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Bihar : चुनाव के लिए तुरुप के पत्ते पर सुबहानी की दो टूक बता रही आनंद मोहन क्या करेंगे; नीतीश के साथ जाएंगे?

Tue, 10 Oct 2023 12:21 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Tue, 10 Oct 2023 12:21 PM IST
सार

Anand Mohan Singh : राजस्थान में चुनाव की घोषणा से पहले आनंद मोहन वहां राजपूतों को जुटाने वाली रैली कर रहे थे। फिर कांग्रेस नेता से मिले। इससे पहले सीएम नीतीश से मिलकर गए। बेटे ने भाजपाई केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की। तो, अब आगे क्या?

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Bihar News : After Bihar Caste Census, Anand Mohan Singh election alliance possible with nitish kumar or bjp
अगड़ी जाति का महत्व जहां मिलेगा, वहां जाएंगे- इस लाइन को कई बार बोल चुके हैं आनंद मोहन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की तारीखें घोषित हो गईं। इसके बाद अब बड़ा चुनाव लोकसभा का ही होगा। बिहार में इसी की तैयारी चल रही है। वन नेशन, वन इलेक्शन के हल्ले के कारण बिहार विधानसभा चुनाव की भी तैयारी साथ-साथ शुरू हो गई है। बिहार की जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट बाकी राज्यों में प्रभाव दिखा रही है तो बिहार के अंदर लोकसभा और विधानसभा चुनाव में इसके प्रभाव का अनुमान लगाया जा सकता है। फिलहाल जातीय जनगणना के आंकड़ों पर अविश्वास को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जहां आपत्तियों को समझने की बात कही थी, वहां मुख्य सचिव आमिर सुबहानी ने बीमारी से लौटने के बाद दो टूक कह दिया कि इसकी समीक्षा की जरूरत नहीं है। तो, अब यह मान लेना मजबूरी ही है कि आंकड़ा नहीं बदलेगा। तो, क्या इस दो टूक के बाद बाहुबली आनंद मोहन सिंह अब कोई निर्णय लेंगे? आनंद मोहन फिलहाल राजस्थान में राजपूत करणी सेना के आयोजनों में व्यस्त हैं। ऐसे में उनके लिए क्या संभावना और क्या आशंका है, यह समझना भी जरूरी है।

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नीतीश ने दिलाई मुक्ति, तो क्या एहसान जताएंगे
बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन जेल में थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजपूतों के एक कार्यक्रम में उनकी रिहाई को लेकर उठे सवाल पर कहा था कि हम क्या कर रहे हैं, यह उनके (आनंद मोहन) परिवारजन से पूछिए। उसके कुछ दिनों बाद आनंद मोहन रिहा हो गए। कुछ नियम-प्रावधानों में फेरबदल कर सरकार ने उनकी रिहाई सुनिश्चित की। दलित जाति के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी जी. कृष्णैया की हत्या में दोषसिद्ध होकर वह सजा काट रहे थे। कृष्णैया की पत्नी इस रिहाई के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हैं। इधर, रिहाई के बाद मई में ही आनंद मोहन ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर एहसान जता दिया था। इसके बाद आनंद मोहन अब अक्टूबर में मिले तो हल्ला उड़ा कि वह जदयू जाएंगे। दरअसल, ठाकुर का कुआं विवाद में राष्ट्रीय जनता दल पर हमलावर होकर उन्होंने वह रास्ता तो बंद कर लिया। भाजपा पर तो लगातार हमला बोलते रहे हैं, इसलिए वह रास्ता बंद माना जा रहा है। लेकिन, क्या फिर अंतिम रास्ता जदयू ही है? जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह से 'अमर उजाला' ने पूछा तो उन्होंने इस इंट्री की जानकारी से इनकार किया। आनंद मोहन को करीब से जानने वाले भी इनकार कर रहे। कह कि आनंद मोहन अंतिम समय में कुछ फाइनल करेंगे। अभी जदयू में जाएंगे तो राजपूत नाराज हो जाएंगे। वह राजपूत राजनीति से ही उभरे थे और फिलहाल राजस्थान चुनाव की घोषणा से पहले वहां राजपूतों के मंचों से ही गरज रहे थे।
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राजस्थान में भगवा धारण कर राजपूतों की रैली में शामिल हो रहे थे अभी आनंद मोहन। - फोटो : अमर उजाला

