Bihar election 2020: दिवंगत राजद नेता रघुवंश प्रसाद सिंह के बेटे सत्यप्रकाश सिंह जदयू में शामिल
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राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के दिवंगत नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह के बेटे सत्यप्रकाश सिंह गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू में शामिल हो गए। गुरुवार को जदयू पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया गया, जिसके बाद जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह की मौजूदगी में सत्यप्रकाश को पार्टी की सदस्यता ग्रहण करवाई गई।
सदस्यता ग्रहण करने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए सत्यप्रकाश सिंह ने कहा कि पिता जी कहा करते थे कि किसी भी परिवार का कोई एक सदस्य ही राजनीति में होना चाहिए, यही समाजवाद है। सत्यप्रकाश ने जदयू में उन्हें शामिल किए जाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह और जदयू के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष अशोक चौधरी का धन्यवाद किया।
उन्होंने कहा कि उनका राजनीति में आने की कोई योजना नहीं थी, लेकिन पिताजी की आकस्मिक मृत्यु की वजह से वह राजनीति में आए हैं। क्योंकि वे अपने पिता के अधूरे बचे काम को पूरा करना चाहते हैं। उन्होंने राजद पर निशाना साधते हुए कहा कि 'पार्टी के अंदर काफी दिनों से मेरे पिता की उपेक्षा की जा रही थी। पिताजी ने मरने से पहले जो पत्र लिखा, उसमें उन्होंने इशारा किया था कि मैं राजनीति में आऊं।'
सत्यप्रकाश ने कहा कि मेरी कोशिश रहेगी कि पिताजी के बचे हुए कार्यों को पूरा करूं। गौरतलब है कि एम्स में इलाज के दौरान रघुवंश प्रसाद सिंह ने अस्पताल से ही नीतीश कुमार के नाम चिट्ठी लिखकर अपने कुछ अधूरे काम को पूरा करने का आग्रह किया था।
पत्र के माध्यम से उन्होंने नीतीश कुमार से तीन मांगों को पूरा करने का आग्रह किया था, जिन तीन कार्यों को वह पूरा नहीं कर पाए हैं। रघुवंश प्रसाद ने सीएम नीतीश कुमार के साथ-साथ सिंचाई मंत्री और बिहार के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत के नाम भी पत्र लिखा था।
बता दें कि सितंबर महीने में रघुवंश प्रसाद सिंह ने अचानक ही राजद से इस्तीफा दे दिया था। जबकि उस दौरान वो अपना इलाज करवाने दिल्ली के एम्स में भर्ती थे। इसके पीछे की वजह यह रघुवंश प्रसाद सिंह की राजद से नाराजगी बताई गई थी। जाहिर है नाराजगी की वजह से ही रघुवंश प्रसाद सिंह ने जून-2020 में पार्टी के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि तब रघुवंश प्रसाद को मनाने की तमाम कोशिशें भी की गई थीं, लेकिन उन्होंने मानने से इंकार कर दिया था।