{"_id":"5831b0c44f1c1bb604b39854","slug":"bhopal-gaskand-the-prosecution-order-of-former-collector-sp","type":"story","status":"publish","title_hn":"भोपाल गैसकांड: पूर्व कलेक्टर-एसपी पर मुकदमा चलाने का आदेश ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भोपाल गैसकांड: पूर्व कलेक्टर-एसपी पर मुकदमा चलाने का आदेश
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 20 Nov 2016 07:52 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : getty images
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भोपाल गैस त्रासदी के तीन दशक बाद एक स्थानीय अदालत ने यूनियन कार्बाइड लिमिटेड (यूसीएल) के चेयरमैन वारेन एंडरसन को देश से भगाने में मदद करने के आरोपी तत्कालीन कलेक्टर मोती सिंह और सेवानिवृत्त पुलिस अधीक्षक स्वराज पुरी पर मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
कनेक्टिकट, अमेरिका के निवासी एंडरसन इस मामले की सुनवाई के दौरान कभी भोपाल की अदालत में पेश नहीं हुए जिन्हें विश्व की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी का मुख्य आरोपी माना गया था। लिहाजा उन्हें भगोड़ा घोषित किया गया और 2013 में उनकी मृत्यु भी हो गई थी। भोपाल के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी भुभास्कर यादव ने शनिवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि तत्कालीन आईएएस अधिकारी मोती सिंह और पूर्व आईपीएस अधिकारी स्वराज पुरी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 212 (अपराधी को संरक्षण देना), 217 (सरकारी अधिकारी होने के नाते अपराधी को गिरफ्तार करने की बाध्यता के बावजूद जान-बूझकर लापरवाही बरतना) के तहत मुकदमा चलाया जाना चाहिए। अदालत ने सिंह और पुरी को 8 दिसंबर को निर्धारित अगली सुनवाई के लिए बुलाया है।
विज्ञापन
सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल जब्बार ने इन दोनों पूर्व अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। याचिका में उन्होंने कहा कि इन दोनों अधिकारियों ने एंडरसन को देश से सुरक्षित भाग निकलने में मदद की थी। न्यायाधीश ने कहा, ‘पहली नजर में यह इस बात का प्रमाण है कि भोपाल में जहरीली गैस लीक होने से हुई इस दुर्घटना के कारण हजारों लोग मारे गए और कलेक्टर तथा एसपी जैसे जिले के शीर्ष अधिकारी पीड़ितों की मदद करने के बजाय एक अपराधी को भगाने के लिए सभी हथकंडे अपनाने में लगे हुए थे।’
विज्ञापन
सीजेएम ने कहा, ‘एंडरसन की सुरक्षा के लिए सुनियोजित साजिश के तहत उन्होंने अपराधी को न सिर्फ भागने का मौका दिया बल्कि देश से भागने में मदद करते हुए संसाधन भी उपलब्ध कराए।’ भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्टरी से 3 दिसंबर 1984 को जहरीली गैस लीक होने से 10 हजार से अधिक लोग मारे गए थे जबकि हजारों लोग घायल हुए थे। फैक्टरी के मालिक एंडरसन अमेरिका से भोपाल आकर बसे थे। इस मामले में गिरफ्तारी के कुछ घंटों बाद ही उन्हें पुलिस ने जमानत दे दी थी। आरोप है कि हिरासत में रहते हुए उन्होंने लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल किया और अपने संपर्कों के दम पर जमानत पर रिहा हो गए।
