Bihar: चालक को नींद या सेंसलेस होने पर भी नहीं होगा हादसा, छात्रों ने ईजाद की ‘ओबस्टकल अवॉइड कार’; मिला सम्मान
Obstacle Avoidance Car: महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत मणि ने इस उपलब्धि पर छात्रों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि यह यंत्र भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में क्रांतिकारी साबित हो सकता है।
विस्तार
ड्राइविंग के दौरान ड्राइवर की नींद आना या अचानक सेंसलेस हो जाना एक गंभीर समस्या है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन औरंगाबाद के राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय के छात्रों ने इसका अनोखा समाधान खोज निकाला है। इन होनहार छात्रों ने एक ऐसा यंत्र विकसित किया है, जो चालक के नियंत्रण खोने पर वाहन का सारा कंट्रोल खुद संभाल लेता है और दुर्घटना को टाल देता है। इस प्रोजेक्ट का नाम है ‘ओबस्टकल अवॉइड कार’।
कैसे काम करती है ‘ओबस्टकल अवॉइड कार’
यह यांत्रिक प्रोजेक्ट खासतौर पर उन स्थितियों के लिए तैयार किया गया है जब ड्राइवर नींद में हो या किसी वजह से सेंसलेस हो जाए। यह यंत्र ड्राइवर की स्थिति का आकलन करके वाहन का नियंत्रण अपने हाथ में ले लेता है। जैसे ही वाहन में लगा सेंसर ड्राइवर की सतर्कता में कमी को भांपता है, यह खुद-ब-खुद स्टीयरिंग, ब्रेक और स्पीड पर नियंत्रण कर लेता है। यह तकनीक खासतौर पर लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए बेहद उपयोगी हो सकती है।
तीन दिवसीय युवा महोत्सव में मिला तीसरा स्थान
यह अभिनव प्रोजेक्ट हाल ही में लखीसराय में आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय युवा महोत्सव में प्रदर्शित किया गया। वहां विज्ञान प्रदर्शनी के दौरान ‘ओबस्टकल अवॉइड कार’ को राज्य भर में तीसरा स्थान मिला। इस उपलब्धि पर औरंगाबाद के राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय के छात्रों सनी राज, गौरव कुमार और मुकुंद कुमार की टीम को उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सम्मानित किया।
कॉलेज के प्राचार्य और विभागाध्यक्ष ने जताई खुशी
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रशांत मणि ने इस उपलब्धि पर छात्रों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि यह यंत्र भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में क्रांतिकारी साबित हो सकता है। अभी यह एक प्रोटोटाइप है, लेकिन अगर इसका व्यावसायिक उत्पादन होता है, तो यह लोगों की जान बचाने में कारगर सिद्ध होगा।
इसी तरह, इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. कृष्णकांत चौबे ने भी छात्रों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट महाविद्यालय के प्रविधि टेक्निकल क्लब के सक्रिय छात्रों की प्रतिभा का प्रमाण है।
छात्रों की इनोवेशन से मिली प्रेरणा
प्रो. चौबे ने कहा कि हमारे छात्रों ने साबित कर दिया है कि इंजीनियरिंग का असली मकसद किताबों में पढ़े ज्ञान को व्यावहारिक रूप देना और समाज की समस्याओं का समाधान खोजना है। यह प्रोजेक्ट इसका बेहतरीन उदाहरण है। हमारे छात्र पहले भी कई प्रतियोगिताओं में विजेता रहे हैं और महाविद्यालय का नाम रोशन करते आए हैं।
सड़क सुरक्षा में बदलाव लाने की क्षमता
यह यंत्र अगर बड़े पैमाने पर निर्मित किया जाए, तो यह न केवल सड़क दुर्घटनाओं को कम कर सकता है बल्कि सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव भी ला सकता है। बिहार जैसे राज्य, जहां सड़क दुर्घटनाएं एक बड़ी समस्या हैं, इस प्रकार की तकनीक से काफी फायदा हो सकता है।
छात्रों की मेहनत और लगन का परिणाम
यह उपलब्धि छात्रों की मेहनत और लगन का ही नतीजा है। राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय के छात्रों की यह पहल अन्य इंजीनियरिंग छात्रों को भी प्रेरित करेगी कि वे समाज की समस्याओं के समाधान के लिए तकनीकी नवाचारों की दिशा में काम करें।