Bihar News : कल ही धमाका तो नहीं कर देंगे जीतन राम मांझी; नीतीश कुमार सरकार में बेटे का पद घटाया तो किसने?
Bihar Minister : केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी दिल्ली चुनाव में सीटों की मांग करते-करते अब अपने बिहार के आगामी विधानसभा चुनाव में ज्यादा भागीदारी पर ध्यान दे रहे हैं। वह कल पटना में दलित समागम कर रहे। ऐसे में बेटे संतोष सुमन के विभागों में कटौती!
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नए साल में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद विभागों का बंटवारा हुआ तो हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा- सेक्युलर के इकलौते मंत्री संतोष कुमार सुमन के तीन में से दो अहम विभाग लेकर दूसरे मंत्रियों को दे दिए गए। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में मांझी परिवार अपनी पार्टी की ओर से 28 फरवरी को 'दलित समागम' के रूप में शक्ति प्रदर्शन करने वाला है। तो, क्या इस समागम के मंच से मांझी का गुस्सा फूटेगा? वह बेटे के विभागों में कटौती पर क्या कहेंगे और किसे दोषी बताएंगे, इसपर सभी की नजर रहेगी। सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ-साथ विपक्षी महागठबंधन की भी।
जदयू के मंत्रियों के विभाग अछूते; सवाल- संतोष की कटौती क्यों?
बिहार की नीतीश कुमार सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार हुआ तो बात यह भी आई कि भारतीय जनता पार्टी ने घटक दलों की एक नहीं सुनी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड को भी महत्व नहीं दिया। यह बातें अंदर की भी थी या सिर्फ अफवाह- कोई पक्का नहीं कर सकता। लेकिन, आज जब मंत्रिमंडल के नए मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा हुआ तो केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा- सेक्युलर के साथ 'खेला' हो गया- यह साफ लगता है। सीएम नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के किसी मंत्री के विभाग नहीं घटे। भाजपा के ही सातों मंत्री बने तो उसके पुराने मंत्रियों के विभागों से कटौती स्वाभाविक थी। लेकिन, जीतन राम मांझी की पार्टी के इकलौते मंत्री के तीन में से दो विभागों की कटौती क्यों? क्या राजग के अंदर किसी को मांझी के रूठने का कोई डर नहीं?
परिस्थिति बदलने से भी चुप नहीं रह रहे मांझी, पटना में बोले तो क्या होगा?
28 जनवरी 2024 को जब जनादेश 2020 की वापसी कराते हुए राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन बनी तो मांझी ने कथित तौर पर दबाव बनाकर बेटे संतोष कुमार सुमन के लिए अहम विभाग लिए थे। तब वह खुद केंद्रीय मंत्री नहीं थे। विधायक ही थे। संतोष सुमन ने हालांकि तब भी कहा था कि मंत्रियों के विभाग का आवंटन किसी दबाव में नहीं किया गया है, यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है। अब मंत्रिमंडल विस्तार के बाद जब उनके दो विभागों की कटौती हुई है तो वह इसपर आज चुप्पी साधे हुए हैं। 'अमर उजाला' ने उनसे कई बार इस बारे में बात करने की कोशिश की, लेकिन बताया जा रहा है कि वह दलित समागम की तैयारी में व्यस्त हैं।
कल, यानी शुक्रवार को पटना के हृदय स्थली गांधी मैदान में यह कार्यक्रम है। इसमें केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी रहेंगे। मांझी बिहार विधानसभा चुनाव में 40 सीटों के लिए राजग पर दबाव बनाते रहे हैं, हालांकि वह अपनी ओर से 20 को लेकर अडिग हैं। दलित समागम भी उसी दबाव का एक हिस्सा है। वह मुखर होकर यह तक कह चुके हैं कि अगर इज्जत नहीं मिलती है तो कुर्सी छोड़ने में भी समय नहीं लगाएंगे। ऐसे में शक्ति प्रदर्शन के एक दिन पहले बेटे के तीन में से दो विभागों के छीने जाने पर उनका गुस्सा दिखा तो वह चौंकाने वाली बात नहीं होगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि 28 जनवरी को जब बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में राजग की सरकार बनी थी तो मांझी ने चार विधायक और एक एमएलसी होने के नाम पर दो मंत्रीपद मांगे थे।