग में रंगने की। अगर आप सच बोल रहे हैं तो कौन यह भरोसा करेगा कि अभी भी आपमें इतनी हिम्मत है कि अमित शाह द्वारा भेजे गए आदमी की बात न सुनें?
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