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Bihar News: विज्ञान युग में भी लोग अंधविश्वास में जीने को मजबूर, कैमूर में लगता है भूतों का मेला

Tue, 24 Oct 2023 01:24 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कैमूर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कैमूर Published by: अरविंद कुमार Updated Tue, 24 Oct 2023 01:24 PM IST
सार

Bihar News: विज्ञान के युग में भी लोग अंधविश्वास में जी रहे हैं। बिहार के कैमूर जिले में अब भी शारदीय नवरात्र में भूतों का मेला लगा है। स्थानीय ग्रामीण बीमारियों के इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाने के बदले झाड़-फूंक में विश्वास करते हैं। हरसू ब्रह्म स्थान के पंडा और स्थानीय लोगों के अनुसार, यह स्थान भूत-पिचास का सुप्रीम कोर्ट है। यहां से सभी प्रकार के मानसिक रोगी ठीक होकर घर लौटते हैं।

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Bihar News Even in age of science people are forced to live in superstition ghost fair is held in Kaimur
कैमूर में लगता है भूतों का मेला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कैमूर के चैनपुर स्थित बाबा हरसू ब्रह्म स्थान में शारदीय नवरात्र में भूतों का मेला लगता है। यहां आने के बाद मरीज ठीक हो जाता है। पूरे नवरात्र में सुबह से शाम तक बाबा हरसू ब्रह्म मंदिर में मानसिक रोगियों का जमावड़ा लगता है। ऐसा नहीं है कि ये लोग शिक्षित नहीं होते, पढ़े लिखे नौकरी पेशा वाले भी अपने परिवार के ऊपर होने वाले परेशानी, निःसंतान, बीमारी से ग्रसित मरीज जो डॉक्टर से इलाज करवाकर थक गए, पर उनका बीमारी ठीक नहीं हुई। जब हरसू ब्रह्म दरबार पहुंचते हैं तो ठीक हो जाते हैं। ऐसा मंदिर आए पीड़ितों का कहना है। पूरे नवरात्र मंदिर परिसर में भूतों के खेलते रोते चीखते चिल्लाते देख सकते हैं।

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बता दें कि यह परंपरा कई साल से चलती आ रही है। हम आज चांद पर कदम रख चुके हैं पर आज लोग डॉक्टर से इलाज कराने के बदले झाड़ फूंक पर विश्वास करते हैं। ऐसा भी नहीं कि सभी अशिक्षित हैं, कई लोग ऐसे हैं जो खुद डॉक्टर हैं पर आज भी बाबा के दरबार की श्रद्धा मानते हैं।
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बनारस के डॉ बीके दुबे और उनकी पत्नी बंदना दुबे बताते हैं कि उनके घर वंश नहीं चल रहा था। जन्म के बाद मृत्यु हो जाती थी पर उनकी मां जब से बाबा हरसू ब्रह्म स्थान आना शुरू की तो उनका वंश चलने लगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील निखिल मिश्रा का कहना है, मेरी तबियत खराब रहती  थी। कोरोना जैसे महामारी को मैंने खुद पूरे संसार में लाया हो ऐसा महसूस होता था। साथ ही मुझे सिर्फ देवियां नजर आती थीं। पर जब मैं हरसू ब्रह्म स्थान आया, तब से सब ठीक है।

वहीं, साबित मिश्रा जो यूपी के मिर्जापुर से पूरे परिवार के साथ आईं। उनका कहना है कि जब से मैं यहां आ रही हूं, तब से पूरा परिवार ठीक है। राबड्स गंज के ममता पांडेय का कहना है कि मेरे पति पर किसी ने काला साया डाल दिया था। कई डॉक्टर से दिखाया पर मेरे पति ठीक नहीं हुए, जब से यहां आना शुरू किया सब ठीक है।

Bihar News Even in age of science people are forced to live in superstition ghost fair is held in Kaimur
मेले में मौजूद लोग - फोटो : अमर उजाला

बाबा हरसू ब्रह्म की कहानी
मंदिर के संयोजक राज कुशोर चैनपुरी बाबा के अनुसार, ऐसी मान्यता है कि दो राक्षस उत्कल और ब्रजदन्त दोनों ने कभी आतंक मचाया था। सभी देवता परेशान होकर भगवान शंकर की तपस्या करने लगे। तब शंकर ने उत्कल को त्रिशूल से बध कर दिया तो ब्रजदन्त ने महिला रूप धारण कर लिया। शंकर ने उसे कलयुग में मिलने का श्राप दिया। वहीं, शंकर के रूप में हरसू बाबा ने अवतरित हुए और ब्रजदन्त राक्षस के रूप में राजा शालिवाहन की पत्नी माणिक मति अवतरित हुईं।

बाबा हरसू राजा शालिवाहन के राजपुरोहित थे। राजा अपने सभी शुभ कार्यों को हरसू बाबा के आदेश से कराते थे। पूर्व के श्राप के कारण राजा का वंश नहीं आगे बढ़ा तो राजा ने अपने पुरोहित हरसू बाबा से पूछा कि मेरा वंश कैसे चलेगा तो उन्होंने दूसरी शादी करने का सलाह दी। छतीसगढ़ के राजा भूदेव सिंह की पुत्री ज्ञान कुंवरी से शादी हो गई, जिससे दुखी होकर राजा के पहली रानी ने हरसू बाबा को प्रताड़ित कराने लगी। उनके महल को भी ध्वस्त करा दिया, जिससे दुखी होकर हरसू बाबा ने राजा के महल में 21 दिन बिना अन्य जल के पड़े रहे।

उसके बाद उन्होंने अपना प्राण त्याग दिया। इसकी सूचना जैसे ही माता हंस रानी को मिली तो हाथ में दीपक हरसू बाबा के नाम पर तप करते जल कर भस्म हो गई। उसके बाद राजा शालिवाहन का विनास हो गया। तब से हरसू ब्रह्म पूजने लगे, आज देश-विदेश से भी लोग आते हैं और अपनी समस्या का निदान करवाते हैं। भूत पिचास का सुप्रीम कोर्ट माना जाता है।

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