Digvijay Singh : कभी सीएम नीतीश कुमार के दोस्त, फिर दुश्मन भी रहे थे 'दादा'; दिग्विजय सिंह की पुण्यतिथि आज
Bihar News : दिग्विजय सिंह आज चर्चा में हैं, क्योंकि बिहार सरकार के ओहदेदार भाजपाई आज उनके गांव पहुंच रहे हैं। 15वीं पुण्यतिथि पर उनकी प्रतिमा का अनावरण हो रहा है। केंद्र के मंत्री, सीएम नीतीश कुमार के मित्र और दुश्मन... हर तरह से वह चर्चित रहे थे।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बिहार की सियासत में 'दादा' कहे जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह, एक ऐसा प्रभावशाली नाम था, जिनकी शख्सियत लोगों के मन मस्तिष्क में आज भी घूमती है। ऐसा हम नहीं बल्कि ऐसा वो कह रहे हैं जो उनको व्यक्तित्व रूप से जानते हैं। जदयू के प्रदेश समिति सहायक सलाहकार इंजीनियर शंभू शरण ने बताया कि गिद्धौर के नयागांव में जन्म लेने वाले दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय फलक पर अपनी अमिट छाप छोड़ते हुए भारतीय राजनीति पर विशेष पकड़ स्थापित की थी। इलाके के लोग प्रेमवश 'दादा' कहकर बुलाते रहे और अब भी उनकी चर्चाएं इसी नाम से होती है। उन्होंने कहा कि दादा के पुण्यतिथि को राजकीय समारोह घोषित किया जाए।
आज भी लोगों के दिल में बसते हैं स्व. दिग्विजय सिंह
जदयू के खैरा प्रखंड अध्यक्ष रामानंद सिंह ने बताया कि चंदेल राजवंश घराने के कुमार सुरेन्द्र सिंह व सोना देवी के पुत्र पूर्व केन्द्रीय मंत्री स्व. दिग्विजय सिंह अपने जीवन काल मे लोकहित में किये कार्य और समाज के प्रति उनका निःस्वार्थ समर्पण के कारण आज भी अपने चाहने वालों के दिल में जिन्दा हैं। उत्कृष्ट व्यक्तित्व के धनी रहे दिग्विजय सिंह अपने परिपक्व राजनीतिक जीवन में जब तक रहे 'दिग्विजय' रहे। शायद यही कारण है कि विपरीत परिस्थियों में भी अपने सिद्धातों पर अडिग रहने वाले दिग्विजय सिंह के दिवंगतोपरांत आज भी लोग उनके विचारों, आदर्शों एवं प्रतिभाओं की आभा को आत्मसात करने को लालायित रहते हैं। भाजपा के जिला अध्यक्ष दुर्गा प्रसाद केसरी ने कहा कि दिग्विजय सिंह अपने कार्यों के बदौलत आज भी लोगों के दिल में बसते हैं। उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी अपनी छाप छोड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह का ताल्लुक भले ही राजपरिवार से रहा हो, लेकिन उनका मिजाज समाजवादी था। शायद यही कारण था कि जॉर्ज फर्नांडीस और नीतीश कुमार से पहले इनकी खूब छनी। सन् 1989 में बांका से अपना राजनीतिक जीवनारंभ करने के बाद कभी चरित्र व व्यक्तित्व से समझौता नहीं किया। वे सदैव स्वाभिमान की लड़ाई लड़ते रहे। वे जनता की बेबसी, अनीति, लाचारी, बेरोजगारी व अन्याय के विरुद्ध सदैव संघर्ष कर उनके हक और अधिकार के लिए प्रयासरत रहे। उनके राजनीतिक जीवन मे कई दाव पेंच आए, लेकिन इनका स्वभाव स्थिर रहा।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया राज्य नागरिक परिषद का गठन, जंबोजेट बनने पर लोग पूछ रहे सवाल
2009 में नीतीश और दिग्विजय सिंह की कटुता सामने आई
जदयू के जिला महासचिव राजेश कुमार ने बताया कि निशानेबाजी के शौकीन रहे दिग्विजय सिंह ने राजनीति में भी कई सटीक निशाने लगाए। इनका निशाना कुछ इतना सटीक होता था कि इनके प्रतिद्वंदी तिलमिला उठते थे। वर्ष 2009 में नीतीश और दिग्विजय सिंह की कटुता खुलकर सामने आ गई थी। भाजपा जिला महामंत्री बृजनंदन सिंह ने कहा कि दिग्विजय सिंह ऐसे व्यक्ति थे जो सभी के दिल में बसते थे। दिग्विजय सिंह बांका से निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे। उस वक्त इस सीट पर नीतीश कुमार ने अपने कैंडिडेट को उतारा था, लेकिन दिग्विजय सिंह ने अपनी ताकत दिखाई और निर्दलीय ही चुनाव जीतकर बांका को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई। हालांकि इसके कुछ ही दिन बाद 24 जून 2010 में लंदन में दिग्विजय सिंह का ब्रेन हेमरेज की वजह से उनके निधन के साथ ही बिहार की राजनीति का एक अध्याय समाप्त हो गया। इसके बाद उनकी पत्नी पुतुल कुमारी राजनीतिक में अपनी कदम रखा और वह अपने पति की मृत्यु के बाद 2010 में उपचुनाव में बांका से लोकसभा के लिए चुनी गईं, हालांकि फिर 2019 में बांका से लोकसभा चुनाव हार चुकी हैं।
पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी भी हैं विधायक
बृजनंदन सिंह ने कहा कि श्रेयसी सिंह बिहार के दिग्गज नेता रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी हैं, जो 2020 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हुई थीं। श्रेयसी ने भूपेंद्र यादव की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद श्रेयसी ने जेपी नड्डा से भी मुलाकात की। श्रेयसी सिंह ने भाजपा जॉइन करने के बाद भाजपा ने बिहार विधानसभा चुनाव के लिए उन्हें टिकट देकर अपना उमीदवार भी बनाया। इसके बाद भाजपा कैंडिडेट के रूप में श्रेयसी सिंह ने अपने डेब्यू सियासी पारी में शानदार जीत हासिल की है।
दिग्विजय सिंह उर्फ दादा की जीवन यात्रा
- 14 नवम्बर 1955 : गिद्धौर की धरती पर जन्म
- शिक्षा :- महाराज चन्द्रचूड़ विद्यामन्दिर गिद्धौर से प्रारंभिक शिक्षा, पटना यूनिवर्सिटी से स्नातक, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से एमफिल।
- 1979 :- डी. यू. छात्र संघ का चुनाव जीत राजनीति में हुए सक्रिय
- 1990 :- राज्यसभा पहुंचे
- 1991 :- चन्द्रशेखर सरकार में केंद्रीय मंत्री बने
- 1994 :- समता पार्ट का गठन
- 1998 :- बांका लोकसभा चुनाव लड़कर जीत हासिल की
- 1999 :- लोकसभा से निर्वाचित घोषित
- 2001/2002: राजनीतिक व प्रशासनिक क्षमता देखते हुए केंद्र में रेल मंत्रालय और विदेश मंत्रालय में राज्यमंत्री का पद संभालने का मौका मिला
- वर्ष 2005 :- झारखंड राज्य सदस्य के रूप में चुने गए
- 2009:- बांका लोकसभा से निर्दलीय चुने गए, ऐतिहासिक रही जीत
- 24 जून 2010 : ब्रेन हेमरेज से निधन
इनपुट: जमुई से सेंटू कुमार