Waqf Amendment Bill : वक्फ संशोधन के नाम पर जदयू से इस्तीफा देने वाले कासिम अंसारी कौन? जानिए, कद और पद
Bihar News : बिहार में सत्तारूढ़ जदयू ने वक्फ संशोधन का संसद में समर्थन किया तो तेजी से यह खबर वायरल हुई कि पार्टी के एक सीनियर नेता ने इस्तीफा दे दिया। पढ़िए, कौन हैं कासिम अंसारी? कब से जदयू में क्या बने हैं? चुनाव में उतरे तो कहां टिके थे?
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वक्फ संसोधन विधेयक पर बिहार में सत्तारूढ़ जनता दल यूनाईटेड के एक नेता कासिम अंसारी ने इस्तीफा दे दिया। कासिम अंसारी ने इस्तीफा पत्र में खुद को जदयू के पूर्वी चंपारण जिला चिकित्सा प्रकोष्ठ का प्रवक्ता बताया है, जबकि खबर एक विधायक के इस्तीफे तक की वायरल हो गई। इस्तीफा पत्र जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री को लिखे जाने के कारण ज्यादा चर्चा में आया। कासिम अंसारी ने खुद को जिस विधानसभा का पूर्व प्रत्याशी बताया है, वह वहां से पिछले चुनाव में निर्दलीय उतरे थे। ढाका विधानसभा सीट के 321111 मतदाताओं में से कुल 499 वोटरों ने इन्हें मत दिया था। यहां से भारतीय जनता पार्टी के पवन कुमार जायसवाल चुनाव जीते थे, जिन्हें 99792 वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर राजद के फैसल रहमान रहे थे, जिन्हें 89678 वोट मिले थे।
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न डॉक्टरी चली न राजनीति
डॉ कासिम अंसारी ने BAMS की डिग्री हासिल कर शुरुआत में मोतिहारी के जानपुल चौक पर क्लीनिक खोल कर इलाज करना शुरू किया लेकिन वहां इनका क्लीनिक चल नहीं पाया। फिर इन्होंने मुस्लिम बहुल क्षेत्र ढाका को अपना कार्य क्षेत्र बनाया और जनता हॉस्पिटल के नाम से ढाका के आजाद चौक पर अपना क्लीनिक खोला। किस्मत ने यहां भी साथ नहीं दिया। तब इन्होंने नया पैंतरा अपनाते हुए राजनीति में पहचान बनानी शुरू दी ताकि क्षेत्र के लोग इनको पहचान सके। इस दौरान उन्होंने AIMIM की पार्टी में जुड़ कर ढाका विधानसभा से विधायक प्रत्याशी के तौर पर प्रचार करना शुरू किया, लेकिन इस पार्टी ने इनको टिकट नहीं दिया। तब इन्होने आम आदमी पार्टी में अपना दिमाग लगाया लेकिन बात वहां भी नहीं बनी। तब डॉ कासिम अंसारी मजबूर होकर निर्दलीय चुनाव लड़ गए, और अंजाम के रूप में मुस्लिम बहुल क्षेत्र में होने के बाद भी जमानत जब्त हो गया। इनको केवल 497 वोट ही प्राप्त हुआ।
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जदयू में हैं ही नहीं तो इस्तीफा किस बात का
इस संबंध में जदयू के ढाका प्रखंड अध्यक्ष नेहाल अख्तर ने बताया कि डॉ कासिम अंसारी हमारे पार्टी में है ही नहीं तो फिर इनके इस्तीफे का सवाल कहाँ बनता है। उन्होंने कहा कि यह शख्स झूठ बोलकर केवल सुर्खियां बटोरना चाहता है। इस संबंध में जदयू जिलाध्यक्षा मंजू देवी ने भी वही बात कही। उन्होंने बताया कि यह शख्स जदयू में है ही नहीं, और अगर रहता तो उसे यह समझ होना चाहिए कि वह अपना इस्तीफा कहां दे। मुझे अब तक उसके इस्तीफा की कोइ खबर या पत्र नहीं प्राप्त हुआ है। इतना ही नहीं डॉ कसीम अंसारी ने सिर्फ अपना चेहरा चमकाने के लिए केवल सोशल मीडिया पर पत्र लिखा है, किसी ऑफिस में इनका कोई पत्र नहीं है।
आगे-पीछे कर बन गये थे जिला चिकित्सकीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष
जदयू के कार्यकर्ताओं का भी कहना है कि चुनाव में जमानत जब्त होने के बाद वह शख्स जदयू में शामिल हुआ था, यह बात बहुत पुरानी हो चुकी है। उसने जेडीयू जिलाध्यक्ष के आगे पीछे कर के जिला चिकित्सकीय प्रकोष्ठ का अध्यक्ष बना, लेकिन फिर कुछ दिनों के बाद इसे हटा दिया गया था। अभी कुछ दिन पहले कन्हैया कुमार के यात्रा के पूर्व कांग्रेस के प्रखंड अध्यक्ष इम्तियाज अख्तर के साथ खड़ा दिख रहा है। अब सवाल यह भी है कि अगर वह कासिम अंसारी खुद अपने आप को जदयू में होने का दावा कर रहे हैं तो फिर कांग्रेस की टीम में खड़े होकर यह क्या कर रहे हैं।
इस वजह से लिया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम
जदयू के जिला अध्यक्ष और प्रखंड अध्यक्ष का कहना है कि कासिम अंसारी खुद को प्रचारित करने के लिए इस्तीफा देने का नाटक कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर वह जनता दल यूनाइटेड में होते तो इनका इस्तीफा जिलाअध्यक्ष के समीप होना चाहिए था, न कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास। उन्होंने यह भी कहा कि कासिम अंसारी को लोग जान सकें इसलिए जान बूझकर अपने पत्र में मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष का नाम शामिल किया है ताकि वह अपना चेहरा चमका सकें। सौ बात की एक बात कासिम अंसारी जदयू में हैं ही नहीं।
जानिये त्यागपत्र में क्या लिखा?
निवदेन पूर्वक कहना है कि हम जैसे लाखों करोड़ों भारतीय मुसलमानो का अटूट विश्वास था कि आप विशुद्ध रूप से सेक्यूलर विचारधारा के ध्वजवाहक हैं, लेकिन अब यह यकीन टूट गया है। वक्फ बिल संसोधन अधिनियम 2024 के ताल्लुक से जदयू के स्टैण्ड से हम जैसे लाखों करोड़ों समर्पित भारतीय मुसलमानों एवं कार्यकर्ताओं को गहरा आघात लगा है। हम लोग लोकसभा में ललन सिंह ने जिस तेवर और अंदाज से अपना वकतव्य दिया और इस बिल का समर्थन किया, उससे काफी मर्माहत हैं। वक्फ बिल हम भारतीय मुसलमानों के विरूद्ध है। हम किसी भी सूरत में इसे स्वीकार नही कर सकते। यह बिल संविधान की कई मौलिक अधिकारों का हनन करता है। इस बिल के माध्यम से भारतीय मुसलमानों को जलील व रूसवा किया जा रहा है। साथ ही साथ यह बिल पसमांदा विरोधी भी है। जिसका एहसास न आपको है और न आपकी पार्टी को है। मुझे अफसोस हो रहा है कि अपनी जिंदगी के कई वर्ष पार्टी को दिया। अतः मै पार्टी के प्राथमिक सदस्य एवं अन्य जिम्मेदारियों से स्वेच्छा से त्याग पत्र दे रहा हूँ।