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बिहार चुनाव: बागियों के पक्ष में आए सरयू राय, बोले- भाजपा मतलब भूपेंद्र जनता पार्टी
Mon, 02 Nov 2020 06:35 PM IST
कुमार संभव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार संभव
Updated Mon, 02 Nov 2020 06:35 PM IST
सार
झारखंड सरकार में पूर्व मंत्री ने बताई चिराग की फेस वैल्यू, तेजस्वी को कहा समझदार
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सरयू राय और नीतीश कुमार (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झारखंड में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की सरकार गिराने वाले सरयू राय अब बिहार में भी अपना जलवा दिखाने आ गए हैं। उन्होंने भाजपा के बागी प्रत्याशियों के पक्ष में बिहार के 5 विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी सभा की। इस दौरान उन्होंने जदयू के तीन और राजद के एक प्रत्याशी के लिए भी जनता से समर्थन मांगा। इस दौरान उन्होंने चिराग पासवान की फेस वैल्यू समझाई तो तेजस्वी यादव को समझदार बताया। साथ ही, कहा कि बिहार भाजपा अब भूपेंद्र जनता पार्टी हो गई है। गौरतलब है कि सरयू राय ऐसे नेता हैं, जो संघ की विचारधारा से सहमति रखने के साथ-साथ दूसरे दलों में मित्रता के लिए जाने जाते हैं। जिस वक्त बिहार में महागठबंधन की सरकार थी और भाजपा विपक्ष में थी, उस समय सरयू राय की किताब का विमोचन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था। पेश हैं बिहार चुनाव के मद्देनजर सरयू राय से हुई बातचीत के मुख्य अंश...
सवाल: बिहार में भाजपा की स्थिति कैसी है? क्या एनडीए चुनाव जीत रहा है?
जवाब: बिहार भाजपा रीढ़विहीन हो गई है। आज प्रदेश भाजपा में ऐसा कोई चेहरा नहीं है, जो जनता के बीच लोकप्रिय हो। यहां के सभी नेता केंद्र और संगठन के कंधे पर खड़े होकर बड़े दिखाई पड़ते हैं। कुछ भाजपा नेता और सांसद अपनी जेब में वीटो पॉवर लेकर घूम रहे हैं। किसे प्रत्याशी बनाना है और किसे नहीं, वही तय कर रहे हैं। जो विजयी प्रत्याशी थे और जो योग्य उम्मीदवार हो सकते थे, उन्हें टिकट से वंचित कर दिया गया। यह सब क्या है?
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सवाल: डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी के बारे में आपकी क्या राय है?
जवाब: बिहार में जिस कलेक्टिव नेतृत्व की जरूरत है, वह नहीं दिखती है। आज की प्रदेश भाजपा भूपेंद्र जनता पार्टी हो गई है। उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी बहुत बोलते हैं। रोजाना लालू प्रसाद और तेजस्वी से सवाल करते हैं। वह हमारे अच्छे मित्र रहे हैं, इसलिए उनके बारे में मेरी कई धारणाएं भी हैं। अगर संबंध सामान्य रहते तो मैं उन्हीं से सारी बातें कहता, मगर आज संबंध सामान्य नहीं हैं, इसलिए उनके बारे में कुछ नहीं कहना चाहता।
सवाल: क्या भाजपा में लीडरशिप का तरीका बदल गया है?
जवाब: कल और आज की भाजपा में काफी अंतर है। पहले कलेक्टिव लीडरशिप थी, लेकिन आज वह ऑर्डर फॉर्म में तब्दील हो चुकी है। कोई किसी नेता से सवाल नहीं कर सकता।
सवाल: बागी उम्मीदवारों को समर्थन देने की वजह क्या है?
