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Darbhanga Raj : अंतिम महाराज कामेश्वर सिंह की तीसरी महारानी कामसुंदरी देवी बीमार; पढ़िए, दरभंगा राज की कहानी

Thu, 11 Sep 2025 12:58 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला,दरभंगा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,दरभंगा Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Thu, 11 Sep 2025 12:58 PM IST
सार

दरभंगा महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी महारानी कामसुंदरी देवी (95) वर्तमान में अस्पताल में इलाजरत हैं। उनका निधन होने के बाद कामेश्वर रिलीजियस ट्रस्ट की जिम्मेदारी युवराज कपिलेश्वर सिंह और उनके परिवार को मिलेगी।

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Darbhanga Raj Third Queen of Last Maharaja Kameshwar Singh, Unwell Bihar News in Hindi
दरभंगा महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी महारानी कामसुंदरी देवी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दरभंगा महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी, महारानी कामसुंदरी देवी (95 वर्ष), वर्तमान में निजी अस्पताल में इलाजरत हैं। महाराजा कामेश्वर सिंह ने कामसुंदरी देवी के नाम कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन की स्थापना की थी। महाराजाधिराज की तीन पत्नियां थीं – महारानी राजलक्ष्मी, कामेश्वरी प्रिया और कामसुंदरी देवी। महाराजाधिराज के कोई संतान नहीं थी। बड़ी पत्नी महारानी राजलक्ष्मी का निधन 1976 में, और दूसरी पत्नी कामेश्वरी प्रिया का 1942 में हो गया था।

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राज परिवार और ट्रस्ट का इतिहास

दरभंगा राज परिवार की स्थापना 1535 में महेश ठाकुर द्वारा की गई थी, जिसमें मिथिला क्षेत्र का लगभग 8,380 वर्ग किलोमीटर शामिल था। महाराजा कामेश्वर सिंह (1929–1962) इस परिवार के अंतिम शासक रहे। वे दो बार राज्यसभा सदस्य भी रहे। 1947 में आजादी के बाद दरभंगा राज्य की अधिकांश संपत्तियों को सरकार ने अधिग्रहित कर लिया, जबकि कुछ जमीन और किले दान में दे दिए गए। इसी क्रम में 1961 में मिथिला संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की गई, जिसका नाम बाद में कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय रखा गया।
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16 मार्च 1949 को महाराजा कामेश्वर सिंह के जीवित रहते कामेश्वर रिलीजियस ट्रस्ट का गठन हुआ। ट्रस्ट का प्रमुख हमेशा राज दरभंगा का प्रमुख होता था। महाराजाधिराज के निधन के बाद बड़ी रानी राजलक्ष्मी ट्रस्टी बनीं, और उनके निधन के बाद छोटी रानी कामसुंदरी देवी इसकी ट्रस्टी हैं। 2003 में उन्होंने अपनी पावर ऑफ़ एटॉर्नी अपने बहन के बेटे उदयनाथ झा को दे दी थी।


ट्रस्ट का भविष्य और संपत्ति का बंटवारा

महारानी कामसुंदरी के निधन के बाद ट्रस्ट की जिम्मेदारी युवराज कपिलेश्वर सिंह और उनके परिवार को मिल जाएगी। यह ट्रस्ट की आमदनी और संपत्ति की देखरेख का अधिकार उन्हें सौंपे जाने के बाद उन्हें हस्तांतरित किया जाएगा। पहले भी कपिलेश्वर सिंह ने कामसुंदरी देवी के माध्यम से ट्रस्ट की संपत्ति को अपने नाम करवा लिया है। महाराजाधिराज ने अपने दोनों रानियों को दरभंगा में महल और मासिक पचास-पचास हजार रुपए देने का नियम बनाया था। उनकी वसीयत के अनुसार, संपत्ति का एक-तिहाई हिस्सा लोकहित के लिए रखा गया। लंदन के लॉयड्स बैंक में 1958 की वसीयत सुरक्षित रखवाई गई थी।

संपत्ति और विवादों का इतिहास

1975 में इमरजेंसी के दौरान बिहार सरकार ने राज दरभंगा की संपत्ति का अधिग्रहण कर लिया। महारानी राजलक्ष्मी की डायरी में उल्लेख है कि सरकार ने 300 बीघा जमीन के लिए 70,000 रुपए मुआवजे का प्रस्ताव रखा, जिसे ट्रस्टियों ने स्वीकार किया। इसके अलावा, विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ललित नारायण मिश्र कर दिया गया। महारानी ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में ट्रस्टियों ने सरकार से रिश्वत ली।

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