Bihar News: मनमानी की वजह से आंगनबाड़ी केंद्रों से नौनिहालों को नहीं मिल रहा लाभ; लोगों ने लगाए गंभीर आरोप
Gopalganj Hindi News: स्थानीय लोगों ने बताया कि केंद्र कब खुलता है और कब बंद होता है, किसी को कुछ पता नहीं चलता है। पोषाहार वितरण के दौरान तौल मशीन के स्थान पर डिब्बे से नापकर मनमानी तरीके से अनाज और अन्य पोषाहार की घट-तौली की जाती है। पढ़ें पूरी खबर...।
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बिहार के गोपालगंज जिले के उचकागांव प्रखंड क्षेत्र में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। लोगों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं सहित बच्चों को समुचित लाभ नहीं मिल रहा है। अधिकतर आंगनबाड़ी केंद्र समय पर नहीं खुलते हैं। कुछ खुलते भी हैं तो बच्चों की उपस्थिति कम रहती है। दरअसल, आरोप है कि बैरिया दुर्ग पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 59 पर महज 17 बच्चे ही मौजूद थे। सेविका-सहायिका केंद्र पर उपस्थित थीं। लेकिन गैस खत्म होने का बहाना बनाते हुए बच्चों के लिए केंद्र पर पोषाहार नहीं बनाया गया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि केंद्र कब खुलता है और कब बंद होता है, किसी को कुछ पता नहीं चलता है। पोषाहार वितरण के दौरान तौल मशीन के स्थान पर डिब्बे से नापकर मनमानी तरीके से अनाज और अन्य पोषाहार की घट-तौली की जाती है। सेविका ने कहा कि टीएचआर के रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने और ऑफिस खर्च के नाम पर तीन हजार रुपये की वसूली की जाती है। इसी प्रकार एक अन्य आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तीन हजार रुपये की वसूली की जाती है।
14 पंचायतों में संचालित हैं 187 आंगनबाड़ी केंद्र
उचकागांव प्रखंड की 14 पंचायतों में कुल 187 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें छह मिनी केंद्र शामिल हैं। इस प्रकार 187 सेविकाएं केंद्रों को संचालित करने के काम जुटी हैं। इतने ही पद सहायिकाओं के भी सृजित हैं। प्रखंड क्षेत्र में सेविका के 12 और सहायिका के आठ पद रिक्त हैं। आरोप है कि जिन केंद्रों पर सेविका के पद रिक्त हैं, वहां समीपवर्ती सेविका को प्रभार देकर पोषाहार के राशि की चोरी की जाती है। 187 केंद्रों में से 83 केंद्रों के पास अपना भवन है। जबकि 64 केंद्र किराए के भवन में चल रहे हैं। 38 केंद्र सरकारी भवनों में संचालित हो रहे हैं। जमीन की कमी के कारण केंद्रों को अपना भवन नहीं नसीब हो पा रहा है।
सामान्य व मिनी आंगनबाड़ी केंद्र को अलग-अलग मिलती है राशि
प्रखंड के सामान्य व मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों को टीएचआर के लिए अलग-अलग राशि मिलती है। मिनी केंद्र को 5,831 तो सामान्य केंद्र को 11,662 रुपये की राशि दी जाती है। जबकि चावल की आपूर्ति अलग से की जाती है। प्रत्येक केंद्र पर 40 बच्चों का नामांकन किया जाना है। टीएचआर में प्रसूता, गर्भधात्री, कुपोषित और अति कुपोषित बच्चों को पोषाहार देना है। 187 आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी के लिए चार पर्यवेक्षिकाओं की तैनाती की गई है। इन्हें माह में 25 दिन केंद्र पर जाकर निगरानी करनी है।
‘ऑफिस में भ्रष्टाचार का बोलबाला’
सेविकाओं का कहना है कि उचकागांव बाल विकास परियोजना कार्यालय में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। यहां पर कई दलाल किस्म के लोग हमेशा मौजूद रहते हैं, जिन्हें देखने वाला कोई नहीं रहता है। इस कारण यहां खुलकर मनमानी होती है।
उचकागांव की प्रभारी सीडीपीओ आशा किरण ने कहा कि अवैध वसूली की बात गलत है। आंगनबाड़ी केंद्रों की लचर व्यवस्था और पोषाहार वितरण में गड़बड़ी के मामले में जांच की जाएगी।