जवाब: जो विजयी प्रत्याशी थे और जो योग्य उम्मीदवार हो सकते थे, उन्हें टिकट से वंचित कर दिया गया। यह सब क्या है? मुझे वैसे पांच निर्दलीय प्रत्याशियों ने सहयोग के लिए आमंत्रित किया था। मुझे उनका पक्ष तार्किक लगा, इसलिए उनके पक्ष में प्रचार किया। हालांकि, जहां भी जदयू का प्रत्याशी होगा, वहां नहीं जाऊंगा।
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सवाल: क्या आप भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में भी प्रचार करेंगे?
जवाब: भाजपा के कुछ प्रत्याशियों ने उनके क्षेत्र में आने के लिए मुझसे संपर्क किया था, लेकिन मैं नहीं गया। चूंकि, मैं पार्टी से निष्कासित हूं, इसलिए जब तक शीर्ष नेतृत्व नहीं कहेगा, मैं कैसे जा सकता हूं? यह मेरा नीतिगत फैसला था। रही बात सुधाकर सिंह के समर्थन में रामगढ़ जाने की, तो बता दूं कि राजद नेता जगदानंद सिंह से मेरा पारिवारिक संबंध है। वह अलग मिजाज के आदमी हैं। सुधाकर भी भाजपा में रह चुका है।
सवाल: क्या आपके प्रचार करने से नतीजों पर फर्क पड़ेगा?
जवाब: परसा, हिलसा और नालंदा के जदयू प्रत्याशियों ने मुझसे आग्रह किया था। इस वजह से मैं वहां गया। जिन गांवों में मेरे जाने से कुछ असर हो सकता था, वहां जाकर लोगों से मिला और जदयू उम्मीदवारों के लिए समर्थन मांगा। देखिए, बिहार की राजनीति से मैं पिछले 20 साल से बाहर हूं। दूसरी बात मैं इतना बड़ा नेता नहीं हूं कि बड़ा परिवर्तन कर दूंगा।
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सवाल: आपके हिसाब से चुनाव कौन जीत रहा है?
जवाब: फिलहाल बिहार में भ्रम की स्थिति है, लेकिन लड़ाई कांटे की है। जैसे-जैसे मतदान नजदीक आ रहा है, लोग मानने लगे हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विकास कार्य किया है। वहीं, लालू राज की स्मृतियां भी जेहन में आ-जा रही हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव के पक्ष में युवाओं का रुझान दिखता है, लेकिन एक सोशल कनफ्लिक्ट अपनी भूमिका अदा कर रही है। लोजपा और उसके नेता जदयू के खिलाफ हैं। यह संदेश लोगों के बीच जरूर जा रहा है। कभी-कभी लगता है कि यह सब भाजपा की ओर से प्रेरित है। खैर, इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही पहलू हैं। मुझे नहीं लगता कि लोजपा डबल डिजिट तक पहुँच पाएगी। चिराग का फेसवैल्यू तो है, लेकिन उन्हें भाजपा से जिस तरह अलग होना था, वह उसने ऐसा नहीं किया। भाजपा चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज करा सकती थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया।
सवाल: चुनावी मैदान में तेजस्वी यादव कितने मजबूत हैं?
जवाब: महागठबंधन नेता तेजस्वी प्रसाद यादव समझदार है। जिस तरह से वह मुद्दे उठा रहा है और प्रधानमंत्री के आरोपों पर जिस शालीनता से प्रतिक्रिया दे रहा है, उससे लगता है कि यह लड़का अपनी अलग छवि बनाना चाहता है। यह भी सच है कि लालू की छवि तेजस्वी का पीछा नहीं छोड़ रही। उसका यादव आधार वोट उसके साथ है। वह एक प्रतिशत भी नहीं छिटका है, यही उसकी विरासत भी है। अगर मेहनत ऐसे ही करता रहा तो अच्छा नेता बनकर उभर सकता है।
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इन प्रत्याशियों के पक्ष में किया प्रचार
आपको बता दें कि सरयू राय ने भाजपा के पांच बागी प्रत्याशियों आरएस पांडेय (बगहा), शत्रुघ्न तिवारी उर्फ चोकर बाबा (अमनौर), रोहित कुमार अनुराग (दरौंधा), मंजीत सिंह (बैकुंठपुर) और शोभा देवी (शाहपुर) के पक्ष में चुनावी सभा की। इसके अलावा उन्होंने जदयू के तीन उम्मीदवारों चंद्रिका राय (परसा), श्रवण कुमार (नालंदा) और कृष्ण मुरारी शरण उर्फ प्रेम मुखिया (हिलसा) के लिए नौ गांवों में जाकर जनसमर्थन मांगा। साथ ही, राजद प्रत्याशी सुधाकर सिंह (रामगढ़) के लिए 18 गांवों का दौरा किया।
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सवाल: बिहार में भाजपा की स्थिति कैसी है? क्या एनडीए चुनाव जीत रहा है?
