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Bihar के अफसर'शाह’ : गालीबाजी के वीडियो आए, मगर IAS केके पाठक का 8 दिन बाद भी कुछ नहीं बिगड़ा

Fri, 10 Feb 2023 03:31 PM IST
कुमार जितेंद्र ज्योति कृष्ण बल्लभ नारायण, पटना
कृष्ण बल्लभ नारायण, पटना Published by: कुमार जितेंद्र ज्योति Updated Fri, 10 Feb 2023 03:31 PM IST
सार

IAS KK Pathak : 2 फरवरी को आईएएस केके पाठक की गालीबाजी का पहली बार वीडियो सामने आने के बाद सचिवालय थाने में तहरीर दी गई, लेकिन उसे सनहा के रूप में रख लिया गया। प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। बिहार में अफसरशाहों पर सरकारी इनायत की यही हकीकत है।

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Bureaucracy of Nitish Kumar Bihar : Even after Videos of abuses nothing happened to IAS KK Pathak
बिहार में बिहारी अस्मिता पर हमले के बावजूद सरकार की चाल सुस्त है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी IG विकास वैभव को DG शोभा अहोटकर से पड़ रही गालियों के केस की रिकॉर्डिंग भी सामने आ गई तो सरकार क्या करेगी? पूरे प्रकरण में 'असंदर्भित शब्द’ का उपयोग जैसा कुछ लिखकर आ जाएगा, इससे ज्यादा कुछ नहीं। बिहार में अफसरशाहों पर सरकारी इनायत की यही हकीकत है। पिछले साल IAS केके पाठक ने भरी मीटिंग में, वीडियो कांफ्रेंसिंग के दरम्यान, महिलाओं के बीच में बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) अधिकारियों को मां-बहन की गालियां दीं, बिहार और बिहारियों को क्या नहीं कह दिया...लेकिन कुछ नहीं हुआ है अबतक। हालत यह है कि 2 फरवरी को पहली बार वीडियो सामने आने के बाद बिहार प्रशासनिक सेवा संघ (BASA) ने सचिवालय थाने में तहरीर दी, लेकिन उसे सनहा के रूप में रख लिया गया। प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। सात दिन पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्य सचिव से जांच कराने की बात कही थी। उसके बाद दूसरा वीडियो आए भी छह दिन बीत गए। यह हालत भी तब है, जब सरकारी कागज पर स्वीकार कर लिया गया है कि हां, ऐसी बात हुई थी।

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बिहारी अस्मिता और भाषा की गरिमा ताक पर
बिहार में बिहारी अस्मिता और भाषा की गरिमा ताक पर रखकर सरकार भी भूल गई है। यह कोई बयान नहीं, बल्कि हकीकत के आधार पर दी जा रही जानकारी है। नवंबर-दिसंबर में बिहार सरकार में निबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव और बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड रूरल डेवलपमेंट (BIPARD) के महानिदेशक IAS के. के. पाठक ने सामने आए वीडियोज़ में दोनों मीटिंग के दरम्यान जो कहा, उसमें से कई शब्द 'अमर उजाला’ लिख नहीं सकता। केके पाठक ने सचिवालय के विभागीय सभा कक्ष में अफसरों को गालियां दीं। बिहार और बिहारियों को लेकर ढेर सारे अपशब्द कहे। अफसरों को मां-बहन की न केवल गालियां दीं, बल्कि यह तक कहा कि इसके बगैर सुनते-समझते नहीं हैं ये। मीटिंग के दौरान फिजिकल और वर्चुअल रहे अधिकारियों ने शिकायत भी की, लेकिन दबा दी गई। पहला वीडियो दो फरवरी को वीडियो सामने आया और दूसरा चार फरवरी को। दो फरवरी को ही सचिवालय थाने में बासा ने प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई के लिए तहरीर दी। इसके अगले दिन 3 फरवरी को मुख्यमंत्री ने समाधान यात्रा के दौरान कहा कि उन्हें इसकी जानकारी मिली है और उन्होंने मुख्य सचिव को खुद जांच करने कहा है।

