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Bihar News: आईजी की फोटो, फर्जी पहचान और 1 लाख की ठगी; साइबर जाल में फंसा कारोबारी परिवार

Wed, 03 Jun 2026 09:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 03 Jun 2026 09:50 AM IST
सार

गया में साइबर ठगों ने बिहार पुलिस के चर्चित अधिकारी आईजी विकास वैभव के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर एक कारोबारी परिवार से 1 लाख 1 हजार 500 रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने सोशल मीडिया पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर पहले परिवार का भरोसा जीता और फिर एक अधिकारी के तबादले का हवाला देकर सस्ते घरेलू सामान बेचने का झांसा दिया।

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ig vikas vaibhav fake profile used to dupe gaya businessman of 1 lakh rs today bihar news
(फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साइबर अपराधी अब केवल बैंकिंग फ्रॉड और ओटीपी ठगी तक सीमित नहीं रह गए हैं। लोगों का भरोसा जीतने के लिए वे समाज के प्रतिष्ठित और चर्चित व्यक्तियों की पहचान का भी दुरुपयोग कर रहे हैं। गया में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां बिहार पुलिस के चर्चित अधिकारी आईजी विकास वैभव के नाम और तस्वीर का इस्तेमाल कर साइबर ठगों ने एक प्रतिष्ठित कारोबारी परिवार से 1 लाख 1 हजार 500 रुपये की ठगी कर ली। मामले का खुलासा तब हुआ, जब रुपये लेने के बाद भी ठग लगातार नई-नई मांगें करने लगे।

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फर्जी प्रोफाइल बनाकर जीता भरोसा

पीड़ित परिवार के अनुसार साइबर अपराधियों ने सोशल मीडिया पर आईजी विकास वैभव की तस्वीर लगाकर एक फर्जी प्रोफाइल बनाई। इसी प्रोफाइल से चाणक्यपुरी कॉलोनी निवासी 84 वर्षीय व्यवसायी कपिलदेव सिंह और उनकी पुत्री डॉ. कल्पना सिंह को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी गई। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की पहचान देखकर परिवार ने रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली। इसके बाद ठगों ने उनसे बातचीत शुरू कर दी और धीरे-धीरे विश्वास हासिल कर लिया।

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तबादले की कहानी सुनाकर दिया सस्ते सामान का लालच

बातचीत के दौरान ठगों ने खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके एक परिचित अधिकारी का तबादला हो गया है और वह अपना घरेलू सामान बहुत कम कीमत पर बेचना चाहते हैं। विश्वास बढ़ाने के लिए उन्होंने घरेलू सामान की तस्वीरें भी भेजीं। प्रतिष्ठित अधिकारी का नाम और तस्वीर देखकर परिवार को किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ और उन्होंने सामान खरीदने की सहमति दे दी।

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किस्तों में जमा कराए गए 1.01 लाख रुपये

सौदा तय होने के बाद ठगों ने अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराने को कहा। भरोसे में आए परिवार ने क्रमशः 40 हजार रुपये, 30 हजार रुपये, 16 हजार रुपये और 15 हजार 500 रुपये ट्रांसफर कर दिए। इस तरह परिवार ने कुल 1 लाख 1 हजार 500 रुपये साइबर अपराधियों के खातों में भेज दिए। हालांकि रुपये मिलने के बाद भी ठगों की मांगें खत्म नहीं हुईं।

अतिरिक्त मांग ने खोली ठगी की पोल

रकम प्राप्त करने के बाद ठगों ने जीपीएस ट्रैकिंग और डिलीवरी शुल्क के नाम पर 35 हजार रुपये और मांग लिए। बार-बार नई रकम की मांग किए जाने पर परिवार को शक हुआ। इसके बाद उन्होंने अपने स्तर पर जांच-पड़ताल की तो पता चला कि जिस प्रोफाइल से बातचीत की जा रही थी, वह पूरी तरह फर्जी थी और उनके साथ साइबर ठगी हो चुकी है।

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साइबर थाना कर रहा तकनीकी जांच

मामले की शिकायत मिलने के बाद गया साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। साइबर थानाध्यक्ष ने बताया कि जिन बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल ठगी में किया गया है, उनकी तकनीकी जांच की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जल्द ही आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पुलिस की लोगों से अपील

पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी बड़े अधिकारी, जनप्रतिनिधि या प्रतिष्ठित व्यक्ति के नाम से आने वाले संदेशों और प्रस्तावों पर बिना पुष्टि किए भरोसा न करें। किसी भी प्रकार का आर्थिक लेन-देन करने से पहले संबंधित व्यक्ति की पहचान और जानकारी की पुष्टि अवश्य करें, ताकि साइबर अपराधियों के जाल में फंसने से बचा जा सके।

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