जवाब: बिहार भाजपा रीढ़विहीन हो गई है। आज प्रदेश भाजपा में ऐसा कोई चेहरा नहीं है, जो जनता के बीच लोकप्रिय हो। यहां के सभी नेता केंद्र और संगठन के कंधे पर खड़े होकर बड़े दिखाई पड़ते हैं। कुछ भाजपा नेता और सांसद अपनी जेब में वीटो पॉवर लेकर घूम रहे हैं। किसे प्रत्याशी बनाना है और किसे नहीं, वही तय कर रहे हैं। जो विजयी प्रत्याशी थे और जो योग्य उम्मीदवार हो सकते थे, उन्हें टिकट से वंचित कर दिया गया। यह सब क्या है?
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सवाल: डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी के बारे में आपकी क्या राय है?
जवाब: बिहार में जिस कलेक्टिव नेतृत्व की जरूरत है, वह नहीं दिखती है। आज की प्रदेश भाजपा भूपेंद्र जनता पार्टी हो गई है। उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी बहुत बोलते हैं। रोजाना लालू प्रसाद और तेजस्वी से सवाल करते हैं। वह हमारे अच्छे मित्र रहे हैं, इसलिए उनके बारे में मेरी कई धारणाएं भी हैं। अगर संबंध सामान्य रहते तो मैं उन्हीं से सारी बातें कहता, मगर आज संबंध सामान्य नहीं हैं, इसलिए उनके बारे में कुछ नहीं कहना चाहता।
सवाल: क्या भाजपा में लीडरशिप का तरीका बदल गया है?
जवाब: कल और आज की भाजपा में काफी अंतर है। पहले कलेक्टिव लीडरशिप थी, लेकिन आज वह ऑर्डर फॉर्म में तब्दील हो चुकी है। कोई किसी नेता से सवाल नहीं कर सकता।
सवाल: बागी उम्मीदवारों को समर्थन देने की वजह क्या है?
जवाब: जो विजयी प्रत्याशी थे और जो योग्य उम्मीदवार हो सकते थे, उन्हें टिकट से वंचित कर दिया गया। यह सब क्या है? मुझे वैसे पांच निर्दलीय प्रत्याशियों ने सहयोग के लिए आमंत्रित किया था। मुझे उनका पक्ष तार्किक लगा, इसलिए उनके पक्ष में प्रचार किया। हालांकि, जहां भी जदयू का प्रत्याशी होगा, वहां नहीं जाऊंगा।
बिहार चुनाव: किन्नर प्रत्याशी पहली बार मैदान में, क्या हथुआ में बनेगा कीर्तिमान?
सवाल: क्या आप भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में भी प्रचार करेंगे?
जवाब: भाजपा के कुछ प्रत्याशियों ने उनके क्षेत्र में आने के लिए मुझसे संपर्क किया था, लेकिन मैं नहीं गया। चूंकि, मैं पार्टी से निष्कासित हूं, इसलिए जब तक शीर्ष नेतृत्व नहीं कहेगा, मैं कैसे जा सकता हूं? यह मेरा नीतिगत फैसला था। रही बात सुधाकर सिंह के समर्थन में रामगढ़ जाने की, तो बता दूं कि राजद नेता जगदानंद सिंह से मेरा पारिवारिक संबंध है। वह अलग मिजाज के आदमी हैं। सुधाकर भी भाजपा में रह चुका है।
सवाल: क्या आपके प्रचार करने से नतीजों पर फर्क पड़ेगा?
