फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   according to AsI their is no land for Excavation in bihar

तो उत्खनन लायक बिहार में कोई जमीन नहीं!

Fri, 08 Jan 2016 03:45 AM IST
Updated Fri, 08 Jan 2016 03:45 AM IST
विज्ञापन
according to AsI  their is no land for Excavation in bihar

बिहार में पुरातत्विक महत्व के चाहे जितने स्थल हो, लेकिन उत्खनन लायक कोई जमीन नहीं है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) का उत्खनन शाखा बिहार से अपना बोरिया-बिस्तर समेटने लगा है। ताजा आदेश के अनुसार एएसआइ इस साल बिहार में कहीं भी उत्खनन कार्य नहीं करने जा रहा है।

विज्ञापन


इस बात को लेकर बिहार के पुराविदों में आक्रोश है और वो एएसआइ के इस कदम को न केवल बिहार के पुरातत्विक स्थलों की उपेक्षा मान रहे हैं, बल्कि उनका कहना है कि यह बिहार के प्रति एएसआइ का दुराग्रहपूर्ण नीति है। उल्लेखनीय है कि जिस रिपोर्ट के नहीं आने से उत्खनन कार्य को बंद करने का आदेश दिया गया है, वो रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी भी आदेश देनेवाले पदाधिकारी के जिम्मे ही थी।
विज्ञापन


ऐसे में पुराविदों का कहना है कि जिन्होंने समय पर रिपोर्ट नहीं दिया, वो अपनी लापरवाही स्वीकार करने के बदले उलटा उत्खनन कार्य को ही बंद करने का आदेश पारित किया है, जो दुर्भावनापूर्ण है। जानकारों का यह भी कहना है कि जिस प्रतिवेदन का बहाना बना कर बिहार में उत्खनन कार्य रोका गया है, इस आधार पर किसी दूसरे राज्य में इस काम को नहीं रोका गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

एएसआई सफेद हाथी

according to AsI  their is no land for Excavation in bihar

उत्तर प्रदेश के मलहर, राजानगर और लहुरादेवा का उत्खनन कार्य बिना प्रतिवेदन प्रस्तुत किये ही कराया गया। इस संबंध में पिछले दिनों पटना संग्रहालय में पुराविदों की एक बैठक भी हुई। इसमें बैठक में एएसआइ को सफेद हाथी करार देते हुए कहा गया कि यह बिहार में उत्खनन, संरक्षण या सर्वेक्षण कोई भी काम नहीं कर रहा है।

वक्ताओं का कहना था कि एएसआइ न तो खुद कर रहा था और ना दूसरों को करने दे रहा है। ऐसे बिहार में का इतिहास दुनिया के सामने नहीं आ पा रहा है। मालूम हो कि एएसआइ की स्थापना के बाद 1938 में बिहार का बलिराजगढ पहला संरक्षित स्थल बना, जहां 1962 में उत्खनन का कार्य प्रारंभ हुआ। यहां अब तक रुक-रुक कर तीन बार कुछ-कुछ दिनों के लिए उत्खनन का कार्य हुआ है।

विश्व के ज्ञात इतिहास को बदल देते के पुख्ता सबूत मिलने के बावजूद बलिराजगढ में उत्खनन का काम एक बार फिर रोक दिया गया है। इसी प्रकार तेल्हाडा(नालंदा), चौसा(बक्सर), कुटंबा(औरंगावाद) और चेचर(वैशाली) जैसे महत्वपूर्ण स्थलों पर भी उत्खनन कार्य नहीं होंगे। नालंदा के रुक्मिणी स्थल समेत सभी उत्खनन स्थलों पर काम बंद कर दिया गया है।

एएसआई पर लगा आरोप

according to AsI  their is no land for Excavation in bihar

बिहार हिस्ट्री कांग्रेस के उपाध्यक्ष डा चितरंजन सिन्हा ने एएसआइ की इस कार्रवाई को दुराग्रहपूर्ण और आश्चर्यजनक बताया है। श्री सिन्हा कहते हैं कि यह काम उस कालखंड में रोका गया है जब राज्य के मुख्यमंत्री न केवल उत्खनन को लेकर जिज्ञासू हैं, बल्कि तमाम स्थलों का भ्रमण कर उत्खान कार्य में तेजी लाने का अनुरोध कर चुके हैं।


बिहार पुराविद परिषद के महासचिव डा उमेश चंद्र द्विवेदी ने इस प्रकार काम को बीच में रोक देने से पहले किये गये उत्खनन अनर्थक हो जायेंगे।

उत्खनन कार्य कब शुरु किया जाये और कब बंद किया जाये, अधिकार उत्खननकर्ता के पास होता है। एएसआइ को उत्खनन पूरा हो यह सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि एएसआइ के पास सबसे ज्यादा लंबित परियोजना बिहार से ही है, इसके बावजूद इस प्रकार की कार्रवाई अचंभित करनेवाली है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed