Bihar: बांकीपुर के दो प्रत्याशी तय, भाजपा में चार दावेदार, राजद-कांग्रेस में रस्साकशी; अब तक नामांकन एक नहीं
Bankipur Vidhan Sabha : बिहार में एक सीट पर उप चुनाव होना है, लेकिन इस नाम पर महाभारत हर तरफ है। भाजपा में चक्रव्यूह रचा जा रहा है तो कांग्रेस-राजद में भौहें तन रहीं। पीके दावे ठोक रहे और तेज प्रताप ने ताल ठोक दिया है।
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बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। सोमवार को नामांकन के पहले दिन एक भी उम्मीदवार ने अपना नामांकन पत्र दाखिल नहीं किया। नामांकन की अंतिम तिथि 13 जुलाई निर्धारित की गई है। अब तक केवल दो राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा की है। इनमें जनशक्ति जनता दल ने वीणा मानवी को प्रत्याशी बनाया है, जबकि जन सुराज ने पार्टी संस्थापक प्रशांत किशोर को चुनावी मैदान में उतारा है।इधर, भारतीय जनता पार्टी ने अभी तक अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है। वहीं, महागठबंधन के घटक दल राजद और कांग्रेस दोनों इस सीट पर अपना दावा जता रहे हैं। हालांकि, दोनों दलों ने अब तक अपने प्रत्याशी के नाम की औपचारिक घोषणा नहीं की है। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव को लेकर लोगों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं। आइए जानते हैं उनके जवाब।
31 साल का गढ़ बचाने की तैयारी में भाजपा
बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। वर्ष 1995 से 2025 तक इस सीट पर भाजपा लगातार जीत दर्ज करती रही है। ऐसे में पार्टी एक बार फिर इस सीट को बरकरार रखने की तैयारी में जुटी है। हालांकि, भाजपा ने अभी तक अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है। पिछले सप्ताह प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के साथ बैठक कर संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा की। सूत्रों के अनुसार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के करीबी नील रतन घोष (नीलू दा) का नाम सबसे आगे चल रहा है। नीलू दा पटना के मंदिरी इलाके के निवासी हैं और नितिन नवीन के पिता नवीन किशोर सिन्हा के भी करीबी सहयोगी रहे हैं। वे गोलघर मंडल के दो बार अध्यक्ष रह चुके हैं और पार्टी में उनकी साफ-सुथरी छवि मानी जाती है। इसके अलावा भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक, बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष रणवीर नंदन और पूर्व विधायक अरुण सिन्हा के पुत्र आशीष सिंह के नाम भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल बताए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक आशुतोष कुमार का कहना है कि बांकीपुर भाजपा की पारंपरिक सीट रही है। यहां पार्टी का मजबूत कैडर वोट बैंक है। यदि भाजपा सही उम्मीदवार का चयन करती है तो उसके लिए सीट बचाना मुश्किल नहीं होगा। उनके अनुसार, इस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा का वोट शेयर 63 प्रतिशत से अधिक रहा है।
महागठबंधन में सीट को लेकर बढ़ा मतभेद
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे पर मतभेद उभरने लगे हैं। राष्ट्रीय जनता दल के बाद अब कांग्रेस ने भी इस सीट पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है। कांग्रेस प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने कहा कि बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ रहा है। इसलिए इस सीट पर कांग्रेस का दावा स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि उम्मीदवार के चयन का निर्णय इंडिया गठबंधन के सभी सहयोगी दलों की सहमति से होना चाहिए। दूसरी ओर, राजद भी इस सीट पर अपना दावा छोड़ने के पक्ष में नहीं है। राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि बांकीपुर से राजद ही अपना उम्मीदवार उतारेगी। उन्होंने तर्क दिया कि पिछले विधानसभा चुनाव में भी महागठबंधन की ओर से राजद ने रेखा कुमारी को उम्मीदवार बनाया था। इसी आधार पर पार्टी इस बार भी अपना दावा मजबूत मान रही है।
त्रिकोणीय मुकाबले को कितना रोचक बना पाएंगे तेज प्रताप यादव?
अब तक जिन दो दलों ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है, उनमें से एक दल पूर्व मंत्री और लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की जनशक्ति जनता दल है। पार्टी ने वीणा मानवी को चुनाव मैदान में उतारा है। वीणा मानवी का कहना है कि वह पिछले 12 वर्षों से बांकीपुर क्षेत्र में रहकर महिलाओं और जरूरतमंद लोगों के बीच सामाजिक कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा, "मैंने माता-बहनों की सेवा और समाज कल्याण के कार्यों को प्राथमिकता दी है। हमारी पार्टी का घोषणा-पत्र अन्य दलों से अलग है। हम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के उद्देश्य से चुनाव लड़ रहे हैं।" वीणा मानवी ने चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया है और पार्टी कार्यकर्ता लगातार क्षेत्र में जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं।
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क्या बोले जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर?
जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर उपचुनाव में जीत और हार का फैसला पूरी तरह जनता के हाथ में है। उन्होंने कहा, "अगर जीत-हार हमारे हाथ में होती तो पिछले विधानसभा चुनाव में जन सुराज को हार का सामना नहीं करना पड़ता। हमारा काम ईमानदारी से जनता के सामने एक विकल्प रखना है। अब यह जनता तय करेगी कि वह हमें चुनती है या किसी अन्य दल को।" प्रशांत किशोर ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा ने नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारी दी, लेकिन इसके लिए विधायक पद से इस्तीफा देना आवश्यक नहीं था। उन्होंने कहा, "ऐसा कोई नियम नहीं है कि भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद विधानसभा की सदस्यता छोड़नी पड़े। लेकिन उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता स्वीकार की। ऐसे में बांकीपुर का यह उपचुनाव भाजपा के नेतृत्व और उसकी नीतियों पर जनता की राय जानने का अवसर भी होगा।"