निर्विरोध निर्वाचित हुए बिहार विधान परिषद के लिए नामांकन भरने वाले सभी नौ उम्मीदवार
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बिहार विधान परिषद की खाली नौ सीटों के लिए नामांकन भरने वाले सभी नौ उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं। बिहार विधानसभा सचिव बटेश्वर नाथ पांडेय ने विधान परिषद के लिए निर्विरोध निर्वाचित जदयू के तीन, भाजपा के दो, राजद के तीन और कांग्रेस के एक उम्मीदवार को जीत का प्रमाणपत्र दिया। आज नाम वापसी के आखिरी दिन समयसीमा समाप्त होते ही सभी नौ उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित होने की घोषणा कर दी गई।
सत्ताधारी जदयू जेदयू से गुलाम गौस, भीष्म साहनी और डॉ. कुमुद वर्मा निर्विरोध निर्वाचित घोषित हुए, जबकि भाजपा से संजय मयूख और सम्राट चौधरी चुने गए। राजद के खाते से फारुख शेख, सुनील कुमार सिंह और रामबली सिंह और कांग्रेस के समीर कुमार सिंह भी निर्विरोध निर्वाचित हुए। विधान परिषद की खाली नौ सीटों के लिए कुल नौ उम्मीदवार ही मैदान में थे, इसलिए सभी को निर्विरोध घोषित किया गया।
आधी सीटें जीतने के बाद भी जदयू को बढ़त
विधान परिषद सीटों में आधी सीटें जीतने के बावजूद जदयू को बढ़त हासिल हुई। ऐस पिछले हफ्ते आरजेडी में फूट के कारण पार्टी में शामिल हुए पांच एमएलसी के कारण हुआ। मालूम हो कि जदयू ने अपने छह उम्मीदवारों को दोबारा मौका नहीं दिया था। वहीं भाजपा ने संजय मायुख पर लगातार दूसरी बार भरोसा जताया।
बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए जल्दबाजी में बदली चुनावी प्रक्रिया: येचुरी
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर राजनीतिक दलों से विचार विमर्श किए बिना चुनाव प्रक्रिया में बदलाव करने पर विरोध जताया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह जल्दबाजी बिहार विधानसभा चुनावाें के कारण है?
येचुरी ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स से पता चल रहा है कि अब 64 वर्ष से अधिक के लोगों को पोस्टल बैलट की सुविधा मिलेगी। निर्वाचन आयोग ने इसके लिए किसी राजनीतिक दल से चर्चा की है क्या? ऐसी जानकारी तो नहीं।
उन्होंने पूछा क्या निर्वाचन आयोग दलों से चर्चा करने की व्यवस्था को खत्म कर सभी फैसले मनमाने ढंग से लेना चाहता है? गौरतलब है कि बुजुर्ग मतदाताओं को संक्रमण की चपेट में आने के खतरे को देखते हुए आयोग ने पोस्ट बैलेट के लिए आयुसीमा को 80 से घटाकर 65 करने का फैसला लिया है।
येचुरी ने कहा, संविधान के तहत भी अनुच्छेद 324 में निर्वाचन आयोग को सख्त निर्देश हैं कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह के परिवर्तन से पहले राजनीतिक दलों से विचार विमर्श करना होगा, वह अकेले कोई फैसला नहीं कर सकता। लेकिन इस बार आयोग ने बिना किसी सूचना और सलाह के यह फैसला लिया है।