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बिहार: अब सभापति की कुर्सी से तय होगा महागठबंधन का भविष्य

Fri, 17 Mar 2017 10:44 PM IST
amarujala.com- Presented by: विक्रान्त सिंह
amarujala.com- Presented by: विक्रान्त सिंह Updated Fri, 17 Mar 2017 10:44 PM IST
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Bihar: Now the chair of chairman of the bihar assembly will decide the future of grandalliance
लालू और नीतीश
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पसंद से लगातार अलग जाहिर होती राजद की पसंद ने राज्य में नए समीकरण की जमीन तैयार होने की संभावना को जन्म दे दिया है। ऐसे में आने वाले दिनों में कई मसलों पर महागठबंधन के अंदर खींचतान और रार बढ़ने वाली है। बृहस्पतिवार को सभापति पद को लेकर राजद ने अपना दावा ठोंक दिया है। 
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इस पद पर वर्तमान सभापति अवधेश नारायण सिंह ही नीतीश की पसंद बताए जाते हैं। उनकी जीत में भी जदयू की भूमिका कही जा रही है। ऐसे में राजद और जदयू अपनी अपनी पंसद को लेकर आमने-सामने हैं। राजद की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने कहा कि राजद को किसी सूरत में भाजपा कोटे से सभापति अब मंजूर नहीं है। राजद के कोटे से किसी व्यक्ति को सभापति चुना जाना चाहिए। 
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इधर, भाजपा ने अवधेश नारायण सिंह को सभापति बनाए रखने की संभावनाओं पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को धन्यवाद दिया है। गठबंधन के सहयोगी कांग्रेस के रामचन्द्र भारती ने भी कहा कि सभी दलों को आगे भी अवधेश बाबू को ही सभापति बनाये रखना चाहिए।
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ऐसे में राजद की राह मुश्किल है, लेकिन राजद आसानी ने यह पद भाजपा की झोली में नहीं देगा। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने इस मसले पर कहा कि सभापति पद का फैसला महागठबंधन के नेता करेंगे। जहां-जहां महागठबंधन एक साथ लड़ा, वहां जीत हुई, इसको भी हम सबको देखना होगा। इधर, जदयू के प्रवक्ता नीरज ने कहा कि नीतीश कुमार हमेशा उच्च परंपरा को कायम रखने वाले व्यक्ति रहे हैं। राजग सरकार के समय भी कांग्रेस के अरुण कुमार सभापति थे।

उल्लेखनीय है कि अवधेश बाबू तकनीकी तौर पर भाजपा के सदस्य जरूर हैं, लेकिन वो नीतीश के खास रहे हैं। यही कारण है कि 2015 में जदयू, राजद और कांग्रेस के महागठबंधन के बहुमत से सत्ता में आने के बावजूद नीतीश कुमार ने मित्र धर्म का निर्वहन करते हुए भाजपा के अवधेश नारायण सिंह को परिषद् का सभापति बनाए रखा। इतना ही नहीं, अवधेश नारायण को अपरोक्ष समर्थन देकर उनकी जीत में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई है। 

अवधेश बाबू के खिलाफ घटक दल के दो उम्मीदवार भी किस्मत आजमा रहे थे जिनमें राजद के डा. पुनीत कुमार सिंह व कांग्रेस से डा. अजय कुमार शामिल थे। डा. पुनीत राजद के दिग्गज नेता व पूर्व सांसद जगदानंद सिंह के पुत्र हैं वहीं डा. अजय कुमार पुराने कांग्रेसी और प्रख्यात सहकारी नेता स्व. तपेश्वर सिंह के पुत्र हैं। बताया जाता है कि जदयू का शत-प्रतिशत वोट भाजपा प्रत्याशी अवधेश नारायण सिंह को गए।

उल्लेखनीय है कि विधानसभा में जदयू के 71 सदस्य है, जबकि राजग के 58 सदस्य। दोनों की संख्या मिलाकर 129 हो जाती है, जो संख्या बहुमत के लिए अनिवार्य संख्या 122 से 7 अधिक है। 


राजद अगर कांग्रेस के 27, निर्दलीय चार और सीपीआईएमएल के तीन सदस्यों सहित अपने 80 सदस्यों की संख्या को जोड़ता है तब भी उसकी संख्या मात्र 114 ही रहती है, जो सरकार बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। बहरहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि नीतीश सभापति के मामले में ही राजद से अलग पसंद रखते हैं या फिर आने वाले राष्ट्रपति चुनाव में भी उनकी पसंद राजद से अलग रहेगी।
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