{"_id":"64587d72367b338b830d66d1","slug":"anand-mohan-hearing-in-supreme-court-today-against-release-petition-filed-by-late-ias-s-wife-2023-05-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Anand Mohan Singh : कानून बदल कर जेल से रिहा करने पर सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश सरकार से दो हफ्ते में मांगा जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Anand Mohan Singh : कानून बदल कर जेल से रिहा करने पर सुप्रीम कोर्ट ने नीतीश सरकार से दो हफ्ते में मांगा जवाब
Mon, 08 May 2023 01:07 PM IST
आदित्य आनंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आदित्य आनंद
Updated Mon, 08 May 2023 01:07 PM IST
सार
Supreme Court India : बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई के विरोध में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेके माहेश्वरी की बेंच में इस मामले में सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में बिहार सरकार से जवाब जवाब मांगा है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
बाहुबली और पूर्व सांसद आनंद मोहन की रिहाई के विरोध में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने बिहार सरकार और आनंद मोहन को नोटिस करते हुए इस मामले पर दोनों से जवाब मांगा है। कोर्ट ने इस मामले में 2 हफ्ते में जवाब देने का निर्देश दिया है। साथ ही बिहार सरकार को रिहाई से जुड़े रिकॉर्ड देने को भी कहा है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जेके माहेश्वरी की बेंच में इस मामले में सुनवाई की।
आनंद मोहन के खिलाफ कोर्ट में दिवंगत IAS अधिकारी जी कृष्णैय्या की पत्नी उमा देवी ने याचिका दायर की है। उमा देवी ने आनंद मोहन की रिहाई को लेकर बिहार सरकार द्वारा कानून में किए गए संशोधन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। 3 मई को उमा कृष्णैय्या ने कहा कि मुझे न्यायपालिका पर भरोसा है। वह जरूर इस केस में न्याय करेंगे। उनका कहना है कि जब आनंद मोहन को आजीवन कारावास की सजा हुई तो उनकी रिहाई 15 साल में कैसे हो गई। कोर्ट से अपील है कि वह मामले पर गंभीरता से विचार करे। दिवंगत IAS कृष्णैय्या की बेटी ने भी रिहाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
IAS अफसरों के मनोबल पर काफी असर पड़ा
उमा कृष्णैय्या ने याचिका दायर करने के सवाल पर कहा कि हमने व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर नहीं की है बल्कि IAS अफसरों ने की है। मैं यह लड़ाई नहीं लड़ रही, क्योंकि हमें सपोर्ट करने वाला कोई नहीं है। उमा कृष्णैय्या ने स्पष्ट कहा कि मुझे नीतीश सरकार से कुछ नहीं चाहिए। सरकार आनंद मोहन की रिहाई पर फिर से विचार करे। इस फैसले से IAS अफसरों के मनोबल पर काफी असर पड़ा है।
विज्ञापन
बिहार सरकार ने नियमों में बदलाव कर दी रिहाई
बिहार सरकार ने 10 अप्रैल को बिहार जेल मैनुअल 2012 में बदलाव किया था। इसके तहत सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान हत्या को भी सामान्य हत्याकांड की तरह कर दिया गया। पहले प्रावधान था कि सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान हत्या करने वालों को रिहाई में छूट नहीं मिलेगी। इस बदलाव के बाद आनंद मोहन की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया था। इसके बाद 27 अप्रैल को आनंद मोहन को सहरसा जेल से रिहा कर दिया गया। आनंद मोहन की रिहाई पर विपक्षी पार्टियां भी खुलकर सामने नहीं आईं। नियमों में बदलाव को लेकर पटना हाईकोर्ट में भी जनहित याचिका दायर हुई थी।
विज्ञापन
आनंद मोहन के खिलाफ कोर्ट में दिवंगत IAS अधिकारी जी कृष्णैय्या की पत्नी उमा देवी ने याचिका दायर की है। उमा देवी ने आनंद मोहन की रिहाई को लेकर बिहार सरकार द्वारा कानून में किए गए संशोधन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। 3 मई को उमा कृष्णैय्या ने कहा कि मुझे न्यायपालिका पर भरोसा है। वह जरूर इस केस में न्याय करेंगे। उनका कहना है कि जब आनंद मोहन को आजीवन कारावास की सजा हुई तो उनकी रिहाई 15 साल में कैसे हो गई। कोर्ट से अपील है कि वह मामले पर गंभीरता से विचार करे। दिवंगत IAS कृष्णैय्या की बेटी ने भी रिहाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
विज्ञापन
IAS अफसरों के मनोबल पर काफी असर पड़ा
उमा कृष्णैय्या ने याचिका दायर करने के सवाल पर कहा कि हमने व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर नहीं की है बल्कि IAS अफसरों ने की है। मैं यह लड़ाई नहीं लड़ रही, क्योंकि हमें सपोर्ट करने वाला कोई नहीं है। उमा कृष्णैय्या ने स्पष्ट कहा कि मुझे नीतीश सरकार से कुछ नहीं चाहिए। सरकार आनंद मोहन की रिहाई पर फिर से विचार करे। इस फैसले से IAS अफसरों के मनोबल पर काफी असर पड़ा है।
विज्ञापन
बिहार सरकार ने नियमों में बदलाव कर दी रिहाई
बिहार सरकार ने 10 अप्रैल को बिहार जेल मैनुअल 2012 में बदलाव किया था। इसके तहत सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान हत्या को भी सामान्य हत्याकांड की तरह कर दिया गया। पहले प्रावधान था कि सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी के दौरान हत्या करने वालों को रिहाई में छूट नहीं मिलेगी। इस बदलाव के बाद आनंद मोहन की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया था। इसके बाद 27 अप्रैल को आनंद मोहन को सहरसा जेल से रिहा कर दिया गया। आनंद मोहन की रिहाई पर विपक्षी पार्टियां भी खुलकर सामने नहीं आईं। नियमों में बदलाव को लेकर पटना हाईकोर्ट में भी जनहित याचिका दायर हुई थी।