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Bihar: बिहार में निजी अस्पतालों पर सख्ती, अब 40 बेड वाले संस्थानों के लिए भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य; जानिए मामला

Mon, 06 Jul 2026 03:59 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आदित्य आनंद Updated Mon, 06 Jul 2026 03:59 PM IST
सार

पटना समेत बिहार के कई जिलों में बिना रजिस्ट्रेशन के अस्पताल चला रहे संचालकों के लिए काम की खबर है। अब उन्हें हर हाल में अपने निजी अस्पताल का रजिस्ट्रेशन करवाना है। सरकार की ओर से तय किए गए मानकों पर भी खड़ा उतरना होगा। इसके बाद ही वह अस्पताल चला सकते हैं। 

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Bihar: New rule for private hospitals in Bihar; registration mandatory even for facilities with 1 to 40 beds.
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार में प्राइवेट अस्पताल और क्लीनिक चलाना अब आसान नहीं रह गए। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के कमान संभालने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार लाने की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। अब बिहार में बिना अनुमति संचालित निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम पर जल्द ही व्यापक कार्रवाई शुरू हो सकती है। राज्य सरकार ने छोटे निजी स्वास्थ्य संस्थानों को भी नियामक दायरे में लाने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए एक से 40 बेड तक के अस्पतालों, नर्सिंग होम और क्लीनिकों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने नई व्यवस्था की जानकारी न्यायालय के समक्ष भी रखी है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब केवल बड़े निजी अस्पताल ही नहीं, बल्कि कम बेड क्षमता वाले अस्पताल, डे-केयर सेंटर, मैटरनिटी होम और अन्य निजी चिकित्सा संस्थानों को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होगा। 

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हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान दी गई जानकारी
दरअसल, भोजपुर जिले से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने अदालत को बताया कि छोटे निजी स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों के रजिस्ट्रेशन के लिए नई नियमावली लागू कर दी गई है। अदालत ने इस पर संतोष जताते हुए कहा कि नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अदालत के आदेश के बाद आम लोग बिना निबंधन वाले अस्पताल संचालकों पर कार्रवाई की मांग करने लगे। हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, भागलपुर, मुंगेर, पूर्णिया, सहरसा, किशनगंज, बेगूसराय, गया समेत कई शहरों में दर्जनों निजी अस्पताल ऐसे हैं, जिनका अब तकरजिस्ट्रेशन नहीं हुआ है। कुछ जगहों पर तो कपांउडर फर्जी एमबीबीएस डिग्री दिखाकर डॉक्टर बनकर अस्पताल चला रहे हैं। इन जगहों पर मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ हो रहा है। 
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बिना रजिस्ट्रेशन अस्पताल चलाने पर होगी कार्रवाई
इन्हीं सब मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना रजिस्ट्रेशन संचालित होने वाले किसी भी निजी अस्पताल या नर्सिंग होम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों को ऐसे संस्थानों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाएंगे। साथ ही नए अस्पतालों को भी संचालन शुरू करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट कहा है कि रजिस्ट्रेशन प्राप्त कर लेने के बाद भी अस्पतालों को निर्धारित मानकों का पालन करना होगा। समय-समय पर निरीक्षण के माध्यम से यह देखा जाएगा कि संस्थान आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं, सुरक्षा मानक और अन्य नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। किसी भी तरह की अनियमितता मिलने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
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राज्यभर के निजी अस्पतालों का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड
नई व्यवस्था के लागू होने से स्वास्थ्य विभाग के पास राज्य के सभी निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम का एक समेकित डाटाबेस तैयार होगा। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किस जिले में कितने निजी स्वास्थ्य संस्थान संचालित हैं, उनकी क्षमता क्या है और वे तय मानकों के अनुरूप सेवाएं दे रहे हैं या नहीं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि नई नियमावली का उद्देश्य निजी स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और बिना अनुमति संचालित संस्थानों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।

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