Bihar News : पिता को मुखाग्नि देने लंदन से आई बेटी बोली- जब तक नीतीश कुमार को हराएंगे नहीं, मास्क नहीं हटाएंगे
Nitish Kumar : विपक्षी एकता के जरिए देश की नरेंद्र मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने की योजना बना रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी के पूर्व एमएलसी की बेटी पुष्पम प्रिया चौधरी ने लंदन से आने के बाद पिता को मुखाग्नि देकर यह बातें कही।
विस्तार
दरभंगा जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर विशनपुर गांव निवासी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाने वाले पूर्व एमएलसी विनोद कुमार चौधरी का दरभंगा के बलभद्रपुर में निधन हो गया। वह जदयू के एमएलसी के रूप में जितने चर्चित थे, उससे ज्यादा अपनी बेटी पुष्पम प्रिया चौधरी के अचानक सीएम प्रत्याशी स्वघोषणा से सुर्खियों में आ गए थे। पुष्पम प्रिया ने अपने पिता को मुखाग्नि देने के बाद कहा कि कल मेरे पिताजी का निधन हो गया। वह अब हमारे बीच में नहीं हैं, लेकिन मैं जब तक मैं जिंदा हूं मैं अपने कार्यों से उन्हें जीवित रखने की पूरी कोशिश करूंगी। उन्होंने कहा कि मैंने उन्हें मुखाग्नि दी है। साथ में मेरी बहन भी थी। हम दो बेटियां हैं उनकी। हमारे घर में जितने भी हमारे चाचा हैं, उनके भतीजे हैं। सब हमारे साथ हैं। मेरे पिताजी बहुत अच्छे इंसान थे। बहुत आसानी से वह लोगों को माफ कर देते थे। खुश रहना चाहते थे। मैं उतनी अच्छी नहीं हूं, लेकिन बहुत सारी चीजों में मैं पिताजी की तरह बनना चाहती हूं। शायद बन नहीं पाऊं।
उनका तरीका अलग था, मेरा तरीका अलग
पुष्पम प्रिया ने कहा कि इतना अच्छा इंसान मैं शायद कभी बन ना पाऊं। आज जो कुछ भी हमारे साथ हुआ है, पता नहीं उससे उबर पाएंगे या नहीं। लेकिन, यह प्रण अब और भी गहरा हो गया है। मेरे पिताजी भी चाहते थे कि बिहार बदले, तरक्की हो, मैं भी वही चाहती हूं। उनका तरीका अलग था, मेरा तरीका अलग। एक चीज जो उन्होंने हमेशा किया, वह यह कि उन्होंने मेरी बहुत इज्जत की बचपन से ही। यही एक कारण था कि उनके सबसे चहेते नीतीश कुमार जी के तरीकों से जब मैं सहमत नहीं थी तो उन्होंने मेरा प्रतिकार नहीं किया। सभी जानते हैं कि मेरे पिताजी के बहुत चहेते हैं नीतीश कुमार। पुष्पम प्रिया ने कहा कि मेरे पिता ने मेरी उस सोच के बावजूद मेरी इज्जत की। मैंने जो भी निर्णय लिया मेरे पिता ने मेरा विरोध नहीं किया। हम जिस दिन जीतेंगे, उन्हें (सीएम नीतीश कुमार को) हटाएंगे।
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जीतने की जरूरत है
पुष्पम प्रिया ने कहा कि बिहार की बदहाली से जीतने की जरूरत है। पता नहीं लोगों को हक समझ में आता है या नहीं। लेकिन, एक आदत जरूर हो गई है। उन्होंने कहा कि लोगों को शायद मेरी भाषा समझ में नहीं आती, क्योंकि आदत हो गई है। मुझे नजर आती, वह संभावना कि हम कितना बेहतर हो सकते हैं। हम कितना आगे जा सकते हैं। शायद यही कारण है कि मैं यहां हूं। नहीं तो फिर यहां होने का कोई कारण ही नहीं है। कोई जो एक बार यहां से निकल जाता है, वह वापस नहीं आता। तो उसी से जीतना है। पुष्पम प्रिया ने कहा कि कोई बाहर से आकर नहीं जीतेगा, सबको मिलकर जीतना पड़ेगा। अपने बिहार में, कौन बिहार के हैं, कौन नहीं हैं... यह तो खुद ही समझना पड़ेगा। पुष्पम ने कहा कि हमारे बहुत सारे कार्यकर्ता हैं, जिनसे हमने वादा किया था कि जबतक जीत नहीं जाएंगे, तब तक मास्क नहीं हटाएंगे। हम आज भी उस बात पर कायम हैं। इसलिए, आज मुखाग्नि के समय भी मेरे चेहरे पर मास्क है। यह प्रण और मजबूत है अब।
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