Bihar : BJP नेता की हत्या में पूर्व जिला पार्षद पति समेत 6 को उम्रकैद, धार्मिक उन्माद में सभी ने गोली मारी थी
Bihar News : धार्मिक उन्माद में भारतीय जनता पार्टी नेता और बजरंग दल के सक्रिय सदस्य सकलदेव यादव की करीब चार साल पहले हुई जघन्य हत्या में मंगलवार को पूर्व जिला पार्षद पति समेत छह आरोपियों को जमुई में उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
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धार्मिक उन्माद में भारतीय जनता पार्टी नेता और बजरंग दल के सक्रिय सदस्य सकलदेव यादव की करीब चार साल पहले हुई जघन्य हत्या में मंगलवार को पूर्व जिला पार्षद पति समेत छह आरोपियों को जमुई में उम्रकैद की सजा सुनाई गई। लोकसभा चुनाव के बाद 24 अप्रैल 2019 को चौकीटांड गांव में बजरंगबली मंदिर के पास सकलदेव को गोलियों से भून डाला गया था। कोर्ट में जिरह के दौरान धार्मिक उन्माद के अलावा चुनावी रंजिश की भी बात आई। इस हत्याकांड के कारण जमुई में चार दिनों तक खूब बवाल हुआ था। मंगलवार को फैसले के बाद अधिवक्ता ने बताया कि प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही, पुलिस अनुसंधान की पुष्टि समेत कई आधार पर कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई। साबित हुआ कि सभी छह अपराधियों ने सकलदेव को एक-एक गोली मारी थी।
चिराग पासवान के चुनाव में सक्रियता भी वजह
जमुई में मंगलवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (द्वितीय) समीर कुमार की अदालत ने चर्चित सकलदेव यादव हत्याकांड में सजा सुनाई। खैरा थाना क्षेत्र के चौकीटांड निवासी मीनर मियां, अफताब आलम, सत्तार अंसारी उर्फ सत्तार मियां, हैदर मियां, मो. इबरार अंसारी व अताउल अंसारी उर्फ अतोल अंसारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसमें मो. इबरार अंसारी पूर्व जिला पार्षद का पति भी है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा समर्थित लोक जनशक्ति पार्टी प्रत्याशी चिराग पासवान के पक्ष में सक्रिय रहे खैरा थाना क्षेत्र के चौकीटांड़ निवासी राम यादव के पुत्र सकलदेव कुमार यादव की 24 अप्रैल 2019 को गांव के मंदिर के पास गोलियों से भून डाला गया था। गांव में ही रितो यादव के यहां तिलकोत्सव से लौटने के दौरान हत्या हुई थी।
गवाही के अलावा जिरह में धार्मिक तनाव का भी जिक्र
अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने बताया कि अदालत में जिरह के दौरान पुलिस ने पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर जानकारी दी कि अपराधियों ने सकलदेव को हथियारों के बल पर रोका और फिर हाथ पकड़ सभी छह ने एक-एक गोली उसके सीने में मार दी। अपराधियों को उस समय चुनाव में भाजपा समर्थित प्रत्याशी की जीत का गुस्सा था, लेकिन उससे ज्यादा वह गांव में धार्मिक गतिविधियों के प्रचार-प्रसार के लिए सकलदेव को दोषी मानते थे। जिरह के दौरान धार्मिक उन्माद की बात इसलिए भी बार-बार आई, क्योंकि हत्याकांड के बाद भी फरार अभियुक्तों की ऐसी गतिविधियों की जानकारी पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज हुई। इसके अलावा तिलकोत्सव के बाद सकलदेव के साथ लौट रहे तीन लोगों ने प्रत्यक्षदर्शी के रूप में भी धार्मिक उन्माद में हत्या की गवाही दी। हत्याकांड के बाद दो समुदायों के बीच तनाव भी कई दिनों तक रहा था। कांड के अनुसंधान के दौरान मृतक का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला था, जबकि आरोपियों को लेकर कई मामले सामने आए थे।