बच गई जान : बेंच-डेस्क के सहारे टिकी थी स्कूल की छत; किस विधायक की मांग पर विद्यालय को शिफ्ट किया गया?
दरभंगा के अलीनगर स्थित किरतपुर प्राथमिक विद्यालय का जर्जर भवन बच्चों के लिए खतरा बना था। विधायक मैथिली ठाकुर ने विधानसभा में मुद्दा उठाया था। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देश पर विद्यालय को उत्क्रमित मध्य विद्यालय गोस्वा में स्थानांतरित कर दिया गया है।
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दरभंगा के अलीनगर प्रखंड स्थित किरतपुर प्राथमिक विद्यालय की जर्जर हालत का मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर जिला शिक्षा पदाधिकारी डॉ. विद्यानंद ठाकुर ने विद्यालय को उत्क्रमित मध्य विद्यालय गोस्वा में स्थानांतरित कर दिया है। प्रधानाध्यापक राजेंद्र प्रसाद ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि सोमवार से विद्यालय का संचालन नए भवन में शुरू कर दिया गया है।
भाजपा विधायक मैथिली ठाकुर ने विधानसभा में भी किरतपुर प्राथमिक विद्यालय की बदहाल स्थिति का मुद्दा उठाकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। विद्यालय भवन की हालत लंबे समय से खराब थी, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं होने से करीब 191 बच्चे जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर थे।
विद्यालय भवन का एक पिलर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका था। उसकी जगह नया कंक्रीट पिलर बनाने के बजाय बेंच-डेस्क और ईंटों के सहारे छत के एक हिस्से को अस्थायी सहारा दिया गया था। इसी रास्ते से बच्चे गुजरते थे और नीचे बैठकर भोजन भी करते थे। इससे कभी भी हादसा होने की आशंका बनी हुई थी।
भवन की हालत सिर्फ एक पिलर तक सीमित नहीं थी। छत से बारिश का पानी टपकता था, कई जगह प्लास्टर उखड़ चुका था और बीम व पिलर जर्जर हो चुके थे। कई हिस्सों में सरिया भी दिखाई देने लगा था। भवन की स्थिति के कारण शिक्षक और बच्चे डर के माहौल में पढ़ाई करने को मजबूर थे।
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विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक पढ़ाई होती है और करीब 191 बच्चे नामांकित हैं। नियमानुसार स्कूल में कम से कम छह कमरों की जरूरत है, लेकिन यहां महज दो कमरे उपलब्ध थे। इनमें एक कमरे में कार्यालय चलता था, जबकि दूसरे कमरे में कक्षा एक, दो और तीन के बच्चों को एक साथ पढ़ाया जाता था। जगह की कमी के कारण अन्य कक्षाएं बरामदे या खुले स्थान में संचालित करनी पड़ती थीं।
विद्यालय के सहायक शिक्षक पवन कुमार चौधरी ने बताया कि भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका था। इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों से लेकर वरीय अधिकारियों तक दी जा चुकी थी। ग्रामीण भी कई बार धरना-प्रदर्शन कर चुके थे। उन्होंने बताया कि ध्वस्त पिलर की जगह बेंच-डेस्क और ईंटों से अस्थायी सहारा दिया गया था।
शिक्षक संजीव कुमार ने क्या बताया?
शिक्षक संजीव कुमार ने बताया कि जगह की कमी के कारण एक कमरे में तीन कक्षाओं को एक साथ पढ़ाना पड़ता था, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी। विद्यालय में कुल 10 शिक्षक और 191 विद्यार्थी हैं। हालांकि जनगणना कार्य सहित अन्य कारणों से सभी शिक्षकों की उपस्थिति हर दिन समान नहीं रहती है।
स्थानीय ग्रामीण और अभिभावक दुखी कुमार यादव ने बताया कि विद्यालय भवन के निर्माण को लेकर ग्रामीण कई बार आवाज उठा चुके हैं और धरना-प्रदर्शन भी किया गया है। जर्जर भवन के कारण अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से भी डरते थे। ग्रामीणों ने प्रशासन से भवन का निरीक्षण कर जल्द नए भवन के निर्माण की मांग की है।
पांचवीं कक्षा की छात्रा राधिका कुमारी ने बताया कि शिक्षक अच्छी तरह पढ़ाते हैं, लेकिन स्कूल की खराब बिल्डिंग के कारण हमेशा डर लगा रहता था कि कहीं भवन गिर न जाए। दूसरी कक्षा की छात्रा आरोही कुमारी ने भी बारिश के दौरान छत से पानी टपकने की बात कही।
विद्यालय के जर्जर भवन को लेकर अब जिला स्तर पर आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है। विद्यालय को दूसरे भवन में स्थानांतरित किए जाने से फिलहाल बच्चों की सुरक्षा का खतरा टल गया है, लेकिन नए भवन के निर्माण की ठोस समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।