Bihar Police : वर्दी वाले ने ही जब्त मोबाइल से किया था ट्रांजेक्शन, दरोगा निलंबित; पुलिस मामला घुमा रही थी
Bihar News : 'अमर उजाला' ने जब बताया कि बंदी के मोबाइल से ट्रांजेक्शन हुआ है तो खगड़िया पुलिस ने बाकायदा खंडन किया कि ऐसी बात नहीं है। अब उसी पुलिस ने अपने एक दरोगा को दोषी पाया यूपीआई ट्रांजेक्शन के लिए बंदी को जब्त मोबाइल सौंपने का।
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बिहार पुलिस के कुछ अधिकारी अपनी मन की बात नहीं मानने पर खंडन जारी करने में देरी करते, भले उनका ही अनुसंधान पूरा न हुआ हो। 'अमर उजाला' ने बीते शनिवार अस्त मार्च को एक खबर प्रकाशित कर बताया था कि 'हत्यारोपी के जब्त मोबाइल से हो गया एक लाख का UPI ट्रांजेक्शन, अब पुलिस ने कह रही यह बात ' में बंद एक कैदी के जब्त मोबाइल से 1 लाख राशि उसके पिता के खाते में यूपीआई ट्रांसफर हुई है। हर मीडिया में एसडीपीओ गोगरी का बयान आया कि किसी ने मोबाइल हैक कर लिया होगा। लेकिन, खबर प्रमुखता से 'अमर उजाला' में खबर लगी थी तो खगड़िया पुलिस ने बाकायदा हमारा नाम लिखकर खंडन जारी किया। अब खगड़िया एसपी ने जांच में अपने एक दरोगा को दोषी पाया है। साबित हुआ है कि उसने थानाध्यक्ष के पास जब्त रखा मोबाइल बंदी को दिया था और उसी से यह यूपीआई ट्रांजेक्शन हुआ था। दरअसल महेशखूंट पुलिस ने पैक्स अध्यक्ष वरुण कुमार सिंह के हत्या के मामले में एक आरोपी को 2 जनवरी आधी रात को पकड़ा था। जिसका मोबाइल पुलिस ने जप्त किया था। लेकिन पुलिस के पास जप्त मोबाइल से 1 लाख रुपये का यूपीआई ट्रांजेक्शन हो गया। जिसको लेकर मृतक की पत्नी ने पुलिस के वरीय अधिकारी को आवेदन देकर मामले में शिकायत की थी। अब इस मामले में एसपी राकेश कुमार के द्वारा महेशखूंट थाना के पुलिस अवर निरीक्षक देवेन्द्र कुमार को निलंबित कर दिया है।
जांच में पुलिस कर्मी ही मिला दोषी
बता दें कि आरोपी नीरज कुमार और उसके पिता को पुलिस ने 2 जनवरी की आधी रात गिरफ्तार कर लिया था। जिसके बाद नीरज को पुलिस ने जेल भेज दिया। वहीं उसके पिता जयप्रकाश चौरसिया को छोड़ दिया गया। इसके बाद अगले दिन 4 जनवरी को जेल भेजे गए नीरज के जप्त मोबाइल से उसके पिता के खाते में एक लाख का यूपीआई ट्रांजेक्शन किया गया। पुलिस ने अपने जांच में कहा है कि निलंबित पुलिस अवर निरीक्षक देवेन्द्र कुमार के द्वारा ही जप्त मोबाइल को सलाखों में बंद हत्या आरोपी को दिया गया था। जिससे ट्रांजेक्शन की गई। पुलिस ने बैंक खाता के ट्रांजेक्शन विवरण में पाया कि नीरज के खाता से उसके पिता को राशि भेजे गए। जो बाद में उसकी पत्नी के खाते में भेज दिया गया।
अपने ही बयान से मुकरे एसडीपीओ
इस मामलें में गोगरी एसडीपीओ रमेश कुमार ने सभी मीडिया को यह बयान दिया कि उक्त राशि आरोपी के खाता से हैकर द्वारा निकाला गया है। 'अमर उजाला' ने जब इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो खगड़िया पुलिस ने बकायदा प्रेस रिलीज जारी कर 'अमर उजाला' के खबर का खंडन कर दिया। लेकिन जब उसकी जांच हुई तो 'अमर उजाला' की खबर पर मुहर लग गई।
थानाध्यक्ष पर कार्रवाई क्यों नहीं
इस खबर के प्रकाशन के बाद गोगरी एसडीपीओ रमेश कुमार इस तरह बैखलाहट में आ गए कि उन्होंने खबर प्रकाश के तुरंत बाद 'अमर उजाला' को फोन कर अपने दिये बयान का सबूत मांगने लगे। उन्होंने अभ्रदता करते हुए 'अमर उजाला' को फालतू प्रत्रकारिता का तगमा दे दिया। लेकिन पुलिस अफसर यह भूल गए कि 'अमर उजाला' अपनी जिम्मेवारी का निर्वाहण करता है। जिसे हमेशा जारी रखा जाएगा। हम फिर कहते हैं कि इस मामले में जितना आरोपी निलंबित एएसआई हैं उतना ही महेशखूंट थाना के थानाध्यक्ष भी हैं। फिर कार्रवाई उनपर क्यों नहीं?