East Champaran : पूर्वी चंपारण में सत्ता का संग्राम; चाय पर चर्चा में विकास, रोजगार समेत इन मुद्दों पर बात
Satta Ka Sangram: अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ आज बिहार के पूर्वी चंपारण लोकसभा क्षेत्र में पहुंचा। जहां सुबह चाय पर चर्चा में आम मतदाताओं ने अपनी बात रखी। इसके बाद दोपहर में युवाओं के मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। वहीं, शाम को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से सवाल-जवाब किए जाएंगे।
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विस्तार
15 अप्रैल 1917 को महात्मा गांधी ने चंपारण में कदम रखा था। 12 जून यही रहे। किसानों से मिले। अंग्रेजों के खिलाफ आवाज बुलंद किया और सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत की। नील की खेती करने वाले किसानों के शोषण के खिलाफ शुरु हुआ यह आंदोलन पूरे देश में फैल गया। इस आंदोलन ने अंग्रेजों की जड़ें हिला दीं। इस आंदोलन का नाम पड़ा चंपारण सत्याग्रह। तब से चंपारण को देश ही नहीं दुनिया में भी लोग जानने लगे। अब बात करते हुए लोकसभा चुनाव की। पूर्वी चंपारण लोकसभा सीट पर आजादी के बाद कांग्रेस का वर्चस्व रहा। इमरजेंसी के बाद गणित बदला। पहली जनता पार्टी से ठाकुर रामापति सिंह चुनाव जीते। इसके बाद 1989 में भाजपा ने राधामोहन सिंह को टिकट दिया। वह जीत गए। इसके बाद 1996, 1999 2014, 2019 में राधामोहन सिंह जीत चुके हैं। राजद के टिकट पर रमा देवी ने 1998 में चुनाव जीता था। इस बाद चुनावी मैदान में महागठबंधन की ओर से वीआईपी के उम्मीदवार राजेश कुशवाहा मैदान में हैं।
वोटरों से उनके मन की बात पूछी जा रही
इस समय 'अमर उजाला' का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' भी बिहार में है और अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में लोगों से बातचीत करने के लिए पहुंच चुका है। शहर हरी जी की दुकान चाय पर चर्चा के बहाने वोटरों से उनके मन की बात पूछी गई। चाय की चुस्की के साथ पूर्वी चंपारण लोकसभा सीट के मतदाताओं ने शहर के विकास, जाम, जलजमाव और रोजगार समेत कई मुद्दों पर बात की।