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Bihar News: दरभंगा कोर्ट में चर्चित वकील अम्बर इमाम हाशमी गिरफ्तार, अधिवक्ताओं ने किया विरोध प्रदर्शन
Fri, 20 Jun 2025 06:08 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Fri, 20 Jun 2025 06:08 PM IST
सार
दरभंगा व्यवहार न्यायालय में शुक्रवार को चर्चित क्रिमिनल लॉयर अम्बर इमाम हाशमी को 32 साल पुराने हत्या के मामले में कोर्ट से ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। उन्होंने कोर्ट को गुमराह कर बताया था कि वे जिले से बाहर हैं, लेकिन उसी अदालत में एक अन्य केस में बहस करने पहुंच गए।
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वकील अम्बर इमाम हाशमी हुए गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दरभंगा व्यवहार न्यायालय में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया जब कोर्ट ने एक नामी क्रिमिनल लॉयर अम्बर इमाम हाशमी को अदालत से ही गिरफ्तार कर जेल भेजने का आदेश दे दिया। यह मामला 32 साल पुराने एक हत्या से जुड़ा है, जिसमें हाशमी समेत उनके दो भाइयों पर गंभीर आरोप हैं।
कोर्ट को किया गुमराह, फिर खुद ही पकड़े गए
दरअसल, वकील अम्बर इमाम हाशमी ने आज कोर्ट में उपस्थित होने से बचने के लिए फॉर्म 117 भरकर बताया था कि वे जिले से बाहर हैं। लेकिन कुछ ही देर बाद वे उसी एडीजे तृतीय (सुमन कुमार दिवाकर) की अदालत में एक अन्य केस की बहस करने पहुँच गए। जज ने जब उन्हें देखा तो पूछा कि आप तो अवकाश पर थे, फिर यहां कैसे? इसके बाद कोर्ट ने उन्हें तत्काल न्यायिक हिरासत में लेकर गिरफ्तार करने का आदेश दिया।
कोर्ट में भारी हंगामा, अधिवक्ताओं का प्रदर्शन
अम्बर इमाम हाशमी की गिरफ्तारी से दरभंगा कोर्ट में वकीलों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया और कहा कि जब तक हाशमी को बिना शर्त रिहा नहीं किया जाता, वे सभी न्यायिक कार्यों से खुद को अलग रखेंगे। वकीलों ने कहा कि आज का दिन दरभंगा न्यायालय के इतिहास में 'काला दिन' के रूप में देखा जाएगा।
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हत्या का मामला: 1994 का पुराना केस
यह केस वर्ष 1994 का है, जब हनुमाननगर थाना क्षेत्र के पटोरी बसंत गांव में दर्जनों राउंड फायरिंग हुई थी। इस घटना में रामकृपाल चौधरी की मौके पर ही मौत हो गई थी और छह लोग घायल हो गए थे। इसके बाद विशनपुर थाने में मामला संख्या 58/1994 दर्ज किया गया था।
यह भी पढ़ें: अवध-असम एक्सप्रेस से टकराई रेलवे ट्रॉली, एक की मौत और तीन घायल
दूसरे वकील भी गिरफ्तार
अम्बर इमाम हाशमी के साथ उनके सहयोगी वकील सुशील कुमार चौधरी को भी गिरफ्तार किया गया था। हालांकि अधिवक्ता सुशील चौधरी को लहेरियासराय थाना से ही छोड़ दिया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन ठाकुर ने इस कार्रवाई को गलत ठहराते हुए कहा कि किसी भी अधिवक्ता को ऐसे मामले में जमानत का अधिकार होता है। कोर्ट ने बिना कारण उन्हें जेल भेजकर मनमानी की है।
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कोर्ट को किया गुमराह, फिर खुद ही पकड़े गए
दरअसल, वकील अम्बर इमाम हाशमी ने आज कोर्ट में उपस्थित होने से बचने के लिए फॉर्म 117 भरकर बताया था कि वे जिले से बाहर हैं। लेकिन कुछ ही देर बाद वे उसी एडीजे तृतीय (सुमन कुमार दिवाकर) की अदालत में एक अन्य केस की बहस करने पहुँच गए। जज ने जब उन्हें देखा तो पूछा कि आप तो अवकाश पर थे, फिर यहां कैसे? इसके बाद कोर्ट ने उन्हें तत्काल न्यायिक हिरासत में लेकर गिरफ्तार करने का आदेश दिया।
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कोर्ट में भारी हंगामा, अधिवक्ताओं का प्रदर्शन
अम्बर इमाम हाशमी की गिरफ्तारी से दरभंगा कोर्ट में वकीलों में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया और कहा कि जब तक हाशमी को बिना शर्त रिहा नहीं किया जाता, वे सभी न्यायिक कार्यों से खुद को अलग रखेंगे। वकीलों ने कहा कि आज का दिन दरभंगा न्यायालय के इतिहास में 'काला दिन' के रूप में देखा जाएगा।
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हत्या का मामला: 1994 का पुराना केस
यह केस वर्ष 1994 का है, जब हनुमाननगर थाना क्षेत्र के पटोरी बसंत गांव में दर्जनों राउंड फायरिंग हुई थी। इस घटना में रामकृपाल चौधरी की मौके पर ही मौत हो गई थी और छह लोग घायल हो गए थे। इसके बाद विशनपुर थाने में मामला संख्या 58/1994 दर्ज किया गया था।
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दूसरे वकील भी गिरफ्तार
अम्बर इमाम हाशमी के साथ उनके सहयोगी वकील सुशील कुमार चौधरी को भी गिरफ्तार किया गया था। हालांकि अधिवक्ता सुशील चौधरी को लहेरियासराय थाना से ही छोड़ दिया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन ठाकुर ने इस कार्रवाई को गलत ठहराते हुए कहा कि किसी भी अधिवक्ता को ऐसे मामले में जमानत का अधिकार होता है। कोर्ट ने बिना कारण उन्हें जेल भेजकर मनमानी की है।