Bihar: गरीबी, डिप्रेशन और असफलता... सब पर भारी पड़ी कायनात की मेहनत, री-NEET में कर दिखाया कमाल
दरभंगा के बिरौल प्रखंड की रहने वाली कायनात खानम ने संघर्ष, गरीबी और लगातार असफलताओं को मात देकर री-NEET परीक्षा में 593 अंक हासिल किए और ऑल इंडिया रैंक 1407 प्राप्त की। ट्रक ड्राइवर पिता की बेटी कायनात पहले तीन बार असफल रही और पेपर लीक के बाद परीक्षा रद्द होने से डिप्रेशन में भी चली गई थी।
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दरभंगा जिले के बिरौल प्रखंड के मोरवारा गांव की रहने वाली कायनात खानम ने मेहनत और हौसले की ऐसी मिसाल पेश की है, जो हर छात्र के लिए प्रेरणा है। ट्रक ड्राइवर की बेटी कायनात ने री-NEET परीक्षा में 720 में से 593 अंक हासिल कर सफलता पाई है। इस शानदार प्रदर्शन के साथ उसे ऑल इंडिया रैंक 1407 मिली है। लगातार संघर्ष, आर्थिक तंगी और डिप्रेशन से बाहर निकलकर मिली यह सफलता पूरे परिवार के लिए किसी सपने के सच होने से कम नहीं है।
ट्रक ड्राइवर पिता ने हर मुश्किल में दिया साथ
कायनात के पिता इम्तियाज़ अहमद खान ट्रक चलाकर परिवार का खर्च चलाते हैं। परिवार में माता-पिता, एक छोटा भाई, एक बहन और कायनात हैं। बेहतर पढ़ाई के लिए उन्होंने गांव छोड़कर दरभंगा शहर के रहमगंज में किराये का मकान लिया। सीमित आमदनी के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी।
गांव से शहर तक का संघर्ष
कायनात की शुरुआती पढ़ाई नाना-नानी के घर रहकर हुई। कोरोना महामारी के दौरान वह गांव लौट आई, लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई के समय नेटवर्क की समस्या ने मुश्किलें बढ़ा दीं। इसके बाद पिता ने दरभंगा में किराये का मकान लेकर पढ़ाई का बेहतर माहौल उपलब्ध कराया।
तीन बार असफल हुई, फिर भी नहीं मानी हार
कायनात ने NEET की तैयारी के दौरान लगातार तीन बार असफलता का सामना किया। इसके बावजूद उसने हार नहीं मानी और अपनी गलतियों से सीखते हुए तैयारी जारी रखी। वर्ष 2026 में हुई NEET परीक्षा पेपर लीक की वजह से रद्द होने पर वह कुछ समय के लिए डिप्रेशन में चली गई। इसी दौरान ओमेगा स्टडी सेंटर के शिक्षक सुमित चौबे ने उसका हौसला बढ़ाया और दोबारा तैयारी के लिए प्रेरित किया।
रोज 12 से 13 घंटे की पढ़ाई लाई रंग
कायनात ने बताया कि री-NEET को लेकर यह धारणा थी कि पेपर पहले से ज्यादा कठिन होगा। इसलिए उसने रोज 12 से 13 घंटे तक पढ़ाई की। आखिरकार उसकी मेहनत रंग लाई और उसने 593 अंक हासिल कर NEET UG परीक्षा पास कर ली।
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माता-पिता और शिक्षक को दिया सफलता का श्रेय
कायनात ने कहा कि इस सफलता का पूरा श्रेय उसके माता-पिता और शिक्षक सुमित चौबे को जाता है। उसने बताया कि परीक्षा रद्द होने की खबर मिलने के बाद वह पूरी तरह टूट गई थी, लेकिन शिक्षक के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग ने उसे फिर से खड़ा कर दिया।
पिता बोले- बेटी का सपना पूरा हुआ
इम्तियाज़ अहमद खान ने कहा कि ट्रक ड्राइवर की जिंदगी आसान नहीं होती। कमाई का बड़ा हिस्सा किराया, खाने-पीने और बच्चों की पढ़ाई पर खर्च हो जाता है। इसके बावजूद उन्होंने बेटी का डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए हर संभव कोशिश की। उन्होंने कहा कि आज बेटी की सफलता से पूरा परिवार बेहद खुश है और उनकी वर्षों की मेहनत सफल हो गई।