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Bihar: LNMU कुलपति संजय कुमार चौधरी को राजभवन की क्लीनचिट, PMO को भेजी रिपोर्ट; क्या था मामला?

Sat, 27 Dec 2025 02:27 PM IST
दरभंगा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा Published by: दरभंगा ब्यूरो Updated Sat, 27 Dec 2025 02:27 PM IST
सार

Bihar: LNMU के कुलपति संजय कुमार चौधरी को राजभवन ने क्लीनचिट दे दी है। राज्यपाल के प्रधान सचिव ने PMO को पत्र लिखकर उनकी प्राचार्य और कुलपति पद पर बहाली को नियमसंगत और पारदर्शी बताया।

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Bihar: LNMU Vice-Chancellor Sanjay Kumar Chaudhary receives a clean chit from the Raj Bhavan
पत्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (LNMU) के कुलपति संजय कुमार चौधरी को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच राजभवन ने उन्हें क्लीनचिट दे दी है। राज्यपाल के प्रधान सचिव रॉबर्ट एल. चॉन्गथू ने 28 फरवरी 2025 को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि संजय कुमार चौधरी की नियुक्ति पूरी तरह सही और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत की गई है।

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हालांकि, संजय कुमार चौधरी का नाम इससे पहले कई विवादों और आरोपों से जुड़ चुका है। उनके खिलाफ राजभवन में कई बार शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। कुछ मामलों में जांच के बाद उन्हें दोषी भी माना गया था, लेकिन बाद में गठित जांच समितियों ने उन्हें क्लीनचिट दे दी।

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क्या था मामला?
बताया जाता है कि तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के एक शिक्षक ने संजय कुमार चौधरी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि वर्ष 2011 में जब उन्हें कॉलेज का प्राचार्य बनाया गया, उस समय उनके पास पीएचडी की डिग्री नहीं थी, जबकि प्राचार्य पद के लिए न्यूनतम योग्यता प्रोफेसर होना अनिवार्य मानी जाती है। शिकायत के बाद उनके प्रोफेसर बनने का निर्णय रद्द भी किया गया, लेकिन आरोप है कि प्रभाव का इस्तेमाल कर वे प्रोफेसर पद पर बने रहे।

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इसके अलावा, 2015 से 2017 के बीच तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में उनके कार्यकाल के दौरान वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगे। जांच समिति ने उन्हें दोषी मानते हुए कार्रवाई की अनुशंसा की थी। मामला आगे चलकर राजभवन और PMO तक पहुंचा।

PMO द्वारा कुलपति और प्राचार्य नियुक्ति से जुड़ी जांच रिपोर्ट मांगे जाने के बाद राजभवन ने एक अलग जांच समिति गठित की। इस समिति की रिपोर्ट में संजय कुमार चौधरी को क्लीनचिट दे दी गई। इसके आधार पर राज्यपाल के प्रधान सचिव ने PMO को पत्र लिखकर उनकी नियुक्ति को नियमसम्मत और पारदर्शी बताया।

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