फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   EBC voters will be deciding factor in Bihar election

ईबीसी वोट पर टिकी है अगली सरकार बनाने की कुंजी

Sun, 11 Oct 2015 08:11 AM IST
Updated Sun, 11 Oct 2015 08:11 AM IST
विज्ञापन
EBC voters will be deciding factor in Bihar election

बिहार चुनाव में जमीनी स्तर पर चुनाव पूरी तरह जातीय समीकरणों और सामाजिक गोलबंदी का अखाड़ा बनता जा रहा है। लोगों से बात कीजिए तो कुछ अपवाद छोड़कर जवाब जातीय और सामाजिक वर्ग के मुताबिक ही मिलता है।

विज्ञापन


जातीय और सामाजिक ध्रुवीकरण इतना साफ हो गया है कि अब सरकार किसकी बनेगी, इसकी कुंजी ईबीसी यानी आर्थिक रूप से अति पिछड़ी जातियों के समर्थन पर टिकी है। वोट किसे देंगे, इस सवाल पर यह ईबीसी जातियां स्पष्ट ऐलान तो नहीं करती हैं, लेकिन ज्यादा कुरेदने पर नीतीश कुमार के प्रति इनका झुकाव जरूर नजर आ जाता है।
विज्ञापन


पटना से मसौढ़ी, जहानाबाद, वजीरगंज, अत्री, राजापाकर, पातेपुर (वैशाली), उजियार पुर, मोरवा, समस्तीपुर, सराय रंजन, मानार, राघोपुर, महुआ, मुजफ्फरपुर विधानसभाओं में घूमने, लोगों से बात करने और गांवों की खाक छानने के बाद यही तस्वीर उभरती है कि सवर्णों (ब्राह्मण, भूमिहार, राजपूत और कायस्थ) की पहली पसंद भाजपा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


वहीं यादव, कुर्मी और मुसलमान महागठबंधन के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। दलितों में रामविलास पासवान की वजह से पासवान और महादलितों में जीतनराम मांझी की वजह से उनकी जाति मुसहर एनडीए के पक्ष में ज्यादा मुखर है।

अन्य दलितों में रविदास वर्ग के ज्यादातर लोग महागठबंधन के पक्ष में झुके दिखाई देते हैं तो बिहार में पिछड़े माने जाने वाले वैश्य समुदाय के बहुसंख्यक लोग भाजपा नीत एनडीए के साथ खड़े हैं।

आबादी में हैं 33 फीसदी हिस्सेदारी

EBC voters will be deciding factor in Bihar election

लोकसभा चुनावों में कुशवाहा नेता के तौर पर पहचान बनाने वाले उपेंद्र कुशवाहा एनडीए में हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर कुशवाहा बिरादरी बंटती दिखाई दे रही है और कुछ इलाकों में उनका झुकाव महागठबंधन की ओर भी है।

अगर कोई खामोश है तो वो हैं अति पिछड़े और महादलित जिन्हें सरकारी भाषा में ईबीसी कहा जाता है। अति पिछड़ों में सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़ी वे 55 जातियां हैं जिन्हें बिहार के सामाजिक ढांचे में पंचफोड़वा कहा जाता है। इनकी अलग-अलग संख्या तो कम है, लेकिन कुल मिलाकर पूरी आबादी का करीब 33 फीसदी हो जाती हैं।

अभी तक इन जातियों की पहली पसंद नीतीश कुमार ही रहे हैं। क्योंकि यादवों और दबंग सवर्ण जातियों के दबाव से तंग रही इन जातियों को नीतीश शासन में अलग पहचान मिली है।

इनके लिए पिछड़े वर्ग के आरक्षण में अलग से कोटा निर्धारित किया गया और सशक्तीकरण के लिए अनेक सरकारी योजनाएं शुरू की गईं। नीतीश ने इस वर्ग को अपने एक नए जनाधार के रूप में तैयार किया है।

नीतीश और लालू के मिल जाने के बाद भाजपा इन जातियों में सेंध लगाने के लिए जंगल राज का मुद्दा उछालकर उन्हें फिर से यादवों के ताकतवर होने का डर दिखा रही है। इसे लेकर इन जातियों में चुप्पी है। लेकिन उन्हें ज्यादा कुरेदने पर उनकी सहानुभूति नीतीश कुमार के प्रति साफ नजर आ जाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed