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Automobile Industry: अब इंजन नहीं, सॉफ्टवेयर होगा ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की नई ताकत! रिपोर्ट में खुलासा
Tue, 09 Sep 2025 03:21 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Tue, 09 Sep 2025 03:21 PM IST
सार
कभी कार कंपनियां अपने हॉर्सपावर, चेसिस की मजबूती और स्पीड पर गर्व करती थीं। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। आने वाले समय में कार कंपनियों की असली पहचान इंजन नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर होगा।
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ADAS in Car
- फोटो : Freepik
विस्तार
कभी कार कंपनियां अपने हॉर्सपावर, चेसिस की मजबूती और स्पीड पर गर्व करती थीं। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। आने वाले समय में कार कंपनियों की असली पहचान इंजन नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर होगा। एक ताजा रिपोर्ट बताती है कि साल 2035 तक कार कंपनियों की आधी से ज्यादा कमाई सॉफ्टवेयर-आधारित प्रोडक्ट्स और मोबिलिटी सर्विस से होगी।
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महत्वाकांक्षा बड़ी, लेकिन प्रगति धीमी
ऑटो इंडस्ट्री में 92 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि भविष्य में हर कार कंपनी एक सॉफ्टवेयर कंपनी बन जाएगी। लेकिन फिलहाल जमीनी हकीकत थोड़ी अलग है। इस वक्त सिर्फ 14 प्रतिशत कंपनियां ही सॉफ्टवेयर-ड्रिवन मोबिलिटी (SDM) को बड़े पैमाने पर लागू कर पाई हैं। जबकि लगभग एक-तिहाई कंपनियां अभी आधे रास्ते तक ही पहुंची हैं। साफ है कि इरादे और हकीकत के बीच अभी बड़ा अंतर है।
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ऑटो इंडस्ट्री में 92 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि भविष्य में हर कार कंपनी एक सॉफ्टवेयर कंपनी बन जाएगी। लेकिन फिलहाल जमीनी हकीकत थोड़ी अलग है। इस वक्त सिर्फ 14 प्रतिशत कंपनियां ही सॉफ्टवेयर-ड्रिवन मोबिलिटी (SDM) को बड़े पैमाने पर लागू कर पाई हैं। जबकि लगभग एक-तिहाई कंपनियां अभी आधे रास्ते तक ही पहुंची हैं। साफ है कि इरादे और हकीकत के बीच अभी बड़ा अंतर है।
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ADAS in India
- फोटो : Freepik
हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का जुड़ाव है बड़ी चुनौती
सबसे बड़ी रुकावट यह है कि अब भी ज्यादातर कंपनियों में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर बुरी तरह एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। सिर्फ 10 प्रतिशत कंपनियां ही इन्हें अलग करने में गंभीर प्रगति कर पाई हैं। लेकिन अगर तेजी से इनोवेशन और स्केलेबिलिटी लानी है तो दोनों को अलग करना जरूरी है।
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सबसे बड़ी रुकावट यह है कि अब भी ज्यादातर कंपनियों में हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर बुरी तरह एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। सिर्फ 10 प्रतिशत कंपनियां ही इन्हें अलग करने में गंभीर प्रगति कर पाई हैं। लेकिन अगर तेजी से इनोवेशन और स्केलेबिलिटी लानी है तो दोनों को अलग करना जरूरी है।
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टेक कंपनियों से हाथ मिलाने की तैयारी
कार कंपनियां मान चुकी हैं कि इस ट्रांसफॉर्मेशन को अकेले करना आसान नहीं है। लगभग 40 प्रतिशत कंपनियां पहले से ही बड़ी टेक और क्लाउड कंपनियों के साथ काम कर रही हैं। वहीं, करीब एक-तिहाई कंपनियां अगले तीन साल में जॉइंट वेंचर बनाने की योजना बना रही हैं।
इसी के साथ, 70 प्रतिशत कंपनियां इन-हाउस सॉफ्टवेयर टीम बना रही हैं। ताकि अपने ब्रांड से जुड़े अहम टेक्नोलॉजी पर पूरा कंट्रोल रख सकें। सप्लाई चेन को भी नई तरह से तैयार किया जा रहा है, जिसमें भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी यूरोप नए सोर्सिंग हब बनकर उभर रहे हैं।
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AI in Car
- फोटो : Freepik
AI से मिलेगी सबसे बड़ी ताकत
ऑटोमोबाइल सेक्टर की नई रणनीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) (एआई) सबसे अहम भूमिका निभा रहा है। चाहे ऑटोनॉमस ड्राइविंग हो, एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) हो या साइबर सिक्योरिटी, 85 प्रतिशत कंपनियों का मानना है कि एआई बेहद जरूरी है।
सिर्फ सेफ्टी ही नहीं, एआई से कंपनियों को खर्च कम करने, एफिशिएंसी बढ़ाने और नई मोबिलिटी सर्विस बनाने में भी मदद मिलेगी। लेकिन ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए यह बदलाव आसान नहीं है। क्योंकि अब तक उनकी ताकत टॉर्क और स्पीड थी, लेकिन अब उन्हें मशीन लर्निंग और डेटा पर भरोसा करना होगा।
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सिर्फ सेफ्टी ही नहीं, एआई से कंपनियों को खर्च कम करने, एफिशिएंसी बढ़ाने और नई मोबिलिटी सर्विस बनाने में भी मदद मिलेगी। लेकिन ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए यह बदलाव आसान नहीं है। क्योंकि अब तक उनकी ताकत टॉर्क और स्पीड थी, लेकिन अब उन्हें मशीन लर्निंग और डेटा पर भरोसा करना होगा।
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पूरी इंडस्ट्री में बदलाव की जरूरत
कैपजेमिनी की रिपोर्ट बताती है कि 86 प्रतिशत कंपनियों को लगता है कि सॉफ्टवेयर-ड्रिवन रणनीति अपनाने के लिए उन्हें अपने पूरे संस्थान की रूपरेखा बदलनी होगी। इसमें इंजीनियर्स को फिर से प्रशिक्षित करना, नए प्रोसेस बनाना और एकीकृत सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म तैयार करना शामिल है।
यानी, जिस तरह कभी असेंबली लाइन ने ऑटोमोबाइल सेक्टर में क्रांति लाई थी। अब उसी तरह सॉफ्टवेयर इसका सबसे बड़ा बदलाव बनने जा रहा है।
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