बिहार: आरक्षण के लाभ पर शिक्षा मंत्री बोले- संपन्न परिवारों के बच्चों को दायरे से बाहर रखने पर हो विचार
बिहार में आरक्षण को लेकर जारी सियासी बहस के बीच शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि सामाजिक और आर्थिक रूप से संपन्न हो चुके परिवारों के बच्चों को आरक्षण के लाभ से बाहर रखने पर विचार किया जाना चाहिए।
-
- 1
-
Link Copied
विस्तार
बिहार में आरक्षण व्यवस्था को लेकर जारी सियासी बयानबाजी के बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्य के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने बड़ा बयान दिया है। दरभंगा से एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रवाना होकर हाजीपुर पहुंचे शिक्षा मंत्री का स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरक्षण के मौजूदा स्वरूप, इसके दायरे और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर चल रही बयानबाजी पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जो परिवार सामाजिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह संपन्न हो चुके हैं, उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ देने के मुद्दे पर विचार होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने संविधान में निर्धारित मौजूदा आरक्षण व्यवस्था को परिपक्व, न्यायसंगत और वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने वाली व्यवस्था बताया।
संपन्न परिवारों के बच्चों को आरक्षण से बाहर रखने की पैरवी
आरक्षण के व्यावहारिक पहलुओं पर अपनी राय रखते हुए शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि जो लोग या परिवार सामाजिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह संपन्न हो चुके हैं, उनके बच्चों को आरक्षण के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि आरक्षण का उद्देश्य समाज के वंचित और जरूरतमंद तबकों को आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है।
इसके साथ ही उन्होंने भारतीय संविधान में स्थापित आरक्षण व्यवस्था का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत लागू मौजूदा आरक्षण व्यवस्था अपने आप में परिपक्व, न्यायसंगत और सर्वसमावेशी है। यह व्यवस्था समाज के वंचित तबके को मुख्यधारा से जोड़ने का मजबूत आधार है।
चिराग पासवान और हम नेताओं की बयानबाजी पर दी नसीहत
आरक्षण के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सुमन तथा पार्टी के संरक्षक जीतन राम मांझी के बीच हाल में हुई बयानबाजी पर भी शिक्षा मंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ये सभी अपने-अपने दलों के कद्दावर, वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं।
मिथिलेश तिवारी ने कहा कि दो शीर्ष नेताओं के बीच किसी विषय को लेकर वैचारिक बहस या बयानबाजी हो रही हो तो किसी अन्य दल के नेता या तीसरे पक्ष को उसमें हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। उनका मानना है कि इससे अनावश्यक रूप से राजनीतिक विवाद को तूल मिलने से रोका जा सकता है।
एनडीए में दरार की बात को किया खारिज
सहयोगी दलों के नेताओं के अलग-अलग बयानों के कारण एनडीए में मतभेद की अटकलों को भी शिक्षा मंत्री ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि गठबंधन में किसी प्रकार की कोई दरार नहीं है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक ही मुद्दे पर अलग-अलग नेताओं के अपने व्यक्तिगत विचार हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गठबंधन के भीतर मतभेद हैं।
उन्होंने कहा कि विचारों में विविधता के बावजूद एनडीए पूरी तरह एकजुट है और गठबंधन के सभी घटक दल आपसी सामंजस्य के साथ राज्य के विकास के लिए काम कर रहे हैं। हाजीपुर पहुंचने के दौरान शिक्षा मंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय समर्थकों से मुलाकात की और उनका अभिवादन स्वीकार किया। इसके बाद वह अपने निर्धारित निजी कार्यक्रम के लिए आगे रवाना हो गए। उनके बयान के बाद बिहार में आरक्षण के दायरे और इसके लाभ को लेकर एक बार फिर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।