Bihar: अंग्रेजी में लिखावट देख सीएम नीतीश कुमार नाराज, अधिकारियों से कहा- सरकारी भवनों पर हिंदी ही अंकित कराएं
CM नीतीश ने कहा- हम चाहते हैं कि हिंदी भाषा का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा हो ताकि कोई भी सूचना या जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सकें। यदि कोई सूचना लोगों तक पहुंचानी है तो उसके लिए हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी के बजाए उर्दू भाषा का प्रयोग करें।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का हिंदी के प्रति झुकाव जगजाहिर है। कई बार मंच से वह बिहार में हिंदी की वकालत करते भी नजर आए हैं। एक बार फिर से वह अंग्रेजी में लिखी अक्षरों को देखकर नाराज हो गए। उन्होंने फौरन अधिकारियों ने इसे हटाकर हिंदी में लिखने का निर्देश दिया। दरअसल, सीएम नीतीश कुमार प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर बुधवार को बांका पहुंचे थे। सबसे पहले मुख्यमंत्री ने सदर अस्पताल के नए मॉडल भवन का उद्घाटन करने के बाद आरएमके मैदान पहुंचे। जहां जीविका के साथ ही भूमिहीन लोगों के बीच वसीयत पर्चा का वितरण किया गया। जीविका दीदी द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉल का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के क्रम में डिजिटल लाइब्रेरी में इंग्लिश में लिखावट देखकर मुख्यमंत्री ने नाराजगी प्रकट करते हुए इसे हिंदी में करने को कहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि हिंदी काफी महत्वपूर्ण भाषा है। हमारी इच्छा है और हम बराबर कहते भी रहते हैं कि हिंदी भाषा का अधिक से अधिक प्रयोग करें। सरकारी भवनों पर अंग्रेजी की जगह हिंदी भाषा ही अंकित कराएं। हमने इंजीनियरिंग की पढ़ाई अंग्रेजी में ही की है। अंग्रेजी भाषा भी आवश्यक है लेकिन हमारी सरकारी भाषा हिंदी और उर्दू है। अधिक से अधिक लोग हिंदी पढ़ना जानते हैं। हम चाहते हैं कि हिंदी भाषा का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा हो ताकि कोई भी सूचना या जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सकें। यदि कोई सूचना या जानकारी लोगों तक पहुंचानी है तो उसके लिए हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी के बजाए उर्दू भाषा का प्रयोग करें। सरकारी भवनों पर हिंदी भाषा में ही सूचनायें अंकित की जानी चाहिये। जब हम सांसद थे और केंद्र में मंत्री थे, तभी से अपना नाम हिंदी में लिखते हैं।
226 दीदियों के व्यवसाय के लिए 83.65 लाख रुपये
मुख्यमंत्री ने 'जीविका बांका द्वारा संचालित गतिविधियों से संबंधित लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। अवलोकन के क्रम में मुख्यमंत्री ने सतत् जीविकोपार्जन योजना के तहत 226 दीदियों के व्यवसाय हेतु 83 लाख 65 हजार रुपये का चेक एवं 2706 जीविका महिला स्वयं सहायता समूहों को 81 करोड़ 64 लाख रुपये का चेक जीविका दीदियों को प्रदान किया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में बांका पहला जिला है जहां सरकारी जमीन से अतिक्रमण मुक्त करा कर भूमिहीनों को पर्चा देकर बसाया जा रहा है। इसी तरह सभी जिले में लागू किया जाएगा। मौके पर सांसद गिरधारी यादव, बेलहर विधायक मनोज यादव, डीआईजी,धोरैया विधायक भूदेव चौधरी, डीएम अंशुल कुमार,प्रभारी एसपी अमित रंजन,एडीएम माधव कुमार सिंह, एसडीपीओ विपिन बिहारी, अनुमंडल पदाधिकारी अरुण कुमार सिंह आदि भारी संख्या में पुलिस प्रशासन उपस्थित है।
जब मंच पर से सीएम पूछ बैठे थे- इंग्लैंड है? बताया- यह बिहार है
मुख्यमंत्री ने युवक के अल्प-विराम लेते ही टोका- “एक बात जरा हम कहना चाहेंगे। यह क्या है! बिहार है ना जी! आप लोग जितना बोल रहे हैं, अंग्रेजी शब्द का प्रयोग कर रहे हैं। यह हो क्या गया है? आप अपने राज्य के, अपने देश के हिंदी शब्द को भूल जाइएगा! आश्चर्य लग रहा है कि बिना मतलब के अंग्रेजी बोल रहे हैं! जब आप खेती करते हैं तो खेती तो आम आदमी करता है। आपको यहां बुलाया गया सुझाव देने के लिए। आप आधा से ज्यादा अंग्रेजी बोल रहे हैं। इंग्लैंड है? यह भारत है ना जी। अब बोलिए बिहार है ना? हम देख रहे हैं कि यह हो क्या गया है।