तो क्या भाजपा में कुछ संभावना अब भी है
भारतीय जनता पार्टी में संभावना देखने की बात है तो आनंद मोहन के छोटे बेटे की अंशुमन आनंद का केंद्रीय रक्षा मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह से मिलने के बाद चर्चा उठी थी। लेकिन, राजनाथ राजपूत हैं तो जातिगत समीकरण में बात आकर गुजर गई। आनंद मोहन ने कांग्रेस नेता और एक्टर राज बब्बर से भी भेंट की। इस तरह तो वह हर दल के नेता से मिलते नजर आ रहे हैं। इसलिए, भाजपा में वह तुरंत जाएंगे- इसकी भी संभावना नहीं दिख रही है। वजह यह भी कि रिहाई के बाद भाजपा के कुछ नेताओं ने सवाल उठाया था तो आनंद मोहन ने उन्हें भाजपाई पुरखों की याद दिलाते हुए जमीन दिखाने का प्रयास किया था। आनंद मोहन से जुड़े क्षत्रिय नेताओं की मानें तो भाजपा से जुड़ने का फैसला लेंगे भी तो अंत में, फिलहाल नहीं। 


 

Bihar News : After Bihar Caste Census, Anand Mohan Singh election alliance possible with nitish kumar or bjp
भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह से मिले आनंद मोहन के बेटे अंशुमन। - फोटो : अमर उजाला

इन सभी के पीछे जातीय जनगणना के आंकड़े
आनंद मोहन जाति आधारित राजनीति की उपज हैं। राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद ने ठाकुर विवाद में मुंह खोला तो आनंद मोहन के बारे में यही बात की थी। इन्हें जातिवादी बताया था। उसके बाद राज्य की नीतीश कुमार सरकार ने जातियों का आंकड़ा जारी कर दिया। इसमें अगड़ी जातियों की संख्या 15.52 प्रतिशत आ गई। लालू ने जिस भू-रा-बा-ल साफ करो का कभी नारा दिया था, वह जातीय जनगणना में लगभग साफ नजर आया। भूमिहार 2.89 प्रतिशत, राजपूत 3.45 प्रतिशत, ब्राह्मण 3.67 और लाला (कायस्थ) 0.6 प्रतिशत बताए गए। अगड़ी जाति के आंकड़ों में मुसलमानों की अगड़ी जातियां भी हैं। मतलब, हिंदू की चार प्रमुख अगड़ी जातियों की आबादी 10 फीसदी के आसपास है। चाणक्य स्कूल ऑफ पॉलिटिकल राइट्स एंड रिसर्च के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा कहते हैं कि "जातीय जनगणना के बाद अब आने वाले चुनाव में राजद और जदयू पिछड़ी, अति पिछड़ी जातियों और मुसलमानों को लेकर गोलबंदी का प्रयास करेंगे, जबकि भाजपा हिंदुओं की एकजुटता की बात करते हुए अगड़ी जातियों को साथ रखने का प्रयास करेगी। ऐसे में आनंद मोहन के लिए गैर-सवर्ण जाति की वरीयता वाले दल में जाना शायद अफवाह ही हो।" ज्यादातर राजनीतिक विश्लेषकों की राय भी यही है कि आनंद मोहन अभी कुछ फैसला शायद नहीं करें, क्योंकि इससे उनके साथ रहने वाले राजपूत वोटर निर्णय लेने के लिए आजाद हो सकते हैं। साथ आ भी सकते हैं, छोड़ भी सकते हैं।

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