Bihar News : मुख्यमंत्री की घोषणा का ग्रामीणों ने किया विरोध, कहा- मरते दम तक नहीं होने देंगे यह
Bihar: सीएम नीतीश कुमार ने अपने प्रगति यात्रा के दौरान एक नया औद्योगिक क्षेत्र बनाने की घोषणा की थी। अब सीएम के इस घोषणा का लोग विरोध कर रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि हम अपनी उपजाऊ भूमि जिस पर हम फसल उगाते हैं, उसे मरते दम तक सरकार को नहीं देंगे।
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बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में बनने वाले नए औद्योगिक क्षेत्र का लगातार विरोध बढ़ता जा रहा है। यहां के किसान अब अपने क्षेत्र में फैक्ट्री नहीं चाहते हैं। इसको लेकर किसानों का कहना है कि यहां फैक्ट्री लगने से कई पीढ़ियों से उपजाई जा रही फसले बर्बाद हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि खेती की जमीन भी खत्म हो जाएगी। इसलिए अगर कोई जोर-जबरदस्ती करेंगे तो हमलोग अपनी जान दे देंगे लेकिन जमीन किसी भी सूरत में नहीं देंगे। ग्रामीणों ने कहा कि हम सब अपनी आंखों के सामने खेती वाली जमीन बर्बाद होने नहीं देंगे। बिहार की सरकार यहां की उपजाऊ और उर्वर जमीन छोड़ दें और किसी बंजर जगह में औद्योगिक क्षेत्र बसाए इसके विरोध में किसानों ने उस जमीन पर धरना प्रदर्शन भी शुरू कर दी है और इसके लिए सैकड़ो की संख्या में अब ग्रामीण सामने आ गए हैं।
प्रगति यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने की थी घोषणा
दअरसल अपने प्रगति यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिले के लिए एक अन्य और बड़े औद्योगिक क्षेत्र की सौगात दी थी, जिसमें तीन जिला के लोग को इसमें रोजगार और अन्य कार्य मिलने की संभावना है। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के पारु प्रखंड के चतुरपट्टी, भोजपट्टी एवं चैनपुर समेत तीन गांव के इसके लिए कुल 788 एकड़ जमीन पर नए इंडस्ट्रियल एरिया को बसाने के प्रस्ताव को पास किया था। इस दिशा में जिला प्रशासन ने काम में तेजी लाते हुए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यही नहीं जमीन की मापी भी कराए गए थे लेकिन अब यहां पर अंचल अधिकारी को ग्रामीणों का आक्रोश झेलना पड़ा रहा है। यहां के ग्रामीण औद्योगिक क्षेत्र बसाने का विरोध कर रहे हैं। वह कह रहे हैं कि हम इसको किसी भी सूरत में बनने नहीं देंगे
मामले को लेकर के एक स्थानीय किसान संजीव कुमार ने बताया कि हम लोग यहां अपनी खेती की उपजाऊ जमीन बचाने आए हैं। सरकार अगर फैक्ट्री लगाएगी तो हम और यहां के सैकड़ों लोग कहां जाएंगे। इससे तो हमारी पूर्व से चली आ रही खेती भी खत्म हो जाएगी। हम सब ग्रामीण पीढ़ी दर पीढ़ी से यहां पर अलग-अलग किस्म की फसलों को लगाने का काम करते हैं। फैक्ट्री के लगने से हमारी जमीन की उर्वरता खत्म हो जाएगी हम लोग यहां फैक्ट्री नहीं चाहते हैं। किसान मो अब्दुल समद ने बताया कि हम लोगो के यहां पर आलू, प्याज, लहसुन, गेहूं, मकई और धान उपजता हैं और यह प्रति वर्ष उगता है। इसे अगल बगल के जिलों में भी बेचा जाता है। उनका कहना है कि यह सरकार हम लोगों से मजाक कर रही है। हम ग्रामीण ने यह सामूहिक रूप से तय कर लिया है कि यहां किसी भी कीमत में औद्योगिक क्षेत्र नहीं बसने देंगे और अब इसे बचाने के लिए हम लोग अपनी जान दे देंगे।