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Hindi News ›   Bihar ›   After chandrashekar backward-forward politics on Ramcharitmanas, RJD's Woman leader burnt Manusmriti

Bihar : लालू के राजद की महिला प्रकोष्ठ सचिव 'मनुस्मृति' की आग पर मीट पका रही, सिगरेट फूंक रही

Tue, 07 Mar 2023 02:13 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज डेस्क,अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, पटना Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण Updated Tue, 07 Mar 2023 02:13 PM IST
सार

पहले राष्ट्रीय जनता दल कोटे से बिहार के शिक्षा मंत्री ने RAMCHARIT MANAS को लेकर बैकवर्ड-फॉरवर्ड की खाई को बढ़ाने का प्रयास किया और अब राजद की महिला प्रकोष्ठ की एक सचिव का बेहद आपत्तिजनक वीडियो सामने आया है। 

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After chandrashekar backward-forward politics on Ramcharitmanas, RJD's Woman leader burnt Manusmriti
राजद कोटे के मंत्री के बाद अब संगठन की नेत्री के रवैए को विवादित माना जा रहा है। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पहले राष्ट्रीय जनता दल कोटे से बिहार के शिक्षा मंत्री ने रामचरितमानस को लेकर बैकवर्ड-फॉरवर्ड की खाई को बढ़ाने का प्रयास किया और अब राजद की महिला प्रकोष्ठ की एक सचिव का बेहद आपत्तिजनक वीडियो सामने आया है। राजद महिला प्रकोष्ठ की सचिव प्रिया दास का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह 'मनुस्मृति’ को जलाकर उसकी आग पर मीट पका रही है। वह उसकी आग से ही सिगरेट का धुआं भी उड़ा रही है।

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शिक्षक बनने की तैयारी के साथ राजनीति
मिट्टी के चूल्हे पर मीट बनाने के क्रम में लकड़ियों के साथ मनुस्मृति पुस्तक को जलाना और इस ग्रंथ की आग से सिगरेट जलाने वाली महिला बिहार के शेखपुरा की रहने वाली है। इन तस्वीरों में यह दिख रहा है कि प्रिया मिट्टी के चूल्हे पर मीट बना रही है। फिर वह मनुस्मृति को चूल्हे में जलाने लगती है। प्रिया दास राजद महिला प्रकोष्ठ की सचिव है और अभी रोजगार के लिए टीचर्स ट्रेनिंग कर रही है। यह शिक्षक बनेगी। इस महिला की कुछ तस्वीरें उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के साथ भी देखी गई हैं।
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मनुस्मृति को जलाने का दिया तर्क 
मीट बनाने के क्रम में मनुस्मृति को जलाने के पीछे महिला का तर्क है कि यह एक घटिया किताब है। प्रिया के अनुसार- "यह किताब समाज को जोड़ने वाली नहीं, बल्कि तोड़ने वाली है। किताब का मकसद शिक्षा देना होता है, ज्ञान देना होता है। यह किताब बच्चे के जन्म के पहले ही उसकी जाति और उसके कामकाज तय करती है। यह किताब किसी जाति को भगवान तुल्य बताती है और किसी को हीन भाव से देखती है। समाज में विभेद पैदा करती है। इस किताब में पुरुष को भगवान और स्त्री को भोग की वस्तु कहा गया है।"
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