Bihar Election Result 2020: राष्ट्रीय मुद्दों पर हावी रहे स्थानीय मुद्दे, एग्जिट पोल में महागठबंधन को बढ़त की वजहें
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Bihar Election Result Date: एग्जिट पोल के रूझानों के मुताबिक, महागठबंधन को बढ़त की कई वजहें गिनाईं जा रही हैं। एग्जिट पोल में राजग एक बार फिर स्थानीय मुद्दे और स्थानीय चेहरे के मुद्दे पर पिछड़ गया। भाजपा की तमाम कोशिशों के बावजूद विपक्षी महागठबंधन का चेहरा तेजस्वी यादव राष्ट्रवाद के फेर में नहीं फंसे। वह शुरू से अंत तक पीएम मोदी के बदले नीतीश कुमार पर निशाना साधते रहे और लड़ाई को नीतीश बनाम तेजस्वी ही बनाए रखा।
लड़ाई को तेजस्वी बनाम मोदी नहीं होने दिया। बिहार में भाजपा के कमजोर चेहरे और नीतीश के सत्ता विरोध का सीधा लाभ विपक्ष को मिला। तेजस्वी ने केजरीवाल स्टाइल अपनाया तेजस्वी के चुनाव प्रचार में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल शैली की छाप दिखी। भाजपा की ओर से हिंदुत्व, राम मंदिर, अनुच्छेद 370, सीएए, एनआरसी को मुद्दा बनाने की पुरजोर कोशिश की गई।
हालांकि तेजस्वी न सिर्फ इन मुद्दों पर बोलने से बचे, बल्कि हमले के लिए मोदी की जगह सिर्फ नीतीश और उनके पंद्रह साल के कार्यकाल को चुना। चुनाव प्रचार के दौरान अपने माता-पिता और उनके कार्यकाल की चर्चा करने से भी बचे। पार्टी को महज सामाजिक न्याय और मुस्लिम-यादव की राजनीति करने वाली छवि से बाहर निकाला। युवा मतदाताओं को साधने के लिए रोजगार बड़ा मुद्दा रोजगार, पलायन, भ्रष्टाचार, उद्योग जैसे मुद्दे को ही अपनी सभी रैलियों में प्रमुखता से उठाते रहे।
तेजस्वी को केजरीवाल की तरह पता था कि मुसलमान मतदाताओं के पास राजद के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है और यादव बिरादरी में राजद के प्रति सहानुभूति और गहरी हुई है। इसे भांपते हुए तेजस्वी ने इस बार इन बिरादरियों के बारे में बढ़-चढ़ कर कुछ नहीं कहा। इसकी जगह पार्टी के लिए युवा मतदाताओं में नया वर्ग तलाशते रहे।
लोगों को बस केंद्रीय योजनाओं की जानकारी पूरे चुनाव में जदयू अपने पंद्रह साल के कार्यकाल के किसी एक योजना को नहीं भुना पाई। रोजगार, पलायन, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे पर जदयू पूरे चुनाव में रक्षात्मक थी। लोगों को उज्जवला योजना, शौचालय निर्माण, जनधन, मुफ्त अनाज, किसान सम्मान जैसी केंद्रीय योजनाओं के बारे में ही जानकारी थी। चूंकि राजग का चेहरा नीतीश थे, इसलिए राजग राज्य में केंद्रीय योजनाओं और पीएम मोदी की लोकप्रियता का लाभ हासिल नहीं कर पाया।
उल्टा पड़ा लोजपा पर लगाया दांव
भाजपा को लोजपा पर दांव लगाना बेहद महंगा पड़ा। भाजपा के असमंजस के बीच लोजपा यह धारणा बनाने में कामयाब रही कि उसे अंदरखाने भाजपा का समर्थन हासिल है। करीब ढाई दर्जन भाजपा नेताओं के लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने से यह धारणा मजबूत हुई। रही-सही कसर पीएम मोदी द्वारा पहली रैली में लोजपा के संरक्षक रहे दिवंगत रामविलास पासवान को श्रद्धांजलि देने से पूरी हो गई। इसका परिणाम यह निकला कि जदयू के हिस्से वाली सीटों पर राजग के वोटों में जबर्दस्त बंटवारा हुआ।
रोजगार के मुद्दे का मजाक उड़ा कर फंसे
तेजस्वी ने जब सरकार बनने पर पहली कैबिनेट की पहली बैठक में दस लाख सरकारी नौकरियां देने की घोषणा की तो इसका स्थानीय भाजपा और जदयू नेताओं ने मजाक उड़ाया। तेजस्वी की शिक्षा पर निम्न स्तरीय टिप्पणी की। उनके बड़े परिवार पर भी अशालीन टिप्पणी की। जब इन्हें पता लगा कि तेजस्वी के इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है तब भाजपा-जदयू नेताओं में बड़ी संख्या में रोजगार देने की घोषणा करने की होड़ लग गई। जाहिर तौर पर इस स्थिति का भी तेजस्वी को ही लाभ मिला।
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