Bihar: नीतीश सरकार ने बिहारवासियों को नए साल पर दी बड़ी सौगात, बढ़ाई भूमि सर्वे की डेडलाइन
Bihar News : बिहार भूमि सर्वे को लेकर कई तरह की बातें आती रहती हैं। साल के अंत में सरकार ने उन बातों को काफी हद तक स्पष्ट करते हुए बदले प्रावधानों की जानकारी दी। बिहार सरकार ने बिहार भूमि सर्वे को पूरा करने की समय सीमा जुलाई 2026 तक कर दी है।
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बिहार में जमीन का सर्वे करवा रहे लोगों को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नये वर्ष के मौके पर बिहारवासियों को एक बड़ी सौगात दी है। जमीन मालिकों को अपनी जमीन की सर्वे करवाने के लिए विशेष सहूलियत देने की घोषणा की है। इधर, समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार जमीन सर्वे की प्रक्रिया जुलाई 2025 की जगह अब जुलाई 2026 में पूरी की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर जमीन मालिकों को परेशानी नहीं हो।
जानिए पहले क्या थे नियम और अब सरकार ने क्या किया है
पहले जमीन का सर्वे करने के लिए अधिसूचना की तिथि से 30 कार्य दिवस दिए जाते थे, लेकिन अब संबंधित जिले में हुई उद्घोषणा की तिथि से 180 दिन के अंदर जमा कर सकते हैं। यह दिन कार्य दिवस या, किस्तवार के काम की समाप्ति से पहले भी पहले हो। किस्तवार का काम गांवों का मानचित्र बनाया है जिसके लिए पहले 30 दिनों का कार्य दिवस मिलता था जिसे बढाकर 90 कार्य दिवस कर दिया गया है। खानापूरी पर्चा वितरण के बाद दावा या आपत्ति देने का समय पहले 15 कार्य दिवस हुआ करता था, जिसे बढाकर अब इतना ही नहीं दावा या आपत्ति को पहले 30 दिन में पूरा कर लेना होता था, जिसे बढाकर अब 60 दिन कर दिया गया है।
ऐसे आपके मोबाइल पर मिलेगी सूचनाएं
राज्य के सभी 4.34 करोड़ जमाबंदियों में किसी भी तरह के बदलाव / नामांतरण से संबन्धित सूचना SMS अलर्ट सेवा के तहत दी जा रही है।
आम रैयतों को इस सेवा का लाभ उठाने के लिए सर्वप्रथम संबंधित जमाबंदी के प्लॉट पर बदलाव / नामांतरण से संबंधित सूचना प्राप्त करने के लिए पंजीकृत करना होगा। वर्तमान में इस सेवा के तहत दाखिल-खारिज तथा परिमार्जन के माध्यम से किए गए बदलाव / नामांतरण की प्रक्रिया प्रारम्भ होने तथा प्रक्रिया पूर्ण होने से संबंधित सूचना पंजीकृत रैयत को दी जाएगी। भविष्य में इस सेवा के तहत एलपीसी, लगान, राजस्व न्यायालय में दायर वाद से संबंधित सूचना भी दी जाएगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने बताया कि आम जनता के हित के लिए विभाग ने रोजगार सृजन करने के साथ-साथ कुछ महत्वपूर्ण कदम भी उठाए हैं।
• भूमि विवादों को खत्म करने के लिए भूमि सर्वेक्षण के लिए 9,888 कर्मियों का चयन किया गया, जिन्हें 3 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नियोजन पत्र दिया। चयनित कर्मियों में विशेष सर्वेक्षण अमीन-8,035, विशेष सर्वेक्षण कानूनगो -458, विशेष सर्वेक्षण सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी - 353 और विशेष सर्वेक्षण लिपिक-742 शामिल हैं। पूर्व से कार्यरत सर्वे कर्मियों को मिलाकर इनकी संख्या लगभग 14 हजार है।
• भूमि सर्वेक्षण में कैथी लिपि में लिखे पुराने खतियानों के कारण आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए विभागीय मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने 5 दिसंबर को कैथी लिपि पाठ्य पुस्तिका का विमोचन किया। यह पुस्तिका विभाग की वेबसाइट https://land.bihar.gov.in पर डाउनलोड किया जा सकता है।
• पुराने राजस्व दस्तावेजों तथा खतियानों को हिंदी भाषा में आसानी से रूपांतरित करने के लिए विभाग ने AI Tool/Large Language Model विकसित करने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट आमंत्रित किया गया है।
• राजस्व नक्शों तथा अन्य विभागीय ऑनलाइन सुविधाएं जनता तक सुचारु रूप से पहुंचे, इसके लिए सोनपुर मेला, पटना पुस्तक मेला और सरस मेला में विभाग द्वारा स्टॉल लगाये गये। आम जनों की मांग पर इन स्टालों में कैथी लिपि पाठ्य पुस्तिका प्रिंट करा कर मामूली शुल्क पर उपलब्ध कराई गई।
• दिनांक 19 नवंबर से 14 दिसंबर तक चले सोनपुर मेले में कुल 5396 रैयत राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के स्टॉल पर राजस्व नक्शों के लिए पहुंचे। उनके द्वारा कुल 12681 नक्शों की खरीद की गई, जिससे निदेशालय को कुल 19,02,150.00 रुपयों की प्राप्ति हुई।
• गांधी मैदान में लगे पुस्तक मेले में कुल 1369 लोगों ने 3947 नक्शों की खरीद की।
• गांधी मैदान में लगे सरस मेला के दौरान कुल 3018 लोगों ने काउंटर पर आकर 8505 शीट्स यानि नक्शों की खरीद की और भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय को 12,75,750.00 रुपयों का भुगतान किया।
दाखिल खारिज के लिए रैयत विभाग के आधिकारिक पोर्टल biharbhumi.bihar.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के तहत आवेदन करने के लिए जमीन के दस्तावेज और अन्य जरूरी जानकारी ऑनलाइन जमा करनी होती है।
ऑनलाइन भूमि दाखिल खारिज की यह हैं विशेषताएं
1.आवेदन से लेकर निष्पादन तक की सभी प्रक्रियाएँ ऑनलाइन
2.स्वतः संज्ञान दाखिल-खारिज की सुविधा
3.निश्चित समय सीमा (बिना आपत्ति के मामलों में 35 दिन, आपत्ति वाले मामलों में 75 दिन)
4.ऑनलाइन आपत्ति दर्ज करने की सुविधा
5.डिजिटल सिग्नेचर प्रति प्राप्त करने की सुविधा
6.अपील और पुनरीक्षण का प्रावधान
7.चालित सूचना प्रबंधन
8. त्रुटि जांच