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Bihar Police : एसके सिंघल का एक और कारनामा, डीजीपी रहते इंस्पेक्टर को जबरिया रिटायर किया था; आदेश अवैध घोषित

Wed, 03 Apr 2024 01:35 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण Updated Wed, 03 Apr 2024 01:35 PM IST
सार

Bihar News : सिपाही भर्ती की रद्द हुई परीक्षा में धांधली की जांच के दायरे में आए पूर्व डीजीपी एसके सिंघल का एक और कारनामा सामने आया है। पटना हाईकोर्ट ने उनकी दुर्भावना को चिह्नित करते हुए जबरिया रिटायर किए गए इंस्पेक्टर की सेवा वापसी का आदेश दिया है।

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Bihar News : Bihar Police Inspector forced retirement order by sk singhal revived by patna high court order
डीजीपी से रिटायर होने के बाद सरकार ने एसके सिंघल को बनाया था सिपाही भर्ती बोर्ड का अध्यक्ष। - फोटो : अमर उजाला डिजिटल।

विस्तार

फर्जी न्यायाधीश के कॉल पर मातहत आईपीएस अधिकारी आदित्य कुमार (अब निलंबित और जेल में बंद) को शराब के केस में क्लिन चिट देने के कारण सुर्खियों में रहे बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक संजीव कुमार सिंघल फिर चर्चा में हैं। केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) के अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल में हुई सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान बड़ी हेरफेर को देखते हुए वह आर्थिक अपराध अनुसंधान (ईओयू) की जांच के दायरे में हैं। लेकिन, इस बार खबर हाईकोर्ट से निकली है। उन्होंने बिहार पुलिस के इंस्पेक्टर के जबरिया रिटायरमेंट का आदेश जारी किया था। साजिश के तहत दिए आदेश में उनकी दुर्भावना को चिह्नित करते हुए हाईकोर्ट ने इस आदेश की वापसी का निर्देश बिहार पुलिस मुख्यालय और राज्य सरकार को दिया है।

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इंस्पेक्टर ने लड़ी लड़ाई, अब मिला न्याय
बेगूसराय के बखरी निवासी अविनाश चंद्र की ओर से दायर अपील पर पटना हाईकोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद आदेश जारी किया। जस्टिस मोहित कुमार शाह की अदालत में 22 मार्च 2024 को इस केस की सुनवाई के बाद मौखिक आदेश जारी किया था। अब लिखित रूप में पटना हाईकोर्ट ने आदेश जारी किया है। लिखित आदेश में इस पूरी प्रक्रिया के दौरान हुई गड़बड़ी का उल्लेख किया गया है। अविनाश ने बिहार सरकार, बिहार के पुलिस महानिदेशक, तिरहुत रेंज मुजफ्फरपुर के आईजी, एडीजी पुलिस (बजट एवं अपील), आईजी पुलिस (उत्पाद एवं मद्य निषेध), मुजफ्फरपुर और इस केस के जांच अधिकारी रहे सीतामढ़ी के एसपी को प्रतिवादी बनाया था।
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क्या था मामला, कैसे हुई मनमानी
इंस्पेक्टर अविनाश चंद्र मुजफ्फरपुर के मीनापुर में पदस्थापित थे। शराब के केस में एक आरोपित के नहीं पकड़े जाने के आरोप में अंतिम तौर पर अविनाश को तत्कालीन पुलिस महानिदेशक एसके सिंघल के आदेश पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी। पहले, अविनाश को 26 नवंबर 2020 को इस आरोप में निलंबित किया गया कि वह शराब के केस में एक आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सके। वह आरोपी बाद में दूसरे थानेदार के हाथों गिरफ्तार हुआ और उसे जमानत भी मिल गई। लेकिन, इधर 4 दिसंबर 2020 से अविनाश के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई। पुलिस उपाधीक्षक ने जांच की। इस जांच की रिपोर्ट में अविनाश पर लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए, जिसके बाद पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर सीतामढ़ी के तत्कालीन एसपी ने इस केस की जांच की और 3 सितंबर 2021 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में अविनाश को दोषी करार दिया। इस रिपोर्ट को आधार बनाते हुए पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर तिरहुत रेंज मुजफ्फरपुर के आईजी ने 16 सितंबर 2021 को अविनाश को दूसरी बार कारण बताओ नोटिस जारी किया। इसके 29 दिन बाद ही, 7 दिसंबर 2021 को अविनाश की एक साल तक वेतनवृद्धि रोकने का आदेश जारी किया। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में जिक्र किया है कि वादी ने इस आदेश के खिलाफ अपील की, जिसपर आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई। दूसरी तरफ, तत्कालीन पुलिस महानिदेशक ने 8 सितंबर 2022 को अविनाश चंद्र की अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश जारी कर दिया।
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तत्कालीन डीजीपी का आदेश दुर्भावनापूर्ण
पटना हाईकोर्ट ने लंबी सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और अंततः यह माना कि पहली जांच रिपोर्ट के बाद से ही अविनाश चंद्र को दोषी साबित कर उन्हें नौकरी से हटाने की प्रक्रिया के दौरान दुर्भावनापूर्ण रवैया अपनाया गया। पटना हाईकोर्ट ने कहा कि आईजी के आदेश के छह महीने के दरम्यान पुलिस महानिदेशक उसकी समीक्षा कर आदेश जारी कर सकते थे, लेकिन उसकी जगह बिना किसी आधार या कारण बताए हुए उस अवधि के बाद अचानक अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई। यह प्रक्रिया नियम के तहत नहीं है। तत्कालीन डीजीपी के आदेश को अवैध करार देते हुए पटना हाईकोर्ट ने पुलिस मुख्यालय और राज्य सरकार को आदेश दिया है कि अविनाश चंद्र को सेवा में फिर से बहाल किया जाए और जब से उन्हें हटाया गया है, तब से अब तक का सारा बकाया उन्हें दिया जाए।


आगे क्या विकल्प है राज्य सरकार के पास
पटना हाईकोर्ट ने तत्कालीन पुलिस महानिदेशक के आदेश को अवैध बताते हुए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के पुराने निर्णय का भी जिक्र किया है और बताया है कि इस तरह से प्रक्रिया नहीं की जा सकती है। विधि विशेषज्ञों के अनुसार सरकार 30 दिनों के अंदर इस आदेश की समीक्षा के लिए अपील दायर कर सकती है, लेकिन चूंकि इस केस में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के ही कई आदेशों का हवाला दिया गया है इसलिए ऐसी अपील की संभावना कम है। दूसरी ओर, अविनाश चंद्र हाईकोर्ट के इस आदेश की सत्यापित प्रति के साथ राज्य पुलिस मुख्यालय को अपनी सेवा वापसी और बकाया रकम भुगतान के लिए आवेदन दे सकते हैं। इस आवेदन पर विचार नहीं करने पर एक अवधि के बाद अवमानना का केस दर्ज हो सकता है।

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