प्रदूषण को कम करने के लिए सरकार लगातार कोशिश कर रही है। हर साल ठंड की शुरूआत से पहले दिल्ली एनसीआर जैसे कई बड़े शहरों में प्रदूषण काफी ज्यादा बढ़ जाता है। बढ़ता प्रदूषण सभी के लिए समस्या बन जाता है। कार, बाइक और स्कूटर जैसे वाहनों से भी प्रदूषण काफी ज्यादा होता है। वाहन चलाने वाले कई लोगों को इस बात की भी जानकारी नहीं होती कि इस सर्टिफिकेट को कहां से लिया जाए। अगर आपको भी इसकी जानकारी नहीं है तो इस खबर में हम आपको बता रहे हैं कि कैसे ये सर्टिफिकेट आपकी कार के लिए जरूरी है और इसे कहां से बनवाया जा सकता है।
क्या होता है PUC
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पीयूसी क्या होता है
- फोटो : सोशल मीडिया
हवा के प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए सभी तरह के वाहनों के लिए PUC सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। इस सर्टिफिकेट को तब जारी किया जाता है जब कोई वाहन सरकार की ओर से तय किए मानकों से ज्यादा प्रदूषण ना करे। पीयूसी का पूरा नाम पल्यूशन अंडर कंट्रोल है लेकिन आमतौर पर लोग इसे पीयूसी के नाम से ज्यादा जानते हैं।
कौन करता है जारी
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पीयूसी कहां मिलता है
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देश के हर छोटे-बड़े शहरों में सभी जगहों पर पेट्रोल पंप होते हैं। इन पेट्रोल पंप पर ही प्रदूषण जांच केंद्र होता है। जिस राज्य में ये केंद्र होता है उसे वहीं के स्थानीय ट्रांसपोर्ट विभाग की ओर से पीयूसी देने के लिए अधिकृत किया जाता है।
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किसके लिए होता है जरूरी
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पीयूसी क्या है
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सड़क पर चलने वाले सभी तरह के वाहनों के लिए पीयूसी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। पेट्रोल, डीजल या सीएनजी से चलने वाली निजी कार, स्कूटर, बाइक हों या फिर कमर्शियल कार, बस, ट्रक, बाइक, तिपहिया वाहन सभी के लिए पीयूसी जरूरी है।
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कैसे होती है जांच
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पीयूसी क्या है
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प्रदूषण जांच केंद्र पर एक कम्प्यूटर से जुड़ा एक गैस एनालाइजर होता है। इसी के साथ एक कैमरा और प्रिंटर भी होता है। गैस एनालाइजर को वाहन स्टार्ट करने के बाद साइलेंसर में लगाया जाता है और वाहन से निकलने वाली गैस के आंकड़े कम्प्यूटर में दर्ज हो जाते हैं। एक बार आंकड़े दर्ज होने के बाद अगर तय दायरे में वाहन से प्रदूषण हो रहा है तो पीयूसी सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाता है। पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के वाहनों के लिए प्रदूषण का दायरा अलग-अलग होता है।
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