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बिहार चुनावः जानिए किस तरफ जा रही लहर

Sat, 17 Oct 2015 12:13 PM IST
Updated Sat, 17 Oct 2015 12:13 PM IST
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bihar assembly election 2015

बिहार में दूसरे चरण का मतदान शुक्रवार को ख़त्म हो गया। इसके साथ ही बिहार विधानसभा की 243 सीटों में से एक तिहाई के नतीजे वोटिंग मशीनों में बंद हो गए।

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अब बाक़ी 162 सीटों पर मतदान तीन चरणों में दुर्गा पूजा और मोहर्रम के बाद होगा। दूसरे चरण के बाद भी स्पष्ट रुख़ नहीं दिखाई दे रहा है। हालांकि जो प्रमुख बातें दूसरे चरण के लिए 32 सीटों पर हुए मतदान के दौरान दिखाई दीं, उनसे मतदान की दिशा का थोड़ा बहुत अनुमान लगाया जा सकता है।
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पहला यह कि पहले चरण की तरह इस चरण में भी महिलाएं बड़ी संख्या में वोट डालने के लिए निकलीं। दूसरा, मुस्लिम मतदाताओं में किसी तरह की कोई भ्रम की स्थिति नहीं थी, वे एनडीए को हराने के लिए एकतरफ़ा मतदान करते दिखे।
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तीसरा, जहां पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की पार्टी हम के उम्मीदवार थे, वहां महादलित उनके साथ थे। बाक़ी जगह महादलित महागठबंधन के समर्थन में भी नज़र आए। चौथा, अति पिछड़े भी ठीक-ठाक संख्या में मतदान करते दिखाई दिए। पांचवां, दोपहर बाद मतदान काफ़ी धीमा हो गया जबकि सुबह रफ़्तार बहुत तेज़ थी।

क्या हैं इसके मायने

bihar assembly election 2015

जदयू के लोगों का मानना है कि महिलाओं का बड़ी संख्या में मतदान के लिए निकलना महागठबंधन के पक्ष में है लेकिन भाजपा के लोग इस पर सवाल खड़ा करते हैं। उनका कहना है कि महिलाएं धर्म व परंपरा में ज़्यादा विश्वास करती हैं।

हालांकि महादलितों के वोट में जीतनराम मांझी का दबदबा है लेकिन जहां जीतनराम की पार्टी चुनाव नहीं लड़ रही, वहां महादलित वोट सिर्फ एनडीए को मिलेगा, यह नहीं कहा जा सकता।

अति पिछड़ों को लेकर दोनों गठबंधनों का दावा है और इन चुनावों की असली चाबी इन्हीं के वोटों में छिपी है। दोपहर बाद मतदान धीमा रहने के अर्थ भी अलग-अलग लगाए जा रहे हैं।

एक मत यह है कि शाम के धीमे मतदान का मतलब एनडीए को नुक़सान है और एक मत यह है कि इस बार लोग अपने मत को लेकर बहुत स्पष्ट थे और उन्होंने पहले पहर में ही मतदान कर दिया।

इसीलिए दोपहर से पहले मतदान तेज़ रहा, मुस्लिम वोट एकतरफ़ा पड़े हैं और इनमें तीसरा मोर्चा या वाम मोर्चा कोई खास सेंध नहीं लगा सका।

कांटे की टक्कर

bihar assembly election 2015

मैंने हर ज़िले में वहां मौजूद लोगों से टोह लेने की कोशिश की तो कुल मिलाकर लड़ाई बहुत कांटे की नज़र आई। मतदान के पहले तक एनडीए और भाजपा के नेता इस चरण को पूरी तरह अपने समर्थन में जाता हुआ देख रहे थे।

महागठबंधन के लोगों को लग रहा था कि यहां एनडीए को वे बड़ा झटका देंगे। निजी बातचीत में एनडीए नेता 32 में से कम से कम 25 सीटें जीतने का दावा कर रहे थे तो महागठबंधन के नेता बराबरी की।

दावे अब भी वहीं पर हैं लेकिन भरोसा उतना नहीं दिखाई दे रहा, न इधर न उधर।

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