जवाब: परसा, हिलसा और नालंदा के जदयू प्रत्याशियों ने मुझसे आग्रह किया था। इस वजह से मैं वहां गया। जिन गांवों में मेरे जाने से कुछ असर हो सकता था, वहां जाकर लोगों से मिला और जदयू उम्मीदवारों के लिए समर्थन मांगा। देखिए, बिहार की राजनीति से मैं पिछले 20 साल से बाहर हूं। दूसरी बात मैं इतना बड़ा नेता नहीं हूं कि बड़ा परिवर्तन कर दूंगा।
Bihar Election 2020: प्लूरल्स पार्टी के प्रत्याशी पर हमला, पुष्पम प्रिया बोलीं- ये डरे हुए लोग हैं
सवाल: आपके हिसाब से चुनाव कौन जीत रहा है?
जवाब: फिलहाल बिहार में भ्रम की स्थिति है, लेकिन लड़ाई कांटे की है। जैसे-जैसे मतदान नजदीक आ रहा है, लोग मानने लगे हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विकास कार्य किया है। वहीं, लालू राज की स्मृतियां भी जेहन में आ-जा रही हैं। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव के पक्ष में युवाओं का रुझान दिखता है, लेकिन एक सोशल कनफ्लिक्ट अपनी भूमिका अदा कर रही है। लोजपा और उसके नेता जदयू के खिलाफ हैं। यह संदेश लोगों के बीच जरूर जा रहा है। कभी-कभी लगता है कि यह सब भाजपा की ओर से प्रेरित है। खैर, इसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही पहलू हैं। मुझे नहीं लगता कि लोजपा डबल डिजिट तक पहुँच पाएगी। चिराग का फेसवैल्यू तो है, लेकिन उन्हें भाजपा से जिस तरह अलग होना था, वह उसने ऐसा नहीं किया। भाजपा चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज करा सकती थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया।
सवाल: चुनावी मैदान में तेजस्वी यादव कितने मजबूत हैं?
जवाब: महागठबंधन नेता तेजस्वी प्रसाद यादव समझदार है। जिस तरह से वह मुद्दे उठा रहा है और प्रधानमंत्री के आरोपों पर जिस शालीनता से प्रतिक्रिया दे रहा है, उससे लगता है कि यह लड़का अपनी अलग छवि बनाना चाहता है। यह भी सच है कि लालू की छवि तेजस्वी का पीछा नहीं छोड़ रही। उसका यादव आधार वोट उसके साथ है। वह एक प्रतिशत भी नहीं छिटका है, यही उसकी विरासत भी है। अगर मेहनत ऐसे ही करता रहा तो अच्छा नेता बनकर उभर सकता है।
Bihar Election 2020 Updates: लालू का महंगाई को लेकर तंज, कहा- अनार के बराबर हो गए हैं प्याज के दाम
इन प्रत्याशियों के पक्ष में किया प्रचार
आपको बता दें कि सरयू राय ने भाजपा के पांच बागी प्रत्याशियों आरएस पांडेय (बगहा), शत्रुघ्न तिवारी उर्फ चोकर बाबा (अमनौर), रोहित कुमार अनुराग (दरौंधा), मंजीत सिंह (बैकुंठपुर) और शोभा देवी (शाहपुर) के पक्ष में चुनावी सभा की। इसके अलावा उन्होंने जदयू के तीन उम्मीदवारों चंद्रिका राय (परसा), श्रवण कुमार (नालंदा) और कृष्ण मुरारी शरण उर्फ प्रेम मुखिया (हिलसा) के लिए नौ गांवों में जाकर जनसमर्थन मांगा। साथ ही, राजद प्रत्याशी सुधाकर सिंह (रामगढ़) के लिए 18 गांवों का दौरा किया।