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गयाजी में पिंडदान करने पहुंचीं स्मिता ठाकरे: पीएम मोदी के काम को सराहा, बोलीं-‘इंसानियत सबसे ऊपर’

Tue, 29 Sep 2026 11:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गयाजी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गयाजी Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 29 Sep 2026 11:02 AM IST
सार

पितृपक्ष मेले के दौरान शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की पुत्रवधू स्मिता ठाकरे सोमवार शाम बोधगया पहुंचीं। उन्होंने अपने ससुर बालासाहेब ठाकरे और पिता स्वर्गीय मधुकर चित्रे का श्राद्ध एवं पिंडदान करने की बात कही। उन्होंने गयाजी आने की वर्षों पुरानी इच्छा पूरी होने को सौभाग्य बताया।

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Smita Thackeray in Gayaji to Perform Pind Daan for Balasaheb Thackeray Praises PM Modi
गयाजी में पत्रकारों से बातचीत करती हुईं बाबासाहेब ठाकरे की पुत्रवधू स्मिता ठाकरे - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेले के दौरान शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की पुत्रवधू स्मिता ठाकरे सोमवार शाम बोधगया पहुंचीं। उन्होंने बताया कि वह अपने ससुर बालासाहेब ठाकरे और अपने पिता स्वर्गीय मधुकर चित्रे का श्राद्ध एवं पिंडदान करने आई हैं। उन्होंने कहा कि गयाजी आने की उनकी वर्षों पुरानी इच्छा थी, जो अब पूरी हो रही है। उन्होंने इसे अपने जीवन का सौभाग्य बताया।
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पितृपक्ष में पितरों के तर्पण के लिए पहुंचीं गयाजी
पत्रकारों से बातचीत में स्मिता ठाकरे ने कहा कि गयाजी में पितरों का श्राद्ध और पिंडदान सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने अपने गुरु तुलसी जी महाराज और संतोषानंद जी महाराज के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग से उन्हें इस पवित्र भूमि पर आने का अवसर मिला। उनका विश्वास है कि गयाजी में पिंडदान और श्राद्ध से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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गयाजी आने की वर्षों पुरानी इच्छा हुई पूरी
स्मिता ठाकरे ने कहा कि गयाजी में पितरों के लिए श्राद्ध और पिंडदान करना सनातन परंपरा में विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से उनकी इच्छा थी कि वह गयाजी आकर अपने पितरों का तर्पण करें। अब यह इच्छा पूरी होने पर वह खुद को सौभाग्यशाली मानती हैं।
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बिहार और महाराष्ट्र को बताया सांस्कृतिक रूप से जुड़ा
स्मिता ठाकरे ने कहा कि बिहार और महाराष्ट्र भले ही भाषा और पहनावे में अलग हों, लेकिन दोनों राज्यों की सांस्कृतिक जड़ें एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों का सम्मान करना ही भारत की सबसे बड़ी ताकत है।

बालासाहेब ने सिखाया समाजसेवा और सनातन का मार्ग
उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे ने उन्हें सनातन संस्कृति, समाजसेवा और सभी का सम्मान करने की सीख दी थी। उन्होंने बताया कि वह करीब 27 वर्षों से समाजसेवा से जुड़ी हैं और इसे अपना कर्तव्य मानती हैं। उनके अनुसार, समाज की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और वह उसी विचारधारा पर आगे बढ़ रही हैं।

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प्रधानमंत्री मोदी की सराहना की
वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर पूछे गए सवाल के जवाब में स्मिता ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य देश की सेवा करना है और उन्हें विश्वास है कि उनके नेतृत्व में देश लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए और हर नागरिक को देश के विकास में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।


अभी समाजसेवा ही प्राथमिकता
राजनीति में आने के सवाल पर स्मिता ठाकरे ने स्पष्ट कहा कि वह अभी तक सीधे तौर पर राजनीति में सक्रिय नहीं रही हैं। फिलहाल वह समाजसेवा के क्षेत्र में काम कर रही हैं। भविष्य में राजनीति में आना है या नहीं, यह परिस्थितियों और ईश्वर की इच्छा पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि वह बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा और सनातन मूल्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास करती रहेंगी।

इंसानियत सबसे ऊपर
स्मिता ठाकरे ने कहा कि उनके लिए इंसानियत सबसे बड़ी पहचान है। बिहारी, मराठी, सिंधी, गुजराती या किसी भी भाषा और क्षेत्र से ऊपर मानवता का स्थान है। उन्होंने कहा कि जो दूसरों का सम्मान करता है, वह भी सम्मान का अधिकारी होता है। गयाजी की पवित्र धरती पर पितरों का आशीर्वाद लेकर वह संतोष और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ लौटेंगी।
 
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