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BIhar: तिरंगे की सिलाई से संवर रही जिंदगी! समस्तीपुर की 1600 जीविका दीदियों ने संभाला 80 हजार झंडों का जिम्मा
Thu, 13 Aug 2026 12:44 PM IST
दरभंगा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, समस्तीपुर
Published by: दरभंगा ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2026 12:44 PM IST
सार
समस्तीपुर में हर घर तिरंगा अभियान ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का बड़ा अवसर लेकर आया है। जिले के 20 प्रखंडों की करीब 1600 जीविका दीदियां 80 हजार तिरंगे तैयार कर रही हैं।
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समस्तीपुर की महिलाओं को मिला बड़ा काम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
देशभक्ति के रंग में रंगा हर घर तिरंगा अभियान समस्तीपुर की ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया जरिया बन गया है। ‘वंदे मातरम्’ गीत के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर तिरंगे की बढ़ी मांग के बीच जिले की जीविका दीदियों को करीब 80 हजार तिरंगे तैयार करने का ऑर्डर मिला है। जिले के 20 प्रखंडों की करीब 1600 जीविका दीदियां इस काम में जुटी हैं। कहीं सिलाई केंद्रों पर दिन-रात मशीनें चल रही हैं तो कहीं महिलाएं अपने घरों में तिरंगे तैयार कर रही हैं। इस काम से महिलाओं को रोजगार के साथ अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी मिल रहा है।
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80 हजार तिरंगे बनाने का मिला ऑर्डर
आजादी के जश्न की तैयारियों के बीच समस्तीपुर की ग्रामीण महिलाओं के लिए तिरंगा रोजगार और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन गया है। ‘वंदे मातरम्’ गीत के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर चल रहे हर घर तिरंगा अभियान को लेकर जिले में तिरंगे की मांग बढ़ी है। सरकारी संस्थाओं की ओर से करीब 80 हजार तिरंगे बनाने का ऑर्डर जीविका दीदियों को मिला है।
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इस बड़े ऑर्डर को पूरा करने के लिए जिले के 20 प्रखंडों में करीब 1600 जीविका दीदियां सिलाई मशीनों पर जुटी हैं। किसी केंद्र पर दिन-रात सिलाई मशीनें चल रही हैं तो कहीं महिलाएं अपने घरों में तिरंगे तैयार कर रही हैं। पहले चरण में सभी प्रखंडों को चार-चार हजार झंडे बनाने का लक्ष्य दिया गया था। लक्ष्य पूरा करने वाले प्रखंडों को दूसरे चरण में अतिरिक्त ऑर्डर दिया जा रहा है। इससे महिलाओं को लगातार काम मिलने के साथ उनकी आमदनी का जरिया भी मजबूत हो रहा है।
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बेलारी में 25 महिलाएं दिन-रात बना रहीं तिरंगे
उजियारपुर प्रखंड के बेलारी गांव स्थित शशि जीविका महिला संकुल संघ का सिलाई केंद्र इन दिनों जिले में तिरंगा निर्माण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां 25 जीविका दीदियां लगातार सिलाई कर रही हैं, जबकि बड़ी संख्या में महिलाएं अपने घरों में मशीन लगाकर झंडे तैयार कर रही हैं। संकुल प्रभारी नीतू कुमारी ने बताया कि पहले चरण में चार हजार तिरंगे बनाने का ऑर्डर मिला था। ऑर्डर पूरा कर जिला को भेज दिया गया है।
10 हजार तिरंगे बनाने का नया ऑर्डर, एक महिला रोज तैयार कर रही 200 झंडे
अब दूसरे चरण में 10 हजार और तिरंगे बनाने की जिम्मेदारी मिली है। एक महिला रोज करीब 200 झंडे तैयार कर रही है। महिलाओं को तिरंगा बनाने के लिए जरूरी कच्चा माल जीविका की ओर से उपलब्ध कराया जाता है। सामग्री को लेकर किसी तरह की समस्या आने पर प्रखंड और जिला स्तर के पदाधिकारी मदद करते हैं, ताकि उत्पादन प्रभावित न हो और तय समय सीमा के भीतर ऑर्डर पूरा किया जा सके।
कोरोना में मास्क बनाए, अब तिरंगे से बढ़ी आमदनी
संकुल की महिलाओं ने कोरोना काल में भी बड़े पैमाने पर मास्क बनाकर अपनी क्षमता दिखाई थी। सिलाई का प्रशिक्षण मिलने के बाद महिलाओं ने इसे रोजगार का स्थायी माध्यम बना लिया। अब यहां सलवार-सूट, नाइटी, आंगनबाड़ी के बच्चों की पोशाक और रसोई के कपड़े समेत कई तरह के सामान तैयार किए जाते हैं। संकुल से जुड़ी कई महिलाएं हर महीने 10 से 15 हजार रुपये तक की आमदनी कर रही हैं। तिरंगे का ऑर्डर मिलने के बाद काम बढ़ा है और महिलाओं में उत्साह भी है।
बबीता के लिए सिलाई बनी घर चलाने का सहारा
संकुल की सदस्य बबीता कुमारी बताती हैं कि उन्होंने कोरोना काल में जीविका से जुड़कर सिलाई की ट्रेनिंग ली थी। इसके बाद मास्क बनाने से काम शुरू हुआ। बाद में आंगनबाड़ी के बच्चों की ड्रेस, नाइटी और दूसरे कपड़ों का काम मिलने लगा। अब तिरंगा बनाने का ऑर्डर मिलने से काम बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि केंद्र पर काम करने वाली महिलाओं के अलावा बड़ी संख्या में महिलाएं अपने घरों में भी तिरंगे बना रही हैं। घर पर तैयार किए गए झंडे केंद्र पर जमा कराए जाते हैं।
उजियारपुर में पहले 4 हजार, अब 10 हजार का अतिरिक्त ऑर्डर
उजियारपुर प्रखंड जीविका के बीपीएम डॉ. धनंजय कुमार ने बताया कि पहले चरण में प्रखंड को चार हजार तिरंगे बनाने का लक्ष्य दिया गया था। लक्ष्य पूरा कर जिला को झंडे भेज दिए गए हैं। अब दूसरे चरण में 10 हजार और तिरंगे बनाने का ऑर्डर मिला है। जीविका दीदियां इसे पूरा करने में लगी हैं।
डीपीएम बोले- तिरंगे की मांग को रोजगार में बदला
जीविका के डीपीएम विक्रांत शंकर सिंह ने बताया कि हर घर तिरंगा अभियान के तहत सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं में तिरंगे की मांग बढ़ी है। इसी मांग को देखते हुए जीविका दीदियों को झंडे बनाने के काम से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि जिले के 20 प्रखंडों को पहले चरण में चार-चार हजार तिरंगे बनाने का ऑर्डर दिया गया था। जिन प्रखंडों ने अपना लक्ष्य पूरा कर लिया है, उन्हें दूसरे चरण में नया ऑर्डर दिया गया है। पूरे जिले में करीब 1600 जीविका दीदियां सिलाई केंद्रों के साथ-साथ अपने घरों में भी तिरंगा तैयार कर रही हैं।