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बिहार: ऑनलाइन पोर्टल में सेंधमारी कर बनाया फर्जी शिक्षक, करीब एक करोड़ के गबन से हड़कंप
Thu, 08 Oct 2026 09:11 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भागलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भागलपुर
Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी
Updated Thu, 08 Oct 2026 09:11 PM IST
सार
भागलपुर में शिक्षा विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर फर्जी शिक्षक आईडी बनाकर करीब एक करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन का मामला सामने आया है। विभागीय जांच में संविदा पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश की भूमिका सामने आई है।
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अपराध
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भागलपुर में शिक्षा विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर फर्जी शिक्षक आईडी बनाकर लगभग एक करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। विभागीय जांच में ऑनलाइन व्यवस्था के दुरुपयोग से इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता को अंजाम देने की पुष्टि हुई है।
इस पूरे फर्जीवाड़े में संविदा पर कार्यरत रहे कंप्यूटर ऑपरेटर की मुख्य भूमिका उजागर हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना ने आरोपी ऑपरेटर के खिलाफ साइबर थाने में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों के वेतन भुगतान और उनके डेटा प्रबंधन के लिए एक आधिकारिक डिजिटल सिस्टम बनाया गया था। आरोपी ने इसी प्रणाली में सेंधमारी करके फर्जी शिक्षक आईडी तैयार कीं और लंबे समय तक सरकारी खजाने से अवैध रूप से वित्तीय निकासी करता रहा।
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फर्जीवाड़े का ऐसे हुआ पर्दाफाश
यह पूरा मामला उस समय उजागर हुआ जब जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना शशि चंदन चौधरी शिक्षकों के वेतन भुगतान, सेवा पुस्तिका और बजट आवंटन से संबंधित फाइलों और डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान कर रहे थे। गहन जांच और रिकॉर्ड के सत्यापन के दौरान उन्हें संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं। विस्तृत पड़ताल में स्पष्ट हुआ कि विभाग में संविदा पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश ने अपने पद और सिस्टम एक्सेस का अनुचित लाभ उठाते हुए कई फर्जी शिक्षक आईडी बनाई थीं।
जून के महीने में हटाया गया था ऑपरेटर
जांच प्रक्रिया के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपी ऑपरेटर अविनाश की कार्यशैली लंबे समय से संदिग्ध पाई गई थी। संदिग्ध गतिविधियों के कारण विभाग ने उसे इस वर्ष जून के महीने में ही काम से हटा दिया था। यद्यपि उसे पद से हटा दिया गया था, फिर भी उसके द्वारा सेवा में रहते हुए किए गए फर्जीवाड़े के डिजिटल साक्ष्य हाल ही में किए गए ऑडिट और रिकॉर्ड सत्यापन के दौरान उजागर हुए हैं।
साइबर थाने में नामजद प्राथमिकी दर्ज
फर्जीवाड़े का खुलासा होते ही शिक्षा विभाग के प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई। गुरुवार को जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना शशि चंदन चौधरी स्वयं फर्जी लेनदेन के ब्योरे और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के साथ साइबर थाने पहुंचे। उन्होंने आरोपी ऑपरेटर अविनाश के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पुलिस को औपचारिक आवेदन सौंपा है।
ये भी पढ़ें- बिहार: किस आनंद मोहन, नीरज कुमार का पर्चा रद्द? पटना की स्नातक-शिक्षक MLC सीट पर बचे प्रत्याशियों का गणित क्या
बैंक खातों और सिंडिकेट की पड़ताल जारी
मामला दर्ज होने के बाद साइबर थाना पुलिस आरोपी के आईपी पते, लॉग-इन क्रेडेंशियल और फर्जी आईडी के माध्यम से जोड़े गए बैंक खातों की डिजिटल जांच में जुट गई है। पुलिस टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गबन की गई लगभग एक करोड़ रुपये की यह भारी राशि किन-किन खातों में स्थानांतरित की गई। इसके अलावा इस बात की भी जांच की जा रही है कि इस फर्जीवाड़े में शिक्षा विभाग के अन्य कर्मियों या अधिकारियों की मिलीभगत थी या नहीं। वहीं विभागीय स्तर पर भी पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित करने की तैयारी की जा रही है।
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इस पूरे फर्जीवाड़े में संविदा पर कार्यरत रहे कंप्यूटर ऑपरेटर की मुख्य भूमिका उजागर हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना ने आरोपी ऑपरेटर के खिलाफ साइबर थाने में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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विभागीय सूत्रों के अनुसार शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों के वेतन भुगतान और उनके डेटा प्रबंधन के लिए एक आधिकारिक डिजिटल सिस्टम बनाया गया था। आरोपी ने इसी प्रणाली में सेंधमारी करके फर्जी शिक्षक आईडी तैयार कीं और लंबे समय तक सरकारी खजाने से अवैध रूप से वित्तीय निकासी करता रहा।
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फर्जीवाड़े का ऐसे हुआ पर्दाफाश
यह पूरा मामला उस समय उजागर हुआ जब जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना शशि चंदन चौधरी शिक्षकों के वेतन भुगतान, सेवा पुस्तिका और बजट आवंटन से संबंधित फाइलों और डिजिटल रिकॉर्ड का मिलान कर रहे थे। गहन जांच और रिकॉर्ड के सत्यापन के दौरान उन्हें संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं। विस्तृत पड़ताल में स्पष्ट हुआ कि विभाग में संविदा पर तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश ने अपने पद और सिस्टम एक्सेस का अनुचित लाभ उठाते हुए कई फर्जी शिक्षक आईडी बनाई थीं।
जून के महीने में हटाया गया था ऑपरेटर
जांच प्रक्रिया के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपी ऑपरेटर अविनाश की कार्यशैली लंबे समय से संदिग्ध पाई गई थी। संदिग्ध गतिविधियों के कारण विभाग ने उसे इस वर्ष जून के महीने में ही काम से हटा दिया था। यद्यपि उसे पद से हटा दिया गया था, फिर भी उसके द्वारा सेवा में रहते हुए किए गए फर्जीवाड़े के डिजिटल साक्ष्य हाल ही में किए गए ऑडिट और रिकॉर्ड सत्यापन के दौरान उजागर हुए हैं।
साइबर थाने में नामजद प्राथमिकी दर्ज
फर्जीवाड़े का खुलासा होते ही शिक्षा विभाग के प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई। गुरुवार को जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना शशि चंदन चौधरी स्वयं फर्जी लेनदेन के ब्योरे और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के साथ साइबर थाने पहुंचे। उन्होंने आरोपी ऑपरेटर अविनाश के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए पुलिस को औपचारिक आवेदन सौंपा है।
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बैंक खातों और सिंडिकेट की पड़ताल जारी
मामला दर्ज होने के बाद साइबर थाना पुलिस आरोपी के आईपी पते, लॉग-इन क्रेडेंशियल और फर्जी आईडी के माध्यम से जोड़े गए बैंक खातों की डिजिटल जांच में जुट गई है। पुलिस टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गबन की गई लगभग एक करोड़ रुपये की यह भारी राशि किन-किन खातों में स्थानांतरित की गई। इसके अलावा इस बात की भी जांच की जा रही है कि इस फर्जीवाड़े में शिक्षा विभाग के अन्य कर्मियों या अधिकारियों की मिलीभगत थी या नहीं। वहीं विभागीय स्तर पर भी पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित करने की तैयारी की जा रही है।