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Bureaucracy of Nitish Kumar Bihar : Even after Videos of abuses nothing happened to IAS KK Pathak
पटना के सचिवालय थाने में दी गई शिकायत पर आठ दिन में कोई एक्शन नहीं। प्राथमिकी तक नहीं दर्ज हुई। - फोटो : अमर उजाला

सचिवालय थाना कर रहा आदेश का इंतजार
‘अमर उजाला’ रिपोर्टर ने 9 जनवरी को कई घंटे इस केस की ताजा स्थिति जानने में लगाए। हकीकत के नाम पर कुछ हासिल नहीं हुआ। सचिवालय थाने में बासा की ओर से दी गई शिकायत की कॉपी पड़ी है, बस। सचिवालय थानाध्यक्ष ने बस यह जानकारी दी- “सनहा लिया गया था। 2005 के नियम के अनुसार ऐसे किसी अधिकारी पर पुलिसिया कार्रवाई तभी हो सकती है, जब उसके सीनियर अधिकारी इसकी अनुशंसा करें। मंतव्य के बगैर कुछ नहीं होगा। शेष जानकारी सचिवालय से लीजिए।” कुछ देर बाद थाने में एएसपी भी पहुंचे। उन्होंने भी कहा कि यह हमारे क्षेत्राधिकार से बाहर है। सचिवालय से अनुशंसा अबतक पुलिस को प्राप्त नहीं है और मुख्यमंत्री ने चूंकि जांच के लिए मुख्य सचिव का नाम कह दिया है तो बाकी अधिकारी इसपर बात ही करने के लिए तैयार नहीं दिखे। शुक्रवार को भी यह प्रयास बेकार गया। बताया जा रहा है कि मुख्य सचिव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ ज्यादातर समाधान यात्रा में रह रहे हैं, इसलिए इस दिशा में कोई प्रगति नहीं है। समाधान यात्रा का 16 फरवरी तक का शिड्यूल है। इस बीच 12 को यात्रा नहीं है, लेकिन उस दिन रविवार है।

पहले वीडियो में केके पाठक क्या कह रहे थे
दो फरवरी को सामने आए वीडियो में जहां-जहां गालियां थीं, उन्हें यहां डाट्स के रूप में लिखा गया है- "...डिप्टी कलेक्टर का मां-बहन एक कर दो। ...बिहार एडमिनिस्ट्रेशन! यहां का लोग आदमी ऐसा है। चेन्नई में आदमी ... बाएं से चलता है, यहां देखे हो किसी को बाएं से चलते? लाल लाइट में हॉर्न बजाते देखे हो चेन्नई में किसी को? यहां ... ट्रैफिक में खड़ा होकर पेंपेंपेंपें हॉर्न बजाएगा! देखे नहीं हो क्या तुमलोग बेली रोड पे? ... लाल लाइट भी है और पेंपें भी करेगा। ... यहां का आदमी आज भी है! यहां डिप्टी कलेक्टर ... का ये हाल है। अब मैं ... की मैं, अरे दो-चार लोग लिखकर तो दो ... डिप्टी कलेक्टर ... इनकी ऐसी-तैसी करता हूं। कल जरा भेजो उसको।" 

दूसरे वीडियो में केके पाठक क्या कह रहे थे
चार फरवरी को वायरल हुए वीडियो में पाठक जो कह रहे, उसमें भी गालियों की जगह डाट्स लिखे गए हैं। वह कह रहे- "बस मां-बहन की गाली सुनने के बाद अक्ल आती है। अभी तुम्हारी मैडम को फोन लगाता हूं।" (महिला अधिकारी को काॅल लगाने के लिए कहते हैं)। फिर वीडिया कांफ्रेंसिंग हॉल में ही- "सब … सर। अबे ... यहां सर ही तो हैं, यहां आम आदमी कौन है बिहार में...। कहां मर गया रोहतास?” जवाब मिलने पर- "अरे ये जो को-ऑपरेटिव का बंदर बैठा है, उसे (अस्पष्ट वाक्य)।" फिर वही बुदबुदाते हुए- “...उल्लू के पट्ठे इंजीनियर गधा। कॉल पर- दस हजार लेता है तो दो, कराओ। सब के सब निकम्मे, गधे कहीं के।"

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