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Bihar: 14 साल पुराने केस में काराकाट सांसद को मिली बड़ी राहत, कलेक्ट्रेट फूंकने के आरोप से कोर्ट ने किया बरी

Mon, 16 Feb 2026 08:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 16 Feb 2026 08:13 PM IST
सार

Bihar: औरंगाबाद समाहरणालय पर 14 साल पहले हुए हमले और कलेक्ट्रेट को फूंकने के प्रयास से जुड़े मामले में काराकाट के भाकपा माले सांसद राजाराम सिंह, पूर्व विधायक वीरेंद्र सिंह और अन्य 23 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया। घटना 2 मई 2012 को गांधी मैदान से शुरू हुए प्रदर्शन के दौरान हुई थी।

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Karakat MP gets major relief in 14 year old case court acquits him of charges of burning down collectorate
कोर्ट के फैसले के बाद अधिवक्ताओं के साथ सांसद

विस्तार

बिहार के काराकाट से भाकपा माले सांसद राजाराम सिंह सहित 23 आरोपियों को कोर्ट ने 14 साल पुराने काराकाट कलेक्ट्रेट मामले में बड़ी राहत मिली है। औरंगाबाद समाहरणालय पर समर्थकों के साथ हमला बोलने और कलेक्ट्रेट को फूंकने के प्रयास से जुड़े 14 साल पुराने मामले में कोर्ट ने उन्हें और उनके साथियों को सोमवार को बरी कर दिया। इस मामले में दर्ज औरंगाबाद नगर थाना कांड संख्या-155/12, जीआर-869/12, एसटीआर-366/12 एवं 264/22 की अंतिम सुनवाई सोमवार को औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय के स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में हुई। 

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2012 में दर्ज हुआ था मुकदमा
बता दें कि औरंगाबाद के तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी उदय प्रताप सिंह ने 2 मई 2012 को नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में बताया गया कि उस दिन सुबह 11 बजे गांधी मैदान से एक प्रदर्शन निकाला गया, जिसका नेतृत्व तत्कालीन पूर्व विधायक (वर्तमान सांसद) राजाराम सिंह कर रहे थे। प्रदर्शन छोटू कुशवाहा की हत्या के विरोध में किया गया था। प्रदर्शन रमेश चौक के निकट बद्रीनारायण मार्केट के सामने सभा में तब्दील हो गया। नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारी उग्र होकर समाहरणालय गेट पर पहुंच गए और कलेक्ट्रेट पर जमकर रोड़ेबाजी-पत्थरबाजी की। पुलिस ने बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को समाहरणालय में प्रवेश से रोका और आग लगने से कलेक्ट्रेट बच गया। 
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प्रदर्शन में कई लोग हुए थे घायल
प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी कि भीड़ में कुछ असमाजिक तत्व शामिल हैं, जो रोड़ेबाजी कर रहे थे। इस दौरान लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े गए, जिसमें पूर्व विधायक, कुछ प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी घायल हुए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के दंगारोधी वाहन और सरकारी सुमो वाहन को भी फूंक दिया। इस मामले की प्राथमिकी भादवि की सुसंगत धाराओं, आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और डेमेज ऑफ पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट के तहत दर्ज की गई थी। आरोप गठन 25 अप्रैल 2024 को किया गया। अभियोजन की ओर से 13 और बचाव पक्ष से 6 से अधिक गवाही हुई। उस समय एसडीपीओ संजय कुमार और एसडीओ केडी प्रज्ज्वल के नेतृत्व में समाहरणालय गेट पर नगर, मुफ्फसिल, जम्होर, सिमरा और रिसियप थाना के पुलिस बल तैनात थे।
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सांसद ने बताया न्याय की जीत
फैसले के बाद अपर लोक अभियोजक कामता प्रसाद सिंह ने कहा कि वे इस फैसले से असंतुष्ट हैं और रिविजन के लिए पटना हाईकोर्ट जाएंगे। वहीं सांसद राजाराम सिंह ने कहा कि यह न्याय की जीत है। उन्होंने कहा, 'हमें न्यायालय पर पूरा भरोसा था और हमें न्याय मिला। हमने 13 साल तक कोर्ट में मामले के विचारण को झेला। कोर्ट के फैसले के लिए हम अपने अधिवक्ताओं और पत्रकारों के आभारी हैं।'

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