Bihar: हर महीने 60 लाख रुपये खर्च करता है जहानाबाद नगर परिषद, फिर भी वार्ड नंबर 10 की गलियों में गंदगी का ढेर
Bihar: लोगों ने बताया कि गंदगी और कीचड़ के कारण आए दिन छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं। कई बार बच्चे फिसलकर गिर चुके हैं, बुजुर्गों को चोटें आई हैं। मोहल्ले में शादी-ब्याह जैसे आयोजनों में भी काफी दिक्कतें आती हैं, जबकि बच्चों को स्कूल पहुंचाना हर रोज की चुनौती बन चुका है।
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जहानाबाद नगर परिषद साफ-सफाई के नाम पर हर माह लगभग 60 लाख रुपये खर्च करता है, बावजूद इसके शहर के कई मोहल्लों की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है। नगर परिषद क्षेत्र का वार्ड नंबर 10 इसका जीता-जागता उदाहरण है, जहां नालियों का अभाव और सफाई की अनदेखी ने लोगों का जीवन नारकीय बना दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वार्ड नंबर 10 में आज तक न तो नाली का निर्माण कराया गया और न ही पक्की सड़क बनी। नतीजतन, गंदा पानी घरों तक घुस जाता है। गली-मोहल्लों में कीचड़ और जलजमाव की स्थिति बनी रहती है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों का बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है।
बरसात से पहले गहराया संकट
स्थानीय निवासियों को चिंता है कि आने वाले मानसून में हालात और भी भयावह हो सकते हैं। वर्तमान में ही गंदगी और जलजमाव के कारण बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। यदि जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति महामारी का रूप भी ले सकती है।
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हादसों की बढ़ती घटनाएं
लोगों ने बताया कि गंदगी और कीचड़ के कारण आए दिन छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं। कई बार बच्चे फिसलकर गिर चुके हैं, बुजुर्गों को चोटें आई हैं। मोहल्ले में शादी-ब्याह जैसे आयोजनों में भी काफी दिक्कतें आती हैं, जबकि बच्चों को स्कूल पहुंचाना हर रोज की चुनौती बन चुका है।
शिकायतें अनसुनी, जनप्रतिनिधि नदारद
स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने कई बार वार्ड पार्षद को शिकायत दी, लेकिन न तो कोई निरीक्षण किया गया और न ही कोई समाधान निकला। आरोप है कि चुनाव के बाद पार्षद दोबारा वार्ड में नजर नहीं आए। नगर परिषद अध्यक्ष से भी कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।
प्रशासन से लगाई गुहार
वार्ड नंबर 10 के निवासियों ने जिला प्रशासन और नगर परिषद से मांग की है कि जल्द से जल्द नाली और सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि उन्हें गंदगी और बीमारियों से राहत मिल सके। उनका कहना है कि प्रशासन की चुप्पी और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता ने उन्हें सवाल उठाने पर मजबूर कर दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागता है और इस उपेक्षित वार्ड को विकास की मुख्यधारा में कब शामिल किया जाता है।