Bihar Election 2020: क्या भाजपा का होगा प्रदेश में मुख्यमंत्री, नीतीश को झटका देने के लिए 'प्लान बी' है तैयार!
- प्रधानमंत्री मोदी की कैबिनेट में शामिल होंगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार?
- भाजपा चुनाव बाद के हालात पर लेगी निर्णय?
- जद(यू) की सीटें कम आने पर बदलेंगे हालात
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क्या बिहार विधानसभा चुनाव के बाद केंद्रीय दूरसंचार और कानून मंत्री बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे? बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रभावशाली जगह दी जाएगी? यह सवाल संघ और भाजपा के उन नेताओं के बीच में चर्चा का विषय बना हुआ है, जो दूसरे राज्यों से बिहार में प्रचार करने गए हैं। काशी से लेकर पूरे उत्तर प्रदेश से कुछ चेहरों ने अक्तूबर महीने से बिहार में डेरा डाल रखा है। कई राज्यों से भाजपा के नेताओं, कार्यकर्ताओं ने बिहार में चुनाव प्रचार का जिम्मा संभाला है। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर इनका कहना है कि चुनाव के बाद स्थिति अनुकूल रही तो मुख्यमंत्री भाजपा का होगा।
रविशंकर प्रसाद से बेहतर विकल्प नहीं है भाजपा के पास
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में सीटों के बंटवारे में भाजपा के जिम्मे 121 सीटें हैं। इन सभी विधानसभा सीटों पर कई राज्यों के भाजपा और संघ के अनुभवी नेताओं, कार्यकर्ताओं को चुनाव प्रचार के लिए लगाया गया है। हर कार्यकर्ता, नेता को पार्टी संगठन की तरफ से प्रतिदिन खाने-पीने के लिए 500 रुपये, एक गाड़ी और ड्राइवर के साथ दोनों का खर्च भी दिया जाता है। रहने के लिए वातानुकूलित कमरे की व्यवस्था की गई है। चुनाव प्रचार में लगे इन नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस बार जद(यू) बिहार विधानसभा चुनाव में तीसरे स्थान पर रहने वाली है। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनेगी। दूसरे नंबर पर राष्ट्रीय जनतादल रहेगी। भाजपा और जद(यू) के बीच में विधायकों का अंतर काफी बड़ा हो सकता है और ऐसे में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के राज्य का मुख्यमंत्री बनने की संभावना है। बताते हैं राज्य में प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री शाह के विश्वस्त रविशंकर प्रसाद से अच्छा कोई दूसरा ढंग का चेहरा नहीं है।
नीतीश का मनोबल गिराने की रणनीति
भाजपा और संघ के नेताओं का अनुमान है कि सीटों का अंतर अधिक और जद(यू) की सीटें कम आने पर नीतीश कुमार का मनोबल खुद ही खत्म हो जाएगा। सूत्रों का कहना है कि नीतीश कुमार को केंद्र सरकार में बड़ी अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके समानांतर राज्य मंत्रिमंडल में नीतीश कुमार की पार्टी के उनके करीबी नेताओं को मंत्री का पद मिल सकता है। संघ और भाजपा के प्रचार अभियान में लगे नेताओं के अनुसार भाजपा ने लोजपा नेता चिराग पासवान के खिलाफ कुछ भी नहीं बोला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी चिराग पासवान को कोई नसीहत नहीं दी है। बताते हैं 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले से चिराग पासवान शाह को प्रिय हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एनडीए के गठबंधन दलों का आदर करते हैं। इसलिए चिराग पासवान भी भाजपा के खिलाफ कोई गलतबयानी नहीं कर रहे हैं। इसका भाजपा को करीब 110 विधानसभा सीटों पर लाभ मिलने की उम्मीद है।
नीतीश के अहंकार से गड़बड़ाया बिहार चुनाव का गणित
भाजपा के प्रचार के लिए दूसरे राज्यों से आई इस ब्रिगेड का कहना है कि सारा खेल नीतीश के अहंकार के कारण गड़बड़ाया। बताते हैं भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस बार के चुनाव में खास रणनीति के साथ उतरना चाहता था। योजना थी कि बिहार जद(यू), भाजपा और लोजपा का गठबंधन विपक्षी महागठबंधन से मुकाबले का चुनाव लड़ेगा। इसके साथ-साथ वीआईपी, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा, रालोसपा, एआईएमआईएम का घटबंधन भी चुनाव में उतरता। इस तरह से त्रिपक्षीय चुनाव की स्थिति में महागठबंधन की लुटिया डूबनी तय थी। लेकिन चुनाव की तारीख के करीब आने तक सबकुछ बदलता चला गया। बताते हैं इसमें नीतीश कुमार की ही काफी बड़ी भूमिका रही।