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Bihar Police : बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव, अब इंस्पेक्टर ही संभालेंगे थानों की कमान; DGP ने जारी किया नया आदेश

Mon, 22 Jun 2026 09:10 PM IST
Krishan Ballabh Narayan न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: Krishan Ballabh Narayan Updated Mon, 22 Jun 2026 09:10 PM IST
सार

Bihar : बिहार में लॉ एंड ऑर्डर नहीं बिगड़े इसके लिए बिहार पुलिस में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। बिहार के किसी थानों में अब सब-इंस्पेक्टर  थानाध्यक्ष नहीं होंगे, बल्कि उनकी जगह इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी जाएगी।

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Bihar DGP vinay kumar ordered only inspector will become police station head patna Bihar Police
बिहार डीजीपी विनय कुमार - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

बिहार में कानून-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने और गंभीर अपराधों की जांच को अधिक वैज्ञानिक व सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने एक बड़ा व ऐतिहासिक नीतिगत निर्णय लिया है। पुलिस महानिदेशक ने एक नया आदेश जारी किया है कि अब राज्य के कुल 425 सामान्य श्रेणी के थानों में सब-इंस्पेक्टर की जगह पुलिस निरीक्षक यानी इंस्पेक्टर स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को थानाध्यक्ष के रूप में तैनात किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय का यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे सूबे में लागू कर दिया गया है। नए आपराधिक कानूनों की बढ़ती आवश्यकताओं को देखते हुए वर्तमान में चिह्नित 208 थानों के अतिरिक्त 217 और थानों को इस कोटि में उत्क्रमित किया गया है।

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सालाना 350 से अधिक केस वाले थाने हुए अपग्रेड
बताया जाता है कि नए 217 थानों का चयन बेहद कड़े पैमानों के आधार पर किया गया है। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, थानों के भौगोलिक आकार, अपराध की संवेदनशीलता और वहां प्रतिवर्ष दर्ज होने वाले औसतन कम-से-कम 350 या उससे अधिक कांडों को आधार बनाकर इन्हें इंस्पेक्टर रैंक के दायरे में लाया गया है।
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 नए आपराधिक कानूनों को मिलेगी रफ्तार
दस्तावेजों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि देश में लागू हुए नए आपराधिक कानूनों-भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम का मूल उद्देश्य नागरिक केंद्रित पुलिसिंग को बढ़ावा देना है। इंस्पेक्टर स्तर के अनुभवी अधिकारियों के हाथों में कमान होने से गंभीर और संवेदनशील अपराधों की समय पर वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित हो सकेगी। इसके साथ ही साक्ष्यों को मजबूत करने के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब को भी अपग्रेड किया जा रहा है।
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 दो विंग में बंटेगी पुलिस
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रकाश सिंह बनाम अन्य मामले में दिए गए ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों तथा बिहार पुलिस अधिनियम-2007 के आलोक में थानों में काम के बोझ को कम करने के लिए नया ढांचा तैयार किया गया है। अब इंस्पेक्टर स्तर के थानाध्यक्ष के अधीन दो अलग-अलग सब-इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी तैनात होंगे। अपर थानाध्यक्ष अनुसंधान  का पूरा फोकस केवल केसों की जांच और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने पर होगा। जबकि अपर थानाध्यक्ष विधि-व्यवस्था का काम इलाके में कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखना होगा।

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महिला हेल्प डेस्क और किशोर अपराध पर रहेगा सीधा नियंत्रण
डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि इस नई व्यवस्था से मुख्य थानाध्यक्ष के लिए थाने के विभिन्न प्रभागों, जैसे—महिला हेल्प डेस्क, किशोर अपराध और विधि-व्यवस्था पर प्रभावी नियंत्रण और बेहतर ढंग से सुपरविजन करना बेहद आसान हो जाएगा।
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सरकारी खजाने पर नहीं पड़ेगा वित्तीय बोझ
डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि इस नीतिगत निर्णय की सबसे खास बात यह है कि 425 थानों में इंस्पेक्टरों की तैनाती से राज्य सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। इसके लिए किसी नए पद का सृजन नहीं किया गया है, बल्कि जिलों में पहले से ही स्वीकृत पदबल से ही इसे समायोजित किया जाएगा।

 जूनियर को कमान नहीं
डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि चिह्नित थानों के थानाध्यक्ष अपने थाने के पदेन सर्किल इंस्पेक्टर के रूप में भी कार्य करेंगे। उनके पास सर्किल इंस्पेक्टर की सभी शक्तियां निहित रहेंगी, हालांकि उनका कार्यक्षेत्र केवल उनका अपना थाना ही होगा। पुलिस मुख्यालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी आपातकालीन या अल्पकालिक अवकाश की स्थिति में भी इंस्पेक्टर रैंक से नीचे के किसी पदाधिकारी, यहां तक कि सब-इंस्पेक्टर को भी इन थानों का नियमित या पूर्णकालिक थाना प्रभारी नहीं बनाया जाएगा।

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